सीमा सड़क संगठन में करोड़ों का घोटाला: CBI की 11 राज्यों में बड़ी छापेमारी, 10 सैन्य अधिकारी नामजद

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

11 राज्यों में सीबीआई का बड़ा एक्शन
सीमा सड़क संगठन (BRO) में हुए कथित वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने सोमवार को देशव्यापी कार्रवाई की है। जांच एजेंसी ने 11 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में फैले 26 विभिन्न ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। इस कार्रवाई का उद्देश्य सरकारी धन के गबन और फर्जीवाड़े से जुड़े साक्ष्यों को जुटाना है।
सीबीआई द्वारा की गई यह छापेमारी जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, असम, अरुणाचल प्रदेश और नगालैंड में संचालित की गई। इस बड़े ऑपरेशन के दौरान एजेंसी ने महत्वपूर्ण दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों को जब्त किया है, जो कथित भ्रष्टाचार की कड़ियों को जोड़ने में मदद करेंगे।
लेफ्टिनेंट कर्नल और मेजर समेत 10 अधिकारी घेरे में
जांच एजेंसी ने इस मामले में कुल 4 अलग-अलग एफआईआर दर्ज की हैं। इन मामलों में सैन्य अधिकारियों की संलिप्तता सामने आई है। आरोपी बनाए गए 10 लोगों में लेफ्टिनेंट कर्नल, मेजर और इंजीनियर रैंक के अधिकारी शामिल हैं। इनके अलावा कुछ निजी व्यक्तियों को भी इस साजिश में नामजद किया गया है, जो कथित तौर पर इस घोटाले का हिस्सा थे।
प्राथमिक जांच के अनुसार, यह मामला मुख्य रूप से लद्दाख में बीआरओ के 'प्रोजेक्ट विजयक' और 'प्रोजेक्ट योजक' से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि इन परियोजनाओं के तहत कैजुअल मजदूरों की तैनाती में बड़े पैमाने पर धांधली की गई। फर्जी मजदूरों के नाम पर सरकारी खजाने से भुगतान निकाला गया, जिसका लाभ आरोपियों ने निजी तौर पर उठाया।
गबन, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार की गंभीर धाराएं
सीबीआई ने इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया है। आरोपों में सरकारी धन का गबन, धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक साजिश और रिश्वतखोरी शामिल हैं। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस पूरे नेटवर्क का संचालन किस तरह किया जा रहा था और इसमें और कौन-कौन से लोग शामिल हो सकते हैं।
जांच के दायरे में आए इन प्रोजेक्ट्स का उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का विकास करना था, लेकिन इन पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों ने सुरक्षा और निर्माण कार्यों की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सीबीआई के अधिकारी अब जब्त किए गए दस्तावेजों का विश्लेषण कर रहे हैं, जिसके बाद आरोपियों से पूछताछ का सिलसिला शुरू होगा।
आगे की कानूनी कार्रवाई
सीबीआई ने स्पष्ट किया है कि छापेमारी के दौरान मिले सबूतों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। फिलहाल, एजेंसी उन सभी वित्तीय लेनदेन की जांच कर रही है जो पिछले कुछ वर्षों में इन प्रोजेक्ट्स के तहत किए गए थे। आने वाले दिनों में कुछ और गिरफ्तारियों या पूछताछ का दौर भी देखने को मिल सकता है।
यह मामला रक्षा क्षेत्र में भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत देखा जा रहा है। सैन्य अधिकारियों की संलिप्तता ने इस मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। जांच एजेंसी अब यह भी पता लगा रही है कि क्या इस घोटाले में कोई बाहरी ठेकेदार या निजी कंपनियां भी शामिल थीं, जिन्होंने अधिकारियों के साथ मिलकर सरकारी धन को ठिकाने लगाया।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
