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सादुलपुर: आरओबी निर्माण में नौ महीने की देरी, डिजाइन बदलने से लागत में 24 करोड़ का इजाफा

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

15 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें 715
सादुलपुर: आरओबी निर्माण में नौ महीने की देरी, डिजाइन बदलने से लागत में 24 करोड़ का इजाफा
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नौ महीने से ठप है निर्माण कार्य

सादुलपुर के सांखू रोड रेल फाटक पर निर्माणाधीन ओवरब्रिज का काम पिछले नौ महीनों से पूरी तरह बंद पड़ा है। इस देरी के कारण स्थानीय निवासियों और वाहन चालकों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। रेलवे द्वारा भविष्य की आवश्यकताओं और डबल ट्रैक की योजना को ध्यान में रखते हुए ओवरब्रिज की मूल डिजाइन में बड़ा बदलाव किया गया है, जिसके चलते निर्माण कार्य अधर में लटका हुआ है।

परियोजना में हुए इस बदलाव का सीधा असर इसकी लागत पर पड़ा है। पहले इस ओवरब्रिज के लिए 29.80 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया था, लेकिन अब डिजाइन में फेरबदल के बाद इसकी लागत में 24 करोड़ रुपये की भारी बढ़ोतरी हो गई है। अब यह परियोजना 53.80 करोड़ रुपये की लागत से पूरी होगी। अधिकारियों के अनुसार, जल्द ही इस संशोधित कार्य के लिए नए सिरे से टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

धनुषाकार डिजाइन और तकनीकी बदलाव

नई योजना के तहत, रेलवे ट्रैक के ऊपर बनने वाले स्पैन की लंबाई को 75 मीटर से बढ़ाकर 150 मीटर कर दिया गया है। यह हिस्सा धनुषाकार (आर्क) डिजाइन में तैयार किया जाएगा, जिसमें बीच में कोई पिलर नहीं होगा। इस तकनीकी बदलाव का मुख्य उद्देश्य भविष्य में रेल यातायात की सुगमता को सुनिश्चित करना है। अब इस विशेष हिस्से का निर्माण कार्य रेलवे स्वयं अपनी देखरेख में पूरा करवाएगा।

सांसद राहुल कस्वां ने इस संबंध में रेलवे के उच्च अधिकारियों से चर्चा की है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि 150 मीटर धनुषाकार ब्रिज की अनुमति मिलते ही निर्माण कार्य को फिर से गति दी जाएगी। पुराने ठेकेदार द्वारा सौंपा गया कार्य लगभग पूरा हो चुका है, और अब आगामी चरणों के लिए नई निविदाएं आमंत्रित की जाएंगी। मुख्य ब्रिज का ढांचा तैयार होने के बाद ही सर्विस रोड का निर्माण कार्य हाथ में लिया जाएगा।

आमजन की मुश्किलें और यातायात का संकट

ओवरब्रिज निर्माण के लिए सांखू सर्किल से मिनी सचिवालय, पंचायत समिति, बिजली बोर्ड और एफसीआई गोदाम की ओर जाने वाला मुख्य मार्ग लंबे समय से बंद है। एक साल पहले ही पंचायत समिति से शहीद स्मारक तक की सड़क को तोड़ दिया गया था, जिसके बाद से वहां मलबे और पत्थरों का अंबार लगा हुआ है। पैदल चलने वालों के लिए भी वहां से गुजरना जोखिम भरा हो गया है।

सड़क बंद होने के कारण भारी वाहनों को करीब डेढ़ किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाकर अपने गंतव्य तक पहुंचना पड़ रहा है। वहीं, दुपहिया वाहन चालक जान जोखिम में डालकर शॉर्टकट रास्तों का उपयोग करने को मजबूर हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि काम बंद होने से न केवल समय की बर्बादी हो रही है, बल्कि व्यापारिक गतिविधियों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

भविष्य की राह और उम्मीदें

प्रशासन और रेलवे विभाग अब इस परियोजना को जल्द से जल्द पूरा करने के दावे कर रहे हैं। 860 मीटर लंबे इस ओवरब्रिज के तैयार होने के बाद सादुलपुर के लोगों को रेल फाटक पर लगने वाले जाम से स्थाई राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि, निर्माण कार्य कब तक धरातल पर फिर से शुरू होगा, यह नए टेंडर जारी होने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा।

फिलहाल, निवासियों को निर्माण कार्य फिर से शुरू होने और सर्विस रोड बनने तक इन कठिनाइयों के बीच ही आवाजाही करनी होगी। रेलवे की ओर से धनुषाकार ब्रिज की अनुमति मिलने के बाद ही स्थिति में सुधार की संभावना है, जिससे सादुलपुर के यातायात तंत्र को सुचारू बनाया जा सके।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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