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डीग: कलेक्टर के सख्त आदेशों के बावजूद शहर में पसरी गंदगी, सफाई व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

डीग में जिला कलेक्टर मयंक मनीष के सख्त निर्देशों के बावजूद शहर की सफाई व्यवस्था बदहाल है। मंगलवार को कलेक्टर ने शहर का निरीक्षण कर गंदगी पर नाराजगी जताई थी और तत्काल सफाई के आदेश दिए थे, लेकिन दो दिन बाद भी स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

16 जुलाई 20262 मिनट पढ़ें
डीग: कलेक्टर के सख्त आदेशों के बावजूद शहर में पसरी गंदगी, सफाई व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
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कलेक्टर के निर्देशों की अनदेखी

राजस्थान के डीग जिले में प्रशासनिक सख्ती के बावजूद जमीनी हकीकत जस की तस बनी हुई है। जिला कलेक्टर मयंक मनीष ने हाल ही में शहर का दौरा कर सफाई व्यवस्था का जायजा लिया था और गंदगी को लेकर कड़ी नाराजगी जताई थी। उन्होंने नगर परिषद को तत्काल प्रभाव से शहर को स्वच्छ बनाने के निर्देश दिए थे, लेकिन उनके आदेशों के दो दिन बीत जाने के बाद भी शहर की सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर कचरे के ढेर साफ दिखाई दे रहे हैं।

मंगलवार को कलेक्टर मयंक मनीष ने शहर के प्रमुख बाजारों और मुख्य मार्गों का निरीक्षण किया था। इस दौरान उन्होंने नगर परिषद आयुक्त कुलदीप सिंह को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि शहर में कचरे के निस्तारण के लिए विशेष अभियान चलाया जाए। कलेक्टर ने चेतावनी दी थी कि सफाई के मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हालांकि, उनके इन सख्त निर्देशों का असर धरातल पर नजर नहीं आ रहा है।

निवासियों की बढ़ती परेशानी

शहर के मुख्य मार्गों पर कचरे के ढेर जमा होने के कारण स्थानीय निवासियों और राहगीरों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। गंदगी से उठने वाली दुर्गंध के कारण लोगों का पैदल चलना भी दूभर हो गया है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासन के दावों और हकीकत में जमीन-आसमान का अंतर है। कचरा समय पर न उठाए जाने से न केवल शहर की सुंदरता प्रभावित हो रही है, बल्कि स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी पैदा हो रही हैं।

विशेष रूप से बरसात के मौसम में कचरे के ढेरों के कारण संक्रमण फैलने का खतरा काफी बढ़ गया है। निवासियों का आरोप है कि नगर परिषद के अधिकारी और कर्मचारी कलेक्टर के आदेशों को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं, जिसके कारण शहर में सफाई व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। लोगों ने मांग की है कि प्रशासन को अब केवल आदेश देने के बजाय जमीनी स्तर पर कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए।

प्रशासनिक कार्यशैली पर सवाल

कलेक्टर के दौरे के बाद भी सफाई न होना नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े करता है। यदि जिला प्रशासन के मुखिया के निर्देशों का पालन दो दिनों तक नहीं हो पा रहा है, तो यह स्पष्ट है कि नगर परिषद के स्तर पर जवाबदेही का अभाव है। अतिक्रमण और कचरा प्रबंधन जैसे मुद्दों पर लंबे समय से शिकायतें मिल रही हैं, लेकिन ठोस समाधान के अभाव में स्थिति जस की तस बनी हुई है।

अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इस मामले में आगे क्या कदम उठाता है। क्या नगर परिषद के अधिकारियों पर कोई कार्रवाई की जाएगी या फिर सफाई व्यवस्था इसी तरह भगवान भरोसे चलती रहेगी? शहर के लोग अब प्रशासन से ठोस और स्थाई समाधान की उम्मीद कर रहे हैं ताकि उन्हें गंदगी और बीमारियों के इस माहौल से निजात मिल सके।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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