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बालाघाट: 9 साल की बच्ची से दुष्कर्म के दोषी को 20 साल की कैद, अदालत ने सुनाया कड़ा फैसला

Balaghat minor girl rape case justice delivery and court sentencing updates. बालाघाट विशेष न्यायालय ने 9 साल की मासूम के साथ रेप करने वाले आरोपी को 20 साल कारावास की सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश गौतम सिंह मरकाम की अदालत ने 9 महीने पुराने इस संवेदनशील मामले में त्वरित सुनवाई करते हुए आरोपी को दोषी पाया और यह कड़ा फैसला सुनाया।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

15 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें 274
बालाघाट: 9 साल की बच्ची से दुष्कर्म के दोषी को 20 साल की कैद, अदालत ने सुनाया कड़ा फैसला
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बालाघाट विशेष न्यायालय का बड़ा फैसला

मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में एक नौ साल की मासूम बच्ची के साथ हुए दुष्कर्म के मामले में विशेष न्यायालय ने आरोपी को दोषी करार देते हुए 20 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश गौतम सिंह मरकाम की अदालत ने इस संवेदनशील मामले में त्वरित सुनवाई पूरी करते हुए न्याय का मार्ग प्रशस्त किया है। यह घटना करीब नौ महीने पुरानी है, जिस पर अदालत ने अब अपना अंतिम फैसला सुनाया है।

अदालत ने आरोपी को न केवल लंबी कैद की सजा सुनाई है, बल्कि उस पर 6 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। इस फैसले को क्षेत्र में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के प्रति एक कड़ा संदेश माना जा रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए अभियोजन पक्ष ने अदालत के समक्ष ठोस वैज्ञानिक साक्ष्य और गवाहों के बयान प्रस्तुत किए थे, जिसके आधार पर आरोपी का अपराध सिद्ध हुआ।

क्या थी घटना की पृष्ठभूमि

यह शर्मनाक घटना 29 अक्टूबर 2025 को बालाघाट के ग्रामीण थाना क्षेत्र के अंतर्गत घटित हुई थी। पीड़िता अपने घर के समीप खेल रही थी, तभी पड़ोस में रहने वाले 45 वर्षीय पंचम बारेकर की नजर उस पर पड़ी। आरोपी ने बच्ची को अकेला पाकर उसे बहला-फुसलाकर अपने घर के भीतर बुलाया और दरवाजा बंद कर लिया। इसके बाद आरोपी ने मासूम के साथ दुष्कर्म जैसी घिनौनी वारदात को अंजाम दिया।

वारदात के बाद बच्ची किसी तरह आरोपी के चंगुल से छूटकर अपने घर पहुंची और परिजनों को पूरी आपबीती सुनाई। बच्ची के साथ हुई इस बर्बरता की जानकारी मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। पीड़िता की मां ने तुरंत स्थानीय ग्रामीण थाने में जाकर आरोपी पंचम बारेकर के खिलाफ नामजद शिकायत दर्ज कराई।

पुलिस की त्वरित कार्रवाई और कानूनी प्रक्रिया

शिकायत मिलते ही पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने मामले की गहन तफ्तीश की और घटना से जुड़े सभी महत्वपूर्ण सबूत जुटाए। वैज्ञानिक साक्ष्यों के साथ पुलिस ने समयबद्ध तरीके से न्यायालय में चार्जशीट पेश की, जिससे मामले की सुनवाई में तेजी आई। विशेष लोक अभियोजक कपिल कुमार डहेरिया ने अदालत में पीड़िता का पक्ष मजबूती से रखा।

अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने और पेश किए गए साक्ष्यों का बारीकी से विश्लेषण करने के बाद 15 जुलाई 2026 को आरोपी को दोषी पाया। न्यायाधीश ने अपने फैसले में कहा कि इस तरह के अपराध समाज के लिए एक कलंक हैं और इनके लिए कठोर सजा का प्रावधान आवश्यक है। 20 साल की कैद और जुर्माने की सजा के बाद आरोपी को जेल भेज दिया गया है।

न्याय व्यवस्था की भूमिका

इस मामले में त्वरित सुनवाई और सजा सुनाए जाने को लेकर स्थानीय लोगों ने न्यायपालिका की सराहना की है। नौ महीने की अल्प अवधि में मामले का निपटारा होना पीड़ित परिवार के लिए राहत की बात है। कानूनी जानकारों का मानना है कि इस तरह के फैसलों से अपराधियों में कानून का डर कायम रहता है और समाज में सुरक्षा का भाव मजबूत होता है।

वर्तमान में, इस फैसले के बाद क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और बच्चों की सुरक्षा को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। पुलिस प्रशासन ने भी अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें। इस मामले में मिली सजा अब अन्य अपराधियों के लिए एक नजीर के रूप में देखी जा रही है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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