ब्रेकिंग
ग्वालियर: मुरार जिला अस्पताल में 6 दिन से बंद है ऑपरेशन थिएटर का एसी, मरीजों की बढ़ी मुश्किलेंजयपुर में सवर्ण समाज का शक्ति प्रदर्शन: यूजीसी रोल बैंक समेत विभिन्न मांगों को लेकर कलक्ट्रेट तक रैलीनूंह जलाभिषेक यात्रा से पहले बिट्टू बजरंगी हाउस अरेस्ट, फरीदाबाद स्थित आवास पर भारी पुलिस बल तैनातवाराणसी: एयरपोर्ट पर नौकरी का झांसा देकर ठगों ने खुलवाए बैंक खाते, 4.55 लाख का हुआ संदिग्ध ट्रांजेक्शनपूर्वांचल विश्वविद्यालय में प्रवेश का अंतिम दौर: बीए एलएलबी की सीटें फुल, एलएलएम में अभी भी मौकाराजस्थान SI भर्ती 2021: री-एग्जाम में अब केवल 2.25 लाख अभ्यर्थी ही होंगे शामिलबालोतरा में साइबर ठगों का बड़ा नेटवर्क बेनकाब: कमीशन के लालच में बैंक खाते और सिम बेचने वाले दो गिरफ्तारइंदौर के कैंसर अस्पताल में राहत: अब आधी कीमत पर होगी PET स्कैन जांच, लीनियर एक्सीलेटर के लिए करना होगा इंतजार
ग्वालियर: मुरार जिला अस्पताल में 6 दिन से बंद है ऑपरेशन थिएटर का एसी, मरीजों की बढ़ी मुश्किलेंजयपुर में सवर्ण समाज का शक्ति प्रदर्शन: यूजीसी रोल बैंक समेत विभिन्न मांगों को लेकर कलक्ट्रेट तक रैलीनूंह जलाभिषेक यात्रा से पहले बिट्टू बजरंगी हाउस अरेस्ट, फरीदाबाद स्थित आवास पर भारी पुलिस बल तैनातवाराणसी: एयरपोर्ट पर नौकरी का झांसा देकर ठगों ने खुलवाए बैंक खाते, 4.55 लाख का हुआ संदिग्ध ट्रांजेक्शनपूर्वांचल विश्वविद्यालय में प्रवेश का अंतिम दौर: बीए एलएलबी की सीटें फुल, एलएलएम में अभी भी मौकाराजस्थान SI भर्ती 2021: री-एग्जाम में अब केवल 2.25 लाख अभ्यर्थी ही होंगे शामिलबालोतरा में साइबर ठगों का बड़ा नेटवर्क बेनकाब: कमीशन के लालच में बैंक खाते और सिम बेचने वाले दो गिरफ्तारइंदौर के कैंसर अस्पताल में राहत: अब आधी कीमत पर होगी PET स्कैन जांच, लीनियर एक्सीलेटर के लिए करना होगा इंतजार

उदयपुर में परमाणु खनिजों की तलाश तेज: 10 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पांच साल के लिए रिजर्व

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

6 जुलाई 20262 मिनट पढ़ें 836
उदयपुर में परमाणु खनिजों की तलाश तेज: 10 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पांच साल के लिए रिजर्व
click here

राजस्थान के उदयपुर जिले में परमाणु खनिजों की मौजूदगी की संभावनाओं को देखते हुए राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। खान एवं पेट्रोलियम विभाग ने उदयपुर की भींडर तहसील के अंतर्गत आने वाले 10 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को अगले पांच वर्षों के लिए परमाणु खनिज अन्वेषण के लिए आरक्षित घोषित कर दिया है। यह क्षेत्र लगभग 6250 बीघा से अधिक भूमि में फैला हुआ है।

निवानिया-कीकावास क्षेत्र पर विशेष फोकस

आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, यह रिजर्व क्षेत्र निवानिया और कीकावास गांवों के आसपास स्थित है। परमाणु खनिज अन्वेषण एवं अनुसंधान निदेशालय (AMD) इस पूरे इलाके में रेडियोधर्मी पदार्थों की खोज करेगा। भू-वैज्ञानिकों का मानना है कि इस बेल्ट में मौजूद कार्बोनेटाइट चट्टानों में यूरेनियम, थोरियम और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों के भंडार होने की प्रबल संभावना है।

राज्यपाल की ओर से जारी आदेशों में स्पष्ट किया गया है कि इस 10 वर्ग किलोमीटर के दायरे में अब किसी भी अन्य प्रकार के खनन पट्टे या क्वारी लाइसेंस के आवेदनों पर विचार नहीं किया जाएगा। परमाणु खनिज रियायती नियम, 2016 के तहत इस क्षेत्र को पूरी तरह से सुरक्षित कर दिया गया है ताकि अन्वेषण कार्य में कोई बाधा न आए।

खनन गतिविधियों पर कड़े प्रतिबंध

सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस आरक्षित ब्लॉक में लंबित पड़े सभी नए खनन आवेदनों को निरस्त माना जाएगा। हालांकि, जो खनन पट्टे या लाइसेंस पहले से ही स्वीकृत हैं और वर्तमान में संचालित हैं, उन पर इस आदेश का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। आम जनता और संबंधित हितधारक इस परियोजना का विस्तृत नक्शा उदयपुर स्थित अधीक्षण भू-वैज्ञानिक कार्यालय और खान एवं भूविज्ञान निदेशालय में देख सकते हैं।

परमाणु खनिज अन्वेषण एवं अनुसंधान निदेशालय (AMD) के लिए यह एक महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है। विशेषज्ञों का कहना है कि अन्वेषण की अवधि पांच साल तय की गई है, लेकिन यदि निदेशालय का कार्य समय से पहले पूरा हो जाता है, तो इसे पहले भी समाप्त किया जा सकता है। राज्य में इससे पहले भी कई स्थानों पर इस तरह के अन्वेषण कार्य किए गए हैं।

परमाणु ऊर्जा के लिए महत्वपूर्ण खोज

देश में परमाणु ऊर्जा और बिजली उत्पादन की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए रेडियोधर्मी खनिजों की खोज एक रणनीतिक प्राथमिकता है। उदयपुर का यह क्षेत्र भू-गर्भीय दृष्टि से काफी संवेदनशील माना जाता है। पूर्व में मिले संकेतों के आधार पर ही सरकार ने इस क्षेत्र को रिजर्व करने का निर्णय लिया है ताकि वैज्ञानिक तरीके से इन खनिजों की उपलब्धता का आकलन किया जा सके।

इस खोज प्रक्रिया के दौरान अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। यदि अन्वेषण के दौरान यूरेनियम और थोरियम के व्यावसायिक भंडार मिलते हैं, तो यह न केवल राजस्थान बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक बड़ी उपलब्धि साबित हो सकती है। फिलहाल, स्थानीय प्रशासन और खान विभाग इस पूरे प्रोजेक्ट की निगरानी कर रहे हैं।

SponsoredVertex Media Studios advertisement

टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

संबंधित खबरें