KGMU ट्रॉमा सेंटर में डॉक्टरों की कमी, 9 जूनियर रेजिडेंट ने छोड़ी नौकरी
KGMU ट्रॉमा सेंटर में डॉक्टरों की कमी, लखनऊ के KGMU ट्रॉमा सेंटर में बांड के तहत नियुक्त नॉन-पीजी जूनियर रेजिडेंट (JR) डॉक्टरों के अचानक नौकरी छोड़ने से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो गई हैं। जानकारी के अनुसार चयनित 11 डॉक्टरों में से 9 ने सेवा देने से इनकार कर दिया, जबकि दो फिलहाल अवकाश पर हैं।
बताया जा रहा है कि कुछ डॉक्टरों का चयन पीजी कोर्स में हो गया, वहीं कई ने काम के अत्यधिक दबाव के चलते नौकरी जारी रखने से मना कर दिया। प्रशासन ने इस पूरे मामले की रिपोर्ट DGME को भेज दी है और बांड के नियमों के तहत इन डॉक्टरों से निर्धारित राशि वसूलने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
मरीजों पर असर
400 बेड वाले ट्रॉमा सेंटर में रोजाना 200 से 250 मरीज कैजुअल्टी में पहुंचते हैं, जिनमें से 80-90 मरीजों को भर्ती किया जाता है। ऐसे में डॉक्टरों की कमी से मरीजों के इलाज में देरी और दिक्कतें बढ़ने लगी हैं।
नई भर्ती की तैयारी
स्थिति को संभालने के लिए KGMU प्रशासन ने नए सिरे से डॉक्टरों की भर्ती प्रक्रिया शुरू करने का फैसला लिया है। ट्रॉमा प्रभारी डॉ. प्रेमराज के अनुसार, कई डॉक्टरों ने कार्यभार अधिक होने के कारण सेवा जारी नहीं रखी, जबकि कुछ उच्च अध्ययन के लिए चयनित हो गए हैं।
सीनियर डॉक्टर भी छोड़ रहे संस्थान
सिर्फ जूनियर ही नहीं, बल्कि पिछले एक साल में KGMU से 10 से ज्यादा सीनियर डॉक्टर भी इस्तीफा दे चुके हैं। डॉक्टरों के अनुसार, शासनादेश के बावजूद उन्हें अपेक्षित वित्तीय लाभ—जैसे ग्रेच्युटी और लीव एनकैशमेंट—नहीं मिल पा रहे हैं, जिससे असंतोष बढ़ रहा है।
शिक्षक संघ ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए कहा है कि सुविधाओं की कमी और कार्यभार के कारण डॉक्टर धीरे-धीरे संस्थान छोड़ रहे हैं।
