सावन का पहला सोमवार: सुल्तानगंज से देवघर तक केसरिया रंग में रंगा कांवरिया पथ, लाखों शिवभक्तों ने किया जलाभिषेक
सावन का आज पहला सोमवार है। भागलपुर के सुल्तानगंज से लेकर झारखंड के देवघर तक करीब 105 किलोमीटर तक सड़क केसरिया रंग के कपड़े पहने भक्तों से रंग गया है।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

सावन के पवित्र महीने के पहले सोमवार के अवसर पर बिहार और झारखंड की सीमाएं आस्था के सैलाब से सराबोर हैं। भागलपुर के सुल्तानगंज से लेकर झारखंड के देवघर तक का 105 किलोमीटर लंबा मार्ग पूरी तरह से केसरिया रंग में रंग गया है। 'बोल बम' और 'हर-हर महादेव' के जयघोष से पूरा कांवरिया पथ गुंजायमान है, जहां लाखों की संख्या में शिवभक्त बाबा बैद्यनाथ को जल अर्पित करने के लिए पैदल यात्रा कर रहे हैं।
चार लाख से अधिक भक्तों ने भरी हुंकार
श्रावणी मेले के आधिकारिक उद्घाटन के बाद से ही सुल्तानगंज के नमामि गंगे और अजगैबीनाथ घाट पर श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। आंकड़ों के अनुसार, अब तक चार लाख से अधिक भक्त सुल्तानगंज से गंगा जल लेकर देवघर के लिए प्रस्थान कर चुके हैं। पहले सोमवार के मौके पर सुबह पांच बजे से ही मंदिरों में जलाभिषेक के लिए लंबी कतारें देखी गईं। इस यात्रा में हर आयु वर्ग के लोग शामिल हैं, जिनमें महिलाओं और युवाओं की भागीदारी विशेष रूप से उल्लेखनीय है।
प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अभूतपूर्व इंतजाम किए हैं। 105 किलोमीटर के दुर्गम कच्चे रास्ते पर कांवरियों के पैरों को छालों से बचाने के लिए बारीक बालू बिछाई गई है। भीषण उमस और गर्मी से राहत देने के लिए पूरे मार्ग पर वाटर स्प्रिंकलर और पानी के टैंकरों की व्यवस्था की गई है। रात के समय सुरक्षा और सुविधा के लिए पूरे पथ पर हाई-मास्ट लाइटें और एलईडी स्ट्रिप्स लगाई गई हैं, ताकि शिवभक्तों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।
सुरक्षा के लिए ड्रोन और एआई तकनीक का उपयोग
सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद रखने के लिए भागलपुर, बांका और देवघर पुलिस ने संयुक्त रूप से विशेष रणनीति अपनाई है। सुल्तानगंज से लेकर बाबा धाम तक 500 से अधिक सीसीटीवी और एआई कैमरों के जरिए 24 घंटे निगरानी रखी जा रही है। भीड़ के घनत्व को मापने के लिए ड्रोन कैमरों का उपयोग किया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, बिहार और झारखंड पुलिस के साथ-साथ आरएएफ और एटीएस की टीमें भी तैनात हैं। हर दो-तीन किलोमीटर पर मेडिकल रिलीफ सेंटर और बाइक एम्बुलेंस की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
सुल्तानगंज में श्रद्धालुओं के विश्राम के लिए जर्मन हैंगर टेंट सिटी बनाई गई है, जहां मोबाइल चार्जिंग, पंखे, शुद्ध पेयजल और बायोटॉयलेट जैसी बुनियादी सुविधाएं मुफ्त उपलब्ध हैं। प्रशासन ने निजी होटलों और धर्मशालाओं के लिए किराए की दरें निर्धारित कर दी हैं, ताकि कांवरियों से मनमाना किराया न वसूला जा सके। मजिस्ट्रेटों की तैनाती की गई है ताकि नियमों का उल्लंघन करने वालों पर त्वरित कार्रवाई की जा सके।
अन्य मंदिरों में भी उमड़ी आस्था
सावन की पहली सोमवारी पर केवल देवघर ही नहीं, बल्कि बिहार के अन्य प्रमुख शिव मंदिरों में भी भारी भीड़ देखी गई। उत्तर बिहार के 'देवघर' कहे जाने वाले बाबा गरीबनाथ मंदिर में जलाभिषेक के लिए हजारों भक्त पहुंचे हैं। भीड़ को नियंत्रित करने और भगदड़ जैसी स्थिति से बचने के लिए प्रशासन ने मंदिर परिसर के बाहर अरघा के माध्यम से जलार्पण की व्यवस्था की है। सुरक्षा के मद्देनजर मंदिर जाने वाले मार्गों को 'नो-व्हीकल जोन' घोषित कर दिया गया है।
गंगा तट पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। जल भरते समय किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए घाटों पर लोहे की मजबूत बैरिकेडिंग की गई है। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें मोटरबोट और गोताखोरों के साथ हर समय मुस्तैद हैं। प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे निर्धारित मार्गों और नियमों का पालन करें ताकि यात्रा सुगम और सुरक्षित बनी रहे।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
