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131 करोड़ का बालू घोटाला: महादेव एन्क्लेव के ठिकानों पर ईडी की बड़ी छापेमारी, सैटेलाइट डेटा से हुआ खुलासा

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

18 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें 1.4K
131 करोड़ का बालू घोटाला: महादेव एन्क्लेव के ठिकानों पर ईडी की बड़ी छापेमारी, सैटेलाइट डेटा से हुआ खुलासा
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बिहार के बांका जिले में हुए 131 करोड़ रुपये के बड़े बालू खनन घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शुक्रवार को एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। ईडी की पटना जोनल यूनिट ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के तहत बिहार, दिल्ली और राजस्थान में फैले महादेव एन्क्लेव प्राइवेट लिमिटेड के 8 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। इस कार्रवाई ने खनन माफियाओं के बीच हड़कंप मचा दिया है।

सैटेलाइट तकनीक से खुला 131 करोड़ का राज

इस पूरे घोटाले का पर्दाफाश किसी सामान्य जांच से नहीं, बल्कि आईआईटी पटना की तकनीकी रिपोर्ट से हुआ। ईडी ने 1 अक्टूबर 2024 को आईआईटी पटना से 'जियोस्पेशियल एनालिसिस' यानी उपग्रह आधारित विश्लेषण करने का अनुरोध किया था। इस वैज्ञानिक जांच में यह स्पष्ट हो गया कि महादेव एन्क्लेव ने वर्ष 2015-16 से 2022-23 के बीच सरकारी नियमों को दरकिनार कर बड़े पैमाने पर अवैध खनन किया। हैरान करने वाली बात यह है कि कंपनी द्वारा की गई 131 करोड़ रुपये से अधिक की यह अवैध निकासी सरकारी रिकॉर्ड में कहीं भी दर्ज नहीं थी।

ईडी की टीमों ने शुक्रवार सुबह से ही पटना और बांका में दो-दो स्थानों पर दबिश दी। इसके अलावा दिल्ली-एनसीआर में एक, राजस्थान के श्रीगंगानगर में चार और जयपुर में एक ठिकाने पर तलाशी अभियान चलाया गया। बांका के कटोरिया बस स्टैंड के पास स्थित महादेव एन्क्लेव के मुख्य कार्यालय, जिसे 'लाल कोठी' के नाम से जाना जाता है, वहां भी ईडी के अधिकारियों ने गहन छानबीन की।

राजस्थान के चांडक परिवार पर नियंत्रण का आरोप

जांच एजेंसियों के अनुसार, महादेव एन्क्लेव का संचालन मुख्य रूप से राजस्थान के श्रीगंगानगर निवासी चांडक परिवार के हाथों में है। इस पूरे नेटवर्क को उद्योगपति अशोक चांडक और उनके बेटे राघव चांडक द्वारा नियंत्रित किया जा रहा था। ईडी ने आईआईटी पटना से प्राप्त साक्ष्यों को बिहार सरकार के साथ साझा किया था, जिसके बाद खान एवं भू-तत्व विभाग ने 21 अगस्त 2025 को महादेव एन्क्लेव के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी।

यह मामला न केवल अवैध खनन का है, बल्कि मनी लॉन्ड्रिंग का भी है। ईडी इस बात की जांच कर रही है कि अवैध खनन से अर्जित की गई 131 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि को किस तरह से विभिन्न खातों और संपत्तियों में निवेश किया गया। छापेमारी के दौरान मिले दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण किया जा रहा है, जिससे इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के नाम भी सामने आ सकते हैं।

प्रशासनिक लापरवाही और आगे की राह

इस मामले ने बांका जिले में खनन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इतने लंबे समय तक सरकारी रिकॉर्ड से बाहर रहकर करोड़ों का अवैध खनन होना बड़ी प्रशासनिक चूक की ओर इशारा करता है। फिलहाल, ईडी की टीम जब्त किए गए दस्तावेजों की पड़ताल में जुटी है। आने वाले दिनों में इस मामले में कई और गिरफ्तारियां और संपत्तियों की कुर्की की कार्रवाई देखने को मिल सकती है।

ईडी की इस कार्रवाई को बिहार में अवैध खनन के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी तकनीकी-आधारित जांच माना जा रहा है। सैटेलाइट डेटा के उपयोग ने यह साबित कर दिया है कि अब अवैध खनन करने वालों के लिए छिपना मुश्किल होगा। जांच एजेंसी अब इस बात पर केंद्रित है कि इस घोटाले में शामिल अन्य प्रभावशाली लोगों की भूमिका क्या थी और इस अवैध धन का अंतिम लाभार्थी कौन था।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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