आजमगढ़: 17 साल पुराने जानलेवा हमले के मामले में 4 दोषियों को 7 साल की कैद
यह फैसला अपर सत्र न्यायाधीश एंटी करप्शन कोर्ट नंबर एक अजय कुमार शाही ने शनिवार को सुनाया। अभियोजन पक्ष के अनुसार वादी रामदेव निवासी छगनपुर थाना फूलपुर कि गांव से गांव के हरिवंश आदि से जमीन पैमाइश को लेकर विवाद चल रहा था।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

17 साल बाद मिला न्याय: जमीन विवाद में हुआ था हमला
उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले की एक अदालत ने 17 साल पुराने एक चर्चित जानलेवा हमले के मामले में अपना फैसला सुनाया है। एंटी करप्शन कोर्ट नंबर-1 के अपर सत्र न्यायाधीश अजय कुमार शाही ने इस मामले में चार दोषियों को सात-सात वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषियों पर आर्थिक दंड भी लगाया है, जिससे यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
घटना की शुरुआत 5 नवंबर 2009 की रात को हुई थी। फूलपुर थाना क्षेत्र के छगनपुर गांव निवासी रामदेव का गांव के ही कुछ लोगों के साथ जमीन की पैमाइश को लेकर पुराना विवाद चल रहा था। इस विवाद ने उस समय हिंसक रूप ले लिया जब रात करीब नौ बजे आरोपियों ने योजनाबद्ध तरीके से रामदेव के घर पर धावा बोल दिया।
हमले में घायल हुए थे दो लोग
इस हमले में रामदेव और उनका भतीजा अरविंद गंभीर रूप से घायल हो गए थे। घटना के बाद स्थानीय पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। पुलिस ने साक्ष्यों को जुटाया और विवेचना पूरी करने के बाद चारों आरोपियों के खिलाफ अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया। लंबे समय तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद अब जाकर पीड़ितों को न्याय मिला है।
अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता अभय दत्त गोंड और हरेंद्र सिंह ने अदालत में प्रभावी पैरवी की। मुकदमे के दौरान अभियोजन ने कुल छह गवाहों को अदालत के समक्ष पेश किया। इन गवाहों की गवाही और पेश किए गए ठोस साक्ष्यों ने मामले को साबित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
दोषियों पर लगा जुर्माना
अदालत ने हरिवंश यादव, हंसराज यादव, हरेंद्र यादव और छाजी सोनकर को दोषी करार देते हुए सात-सात साल की सजा सुनाई। इसके अतिरिक्त, अदालत ने प्रत्येक दोषी पर 14-14 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। जुर्माने की राशि जमा न करने पर दोषियों को अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ सकती है।
न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद यह फैसला सुनाया। इस मामले में लंबे समय तक चली कानूनी लड़ाई ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अपराध चाहे कितना भी पुराना क्यों न हो, कानून के हाथ लंबे होते हैं और दोषियों को सजा जरूर मिलती है।
कानूनी प्रक्रिया का महत्व
17 साल तक चले इस मुकदमे ने पीड़ित परिवार को काफी संघर्ष का सामना करना पड़ा। इस फैसले के बाद क्षेत्र में चर्चा है कि किस प्रकार जमीन के छोटे से विवाद ने एक बड़े आपराधिक मामले का रूप ले लिया था। अदालत का यह कड़ा रुख समाज में एक संदेश देने का काम करेगा कि कानून अपने हाथ में लेना महंगा पड़ सकता है।
फिलहाल, चारों दोषियों को सजा सुनाए जाने के बाद पुलिस अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है। इस फैसले से पीड़ित पक्ष ने संतोष व्यक्त किया है। आजमगढ़ के इस मामले ने एक बार फिर अदालती कार्यवाही की गंभीरता को रेखांकित किया है, जहां साक्ष्यों के आधार पर ही न्याय की जीत सुनिश्चित हुई है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!