आगरा: मनी लॉन्ड्रिंग मामले में चार्टर्ड अकाउंटेंट के खिलाफ एफआईआर, करोड़ों रुपये विदेश भेजने का आरोप
आयकर विभाग की अन्वेषण विंग के उपाय कर निदेशक डॉ. मनोज कुमार ने ताजगंज निवासी चार्टर्ड अकाउंटेंट रेहान खान के खिलाफ फर्जी सर्टिफिकेट जारी करने, शेल कंपनियों के जरिए करोड़ों रुपए देश से बाहर भिजवाने में मदद करने जैसे कई गंभीर आरोप लगाते हुए ताजगंज थाने में प्राथमिक की दर्ज कराई है। आयकर विभाग की ओर से यह कार्रवाई पांच दिन तक रेहान के अलावा देश भर के

मोहम्मद नवेद
एडिटर

शेल कंपनियों के जरिए अवैध लेनदेन का खुलासा
आगरा में आयकर विभाग की एक बड़ी कार्रवाई सामने आई है, जिसमें ताजगंज निवासी चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) रेहान खान के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग और फर्जीवाड़े के गंभीर आरोप में एफआईआर दर्ज की गई है। यह कार्रवाई विभाग द्वारा 18 अगस्त से शुरू की गई पांच दिनों की गहन जांच और तलाशी अभियान के बाद की गई है। विभाग का आरोप है कि सीए ने शेल कंपनियों का जाल बिछाकर देश से करोड़ों रुपये अवैध रूप से विदेश भेजे हैं।
आयकर विभाग की अन्वेषण विंग के उपाय कर निदेशक डॉ. मनोज कुमार ने इस मामले में शिकायत दर्ज कराई है। ताजगंज थाने में दर्ज कराई गई इस प्राथमिकी में सीए पर फर्जी प्रमाण पत्र जारी करने और मनी लॉन्ड्रिंग के जरिए देश की आर्थिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया गया है। जांच के दौरान विभाग को ऐसे पुख्ता सबूत मिले हैं जो इस बड़े वित्तीय घोटाले की ओर इशारा करते हैं।
देशव्यापी जांच और संदिग्ध भूमिका
आयकर विभाग की यह जांच केवल आगरा तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह देश के कई शहरों में एक साथ चलाई गई। इस दौरान 36 चार्टर्ड अकाउंटेंट और 346 कंपनियों व फर्मों के ठिकानों पर छापेमारी की गई। विभाग के अनुसार, रेहान खान ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी और धोखाधड़ी को अंजाम दिया। पूछताछ के दौरान सीए ने स्वीकार किया है कि इस पूरे नेटवर्क में अभिषेक गुप्ता और निखिल हरवानी नाम के अन्य व्यक्ति भी शामिल थे।
जांच में यह भी पाया गया कि विदेश में धन भेजने के लिए फॉर्म 15CB का इस्तेमाल किया गया, जिसे बिना किसी उचित सत्यापन के जारी किया गया था। आयकर नियम, 1962 के तहत यह फॉर्म अनिवार्य होता है, लेकिन सीए ने नियमों को ताक पर रखकर इसे फर्जी तरीके से प्रमाणित किया। इन दस्तावेजों के जरिए धन को फ्रेट चार्ज, टेलीकम्युनिकेशन, डिजिटल मार्केटिंग और अन्य सेवाओं के भुगतान के रूप में दिखाया गया, ताकि इसे वैध लेनदेन का रूप दिया जा सके।
आर्थिक अपराध और आगे की कार्रवाई
आयकर विभाग का मानना है कि इस पूरे खेल का मुख्य उद्देश्य काला धन विदेश भेजना था। विभाग ने अपनी जांच में पाया कि जिन सेवाओं के नाम पर भुगतान दिखाया गया, वे वास्तव में कभी प्रदान ही नहीं की गई थीं। यह पूरी प्रक्रिया एक सोची-समझी साजिश के तहत की गई, जिसमें महत्वपूर्ण दस्तावेजों में हेरफेर की गई। विभाग अब इस मामले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी गहन जांच कर रहा है।
फिलहाल, ताजगंज पुलिस ने आयकर विभाग की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस मामले ने चार्टर्ड अकाउंटेंसी पेशे की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि आने वाले समय में इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों पर भी कड़ी कार्रवाई की जा सकती है, क्योंकि जांच का दायरा अभी और बढ़ सकता है।
इस मामले में पकड़े गए आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, साजिश रचने और मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक कानूनों के तहत सख्त धाराओं में कार्रवाई की जा रही है। आयकर विभाग के अनुसार, यह एक संगठित अपराध का मामला है जिसमें शेल कंपनियों के जरिए देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाया गया। पुलिस अब उन सभी खातों और कंपनियों की सूची तैयार कर रही है, जिनका इस्तेमाल इस अवैध लेनदेन के लिए किया गया था।
आगरा के इस मामले ने वित्तीय जगत में हड़कंप मचा दिया है। स्थानीय प्रशासन और जांच एजेंसियां अब इस बात का पता लगाने में जुटी हैं कि पिछले कितने वर्षों से यह अवैध कारोबार चल रहा था और इसमें कुल कितनी राशि का लेनदेन हुआ है। विभाग द्वारा जब्त किए गए दस्तावेजों और डिजिटल डेटा का फॉरेंसिक विश्लेषण किया जा रहा है, जिससे भविष्य में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना है।

एडिटर
मोहम्मद नवेद
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!