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संसद में धर्मेंद्र प्रधान का तीखा पलटवार: 'मैं स्ट्रीट फाइटर हूं, एसी रूम का एक्टिविस्ट नहीं'

शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद धर्मेंद्र प्रधान पहली बार संसद पहुंचे। इस दौरान विपक्ष के तंज पर उन्होंने खुद को 'स्ट्रीट फाइटर' बताते हुए कड़ा जवाब दिया।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

27 जुलाई 20262 मिनट पढ़ें 801
संसद में धर्मेंद्र प्रधान का तीखा पलटवार: 'मैं स्ट्रीट फाइटर हूं, एसी रूम का एक्टिविस्ट नहीं'
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संसद में धर्मेंद्र प्रधान की वापसी

शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देने के बाद सोमवार को धर्मेंद्र प्रधान पहली बार संसद भवन पहुंचे। उनके संसद परिसर में कदम रखते ही भाजपा और एनडीए के सांसदों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। इस दौरान सत्ता पक्ष के नेताओं के साथ-साथ विपक्षी दलों के सांसदों ने भी उनसे मुलाकात की, जिससे परिसर में गहमागहमी का माहौल रहा।

प्रधान की इस उपस्थिति को राजनीतिक गलियारों में काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस्तीफा देने के बाद यह उनका पहला सार्वजनिक संसदीय दौरा था, जहां वे अपने सहयोगियों के बीच नजर आए। हालांकि, इस दौरान विपक्ष की ओर से उन पर निशाना साधने की कोशिश भी की गई।

विपक्ष के तंज पर प्रधान का करारा जवाब

संसद परिसर में मौजूद कुछ विपक्षी सांसदों ने प्रधान पर तंज कसते हुए कहा कि यह पहली बार है जब किसी मंत्री ने बिना किसी औपचारिक आरोप का सामना किए अपने पद से इस्तीफा दिया है। इसी क्रम में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने भी टिप्पणी करते हुए कहा कि 'ऐसा होता रहता है'। इस पर धर्मेंद्र प्रधान ने बिना किसी हिचकिचाहट के पलटवार किया।

प्रधान ने अपनी प्रतिक्रिया में स्पष्ट रूप से कहा कि वे एक 'स्ट्रीट फाइटर' हैं और उन्हें एसी कमरों में बैठकर राजनीति करने वाले एक्टिविस्टों की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। उनका यह बयान उनके राजनीतिक तेवर को दर्शाता है, जो उन्होंने अपने लंबे करियर के दौरान विकसित किया है।

इस्तीफे की पृष्ठभूमि और विवाद

धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई को शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दिया था। उनके इस्तीफे के पीछे मुख्य कारण नीट (NEET) पेपर लीक मामले को लेकर बढ़ता विवाद था। इस मुद्दे पर विपक्षी दलों और विभिन्न छात्र संगठनों ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल रखा था। जंतर-मंतर पर पिछले 36 दिनों से लगातार धरना-प्रदर्शन चल रहा था, जिसमें उनके इस्तीफे की मांग प्रमुखता से उठाई जा रही थी।

पेपर लीक मामले ने देश भर में शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए थे, जिसके चलते सरकार पर भारी दबाव था। प्रधान का इस्तीफा इसी दबाव के बीच एक बड़े राजनीतिक घटनाक्रम के रूप में देखा गया। हालांकि, उन्होंने अपने बयानों से यह स्पष्ट कर दिया है कि वे इन चुनौतियों से घबराने वाले नहीं हैं।

राजनीतिक भविष्य पर नजरें

संसद में प्रधान का यह अंदाज यह संकेत देता है कि वे भविष्य में भी सक्रिय राजनीति में अपनी भूमिका निभाते रहेंगे। भले ही उन्होंने शिक्षा मंत्री का पद छोड़ दिया हो, लेकिन भाजपा के भीतर और संसद में उनकी सक्रियता कम होती नहीं दिख रही है। उनके समर्थकों का मानना है कि 'स्ट्रीट फाइटर' वाली छवि उन्हें पार्टी में एक मजबूत नेता के रूप में स्थापित करती है।

आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि प्रधान की अगली भूमिका क्या होती है और विपक्ष उनके इस बयान पर किस तरह की प्रतिक्रिया देता है। फिलहाल, संसद में उनका यह रुख चर्चा का विषय बना हुआ है और राजनीतिक विश्लेषक इसे उनके अगले कदम के संकेत के रूप में देख रहे हैं।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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