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बैतूल गैंगरेप-हत्या मामला: चार साल बाद कोर्ट का बड़ा फैसला, दो दोषियों को उम्रकैद की सजा

बैतूल जिले के चिचोली थाना क्षेत्र में वर्ष 2022 में हुई गैंगरेप और हत्या की घटना में गुरुवार को जिला कोर्ट ने दो आरोपियों को दोषी ठहराया। करीब चार साल तक चली सुनवाई के बाद प्रधान जिला एवं सत्र जज दिनेश चंद्र थपलियाल ने दोनों को हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

17 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें
बैतूल गैंगरेप-हत्या मामला: चार साल बाद कोर्ट का बड़ा फैसला, दो दोषियों को उम्रकैद की सजा
मूल स्रोत

चार साल के लंबे इंतजार के बाद न्याय

मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में वर्ष 2022 में हुई एक जघन्य गैंगरेप और हत्या की घटना में जिला अदालत ने अपना फैसला सुना दिया है। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश दिनेश चंद्र थपलियाल की अदालत ने मामले में शामिल दो मुख्य आरोपियों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। यह मामला जिले के चिचोली थाना क्षेत्र का है, जिसने उस समय पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया था।

न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दोषियों पर कठोर दंड का प्रावधान किया है। हत्या के अपराध के लिए दोनों दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई है। इसके अतिरिक्त, गैंगरेप के मामले में 20-20 साल का सश्रम कारावास, बार-बार दुष्कर्म के लिए 10-10 साल का सश्रम कारावास और साक्ष्य मिटाने के अपराध में 5-5 साल की सजा सुनाई गई है। अदालत ने दोषियों पर भारी जुर्माना भी लगाया है, जिसे न भरने की स्थिति में उन्हें अतिरिक्त सजा काटनी होगी।

घटनाक्रम: गहरी नींद से उठी एक खौफनाक सुबह

घटना के विवरण के अनुसार, वर्ष 2022 में एक विवाहित महिला अपने पति के साथ घर पर सो रही थी। अगली सुबह जब पति की नींद खुली, तो उसने अपनी पत्नी को बिस्तर पर नहीं पाया। परिजनों और ग्रामीणों ने तत्काल महिला की खोजबीन शुरू की। कुछ ही घंटों की मशक्कत के बाद, गांव के समीप स्थित मंगलू के खेत के पास एक नाले में महिला का शव बरामद हुआ।

मृतका के पति ने मौके पर पहुंचकर शव की पहचान की। महिला के गले में साड़ी का फंदा कसा हुआ था और शरीर पर संघर्ष के स्पष्ट निशान मौजूद थे। इस वीभत्स दृश्य ने पूरे गांव में सनसनी फैला दी थी। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया।

पोस्टमार्टम और वैज्ञानिक साक्ष्यों ने खोली पोल

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में महिला के साथ गैंगरेप होने की पुष्टि हुई, जिसके बाद पुलिस ने मामले को हत्या, सामूहिक दुष्कर्म और साक्ष्य मिटाने की धाराओं में दर्ज कर जांच तेज कर दी। पुलिस ने इस मामले में एफएसएल (FSL) की वैज्ञानिक रिपोर्ट और अन्य तकनीकी साक्ष्यों को आधार बनाया। जांच अधिकारियों ने कड़ी मेहनत से सबूत जुटाए और गवाहों के बयान दर्ज किए, जिससे आरोपियों के खिलाफ एक मजबूत केस तैयार हो सका।

अदालत में सुनवाई के दौरान वरिष्ठ लोक अभियोजक नितिन मिश्रा ने सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने एफएसएल रिपोर्ट और अन्य पुख्ता सबूतों को अदालत के सामने पेश किया। अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए ठोस साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी पाया और उन्हें कठोर दंड से दंडित किया।

कानूनी प्रक्रिया और न्याय की जीत

करीब चार वर्षों तक चली इस कानूनी लड़ाई के बाद पीड़ित परिवार को न्याय मिला है। इस मामले ने समाज में महिलाओं की सुरक्षा पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े किए थे। अदालत के इस फैसले को स्थानीय स्तर पर न्यायपालिका की एक बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि साक्ष्य आधारित सुनवाई ने दोषियों को कानून के दायरे में लाकर खड़ा कर दिया।

पुलिस और अभियोजन पक्ष की ओर से की गई कार्रवाई को सराहनीय माना जा रहा है। मामले के सभी पहलुओं को वैज्ञानिक तरीके से जांचने और अदालत में सही ढंग से प्रस्तुत करने का ही परिणाम है कि दोषियों को उनके किए की सजा मिल सकी। यह फैसला भविष्य के लिए भी एक नजीर बनेगा, जो अपराधियों में कानून का डर पैदा करने का काम करेगा।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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