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भिंड: फर्जी जन्म प्रमाण पत्र मामले में नायब तहसीलदार समेत 7 पर दर्ज होगी एफआईआर, कोर्ट का सख्त आदेश

Bhind court orders FIR against 7 including Naib Tehsildar for fake birth certificate fraud. न्यायालय ने थाना सिटी कोतवाली भिंड को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 की धारा 336(2), 336(3), 340(1) और 340(2) के तहत प्रकरण दर्ज कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। यह आदेश गौरव शर्मा द्वारा दायर एक अपंजीकृत परिवाद पर धारा 75(3) भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) 2023 के अंतर्गत सुनवाई करते हुए पारित किया गया।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

17 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें 479
भिंड: फर्जी जन्म प्रमाण पत्र मामले में नायब तहसीलदार समेत 7 पर दर्ज होगी एफआईआर, कोर्ट का सख्त आदेश
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भिंड सीजेएम कोर्ट का बड़ा फैसला

मध्य प्रदेश के भिंड जिले में फर्जी जन्म प्रमाण पत्र तैयार करने के एक गंभीर मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) निधि नीलेश श्रीवास्तव ने सात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं। इस मामले में तत्कालीन नायब तहसीलदार सहित राजस्व और पंचायत विभाग के कई कर्मचारी शामिल हैं। कोर्ट ने पुलिस को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू करने को कहा है।

यह आदेश गौरव शर्मा द्वारा दायर एक निजी परिवाद पर सुनवाई के दौरान दिया गया। परिवाद में आरोप लगाया गया था कि आरोपियों ने एक सुनियोजित षड्यंत्र के तहत विमल यादव को कानूनी कार्रवाई से बचाने के लिए फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनवाया था। कोर्ट ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) 2023 की धारा 75(3) के तहत इस मामले में संज्ञेय अपराध मानते हुए पुलिस को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

इन लोगों पर होगी कानूनी कार्रवाई

कोर्ट के आदेश के बाद जिन सात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया जाएगा, उनमें तत्कालीन नायब तहसीलदार मोहनलाल शर्मा, विमल यादव, आशुतोष सिंह यादव, सचिव शेरसिंह यादव, पटवारी संजीव शर्मा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता रजनी जादौन और राजकुमार दुबे शामिल हैं। इन सभी पर मिलीभगत कर सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर करने और गलत जानकारी के आधार पर प्रमाण पत्र जारी करने का आरोप है।

शिकायतकर्ता ने कोर्ट को बताया कि विमल यादव को एक अन्य मामले में लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से उसकी जन्म तिथि के रिकॉर्ड में छेड़छाड़ की गई थी। इस कार्य में राजस्व विभाग के अधिकारियों और पंचायत स्तर के कर्मचारियों ने अपनी शक्तियों का दुरुपयोग किया। कोर्ट ने प्रस्तुत दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर प्रथम दृष्टया इसे एक गंभीर अपराध माना है।

प्रशासनिक महकमे में मचा हड़कंप

इस न्यायिक आदेश के बाद भिंड के राजस्व और पंचायत विभाग में हड़कंप की स्थिति है। कोर्ट ने सिटी कोतवाली थाना प्रभारी को निर्देश दिए हैं कि वे तत्काल एफआईआर दर्ज करें और की गई कार्रवाई की रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत करें। पुलिस अब इस पूरे मामले में दस्तावेजों का सत्यापन करेगी और आरोपियों की भूमिका की गहन जांच करेगी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस विभाग भी सतर्क हो गया है। एसआई देवीदीन अनुरागी के अनुसार, कोर्ट के आदेश प्राप्त होने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों से मार्गदर्शन लिया गया है। अब पुलिस इस मामले में शामिल सभी सरकारी रिकॉर्ड्स को जब्त कर उनकी जांच करेगी ताकि यह पता लगाया जा सके कि फर्जीवाड़ा किस स्तर पर और कैसे अंजाम दिया गया।

आगे की कानूनी प्रक्रिया

पुलिस अब भारतीय न्याय संहिता की धारा 336(2), 336(3), 340(1) और 340(2) के तहत प्रकरण दर्ज कर अपनी जांच आगे बढ़ाएगी। इस जांच में यह स्पष्ट होगा कि जन्म प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया में किन नियमों का उल्लंघन किया गया और किन अधिकारियों ने अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं किया। कोर्ट की निगरानी में होने वाली यह जांच कई अन्य लोगों के लिए भी मुसीबत का कारण बन सकती है।

यह मामला सरकारी दस्तावेजों की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े करता है। स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि यदि सरकारी तंत्र का उपयोग इस तरह के फर्जीवाड़े के लिए किया जा रहा है, तो आम जनता के लिए न्याय की राह कितनी कठिन हो सकती है। फिलहाल, सभी की निगाहें पुलिस की आगामी कार्रवाई और कोर्ट में पेश होने वाली रिपोर्ट पर टिकी हैं।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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