अयोध्या: पुलिस चौकी प्रभारी पर 60 हजार रुपये ऐंठने का आरोप, युवक ने एसएसपी से की शिकायत
अयोध्या के इनायतनगर थाना क्षेत्र के उरुवा वैश्य गांव निवासी अनुराग सिंह ने एसएसपी को शिकायत देकर हरिंग्टनगंज पुलिस चौकी प्रभारी समेत अन्य पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका आरोप है कि पुलिस ने उन्हें फर्जी मुकदमे में फंसाने की धमकी देकर 60 हजार रुपए ले लिए और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

फर्जी मुकदमे का डर दिखाकर वसूली का आरोप
अयोध्या जिले के इनायतनगर थाना क्षेत्र में पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। उरुवा वैश्य गांव के निवासी अनुराग सिंह ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) को एक लिखित शिकायत दी है, जिसमें उन्होंने हरिंग्टनगंज पुलिस चौकी प्रभारी और अन्य पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़ित का दावा है कि पुलिस ने उन्हें एक फर्जी आपराधिक मामले में फंसाने की धमकी दी और इसके बदले में 60 हजार रुपये की अवैध वसूली की।
अनुराग सिंह के अनुसार, यह पूरी घटना 10 जुलाई 2026 की है। गांव के सुनील कुमार शर्मा के साथ हुए विवाद और मारपीट के मामले में पुलिस ने बिना किसी ठोस आधार के उन्हें और उनके भाई अवनीश सिंह को निशाना बनाया। पीड़ित का कहना है कि घटना के समय वे मौके पर मौजूद भी नहीं थे, फिर भी पुलिस ने मिलीभगत कर उनके खिलाफ एनसीआर दर्ज कर दी।
चौकी में ले जाकर दी गई गंभीर धाराओं में फंसाने की धमकी
शिकायत में विस्तार से बताया गया है कि 10 जुलाई की रात करीब 10 बजे हरिंग्टनगंज चौकी प्रभारी राणा दिग्विजय सिंह अपनी टीम के साथ अनुराग के घर पहुंचे। दोनों भाइयों को जबरन चौकी ले जाया गया, जहां उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया। अनुराग का आरोप है कि पुलिस ने उन्हें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 307 जैसे गंभीर अपराधों में जेल भेजने की धमकी देकर डराया-धमकाया।
पीड़ित ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने मामले को रफा-दफा करने के लिए एक लाख रुपये की मांग की थी। आर्थिक तंगी के बावजूद, परिवार ने रिश्तेदारों और परिचितों से उधार लेकर 60 हजार रुपये का इंतजाम किया और पुलिस को सौंप दिए। हालांकि, पैसे देने के बाद भी पुलिस ने 11 जुलाई को दोनों भाइयों का चालान कर दिया, जिससे परिवार में भारी आक्रोश है।
पुलिस का पक्ष: आरोपों को बताया निराधार
इस मामले में इनायतनगर के प्रभारी निरीक्षक राजेश सिंह ने अपना पक्ष रखते हुए सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा कि अनुराग सिंह द्वारा लगाए गए आरोप पूरी तरह से निराधार और बेबुनियाद हैं। उनके अनुसार, यह मामला दो पक्षों के बीच चल रहे पुराने जमीनी विवाद का परिणाम है और पुलिस ने कानून के दायरे में रहकर ही कार्रवाई की है।
पुलिस प्रशासन की ओर से अभी तक इस मामले में कोई विस्तृत आधिकारिक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है। हालांकि, पीड़ित परिवार ने एसएसपी से इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने मांग की है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाए।
मानसिक प्रताड़ना और भविष्य की राह
अनुराग सिंह का कहना है कि इस घटना के बाद से उनका पूरा परिवार गहरे मानसिक तनाव और भय के साये में जी रहा है। फर्जी मुकदमे के कारण उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुंचा है। पीड़ित ने एसएसपी से गुहार लगाई है कि उन्हें इस फर्जी मुकदमे से राहत दिलाई जाए और भविष्य में पुलिस की ऐसी मनमानी पर रोक लगाई जाए।
फिलहाल, यह मामला अयोध्या पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। एक तरफ पीड़ित परिवार न्याय की उम्मीद में उच्च अधिकारियों के चक्कर लगा रहा है, तो दूसरी तरफ स्थानीय पुलिस इसे जमीनी रंजिश का मामला बताकर पल्ला झाड़ रही है। अब देखना यह होगा कि एसएसपी कार्यालय से इस शिकायत पर क्या कदम उठाए जाते हैं और क्या इस मामले की कोई स्वतंत्र जांच बैठाई जाती है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
