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राजस्थान: वित्तीय संकट की मार, 13 लाख कर्मचारियों और पेंशनर्स के भुगतान अटके

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

7 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें 1.4K
राजस्थान: वित्तीय संकट की मार, 13 लाख कर्मचारियों और पेंशनर्स के भुगतान अटके
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वित्तीय कुप्रबंधन से जूझ रहे लाखों कर्मचारी

राजस्थान में वित्तीय कुप्रबंधन का असर अब राज्य के 13 लाख से अधिक अधिकारी-कर्मचारियों और पेंशनभोगियों पर साफ दिखाई दे रहा है। नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत से ही सरकारी तंत्र में भुगतान को लेकर भारी अव्यवस्था बनी हुई है। आलम यह है कि सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों को उनके हक की पेंशन राशि और ग्रेच्युटी के लिए महीनों का इंतजार करना पड़ रहा है।

राज्य में हर महीने औसतन 1500 से 2000 कर्मचारी सेवानिवृत्त होते हैं। सरकारी नियमों के अनुसार, सेवानिवृत्ति के दिन ही कर्मचारी के खाते में सभी परिलाभ जमा हो जाने चाहिए, लेकिन वर्तमान स्थिति में यह प्रक्रिया 3 से 6 महीने तक खिंच रही है। इसमें कम्यूटेशन, ग्रेच्युटी, जीपीएफ और स्टेट इंश्योरेंस जैसी महत्वपूर्ण राशियां शामिल हैं, जो कर्मचारी की अपनी बचत का हिस्सा होती हैं।

सरेंडर लीव और लोन के लिए भी संघर्ष

राज्य के करीब ढाई लाख कर्मचारियों को सरेंडर लीव (अवकाश के बदले मिलने वाली राशि) का भुगतान भी नहीं मिल पा रहा है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि 1 अप्रैल से ही उपार्जित अवकाश के नकदीकरण के बिल लंबित पड़े हैं। इसके अलावा, जीपीएफ से लोन लेने की प्रक्रिया भी बेहद जटिल बना दी गई है। कई कर्मचारियों ने शिकायत की है कि बच्चों की शादी जैसे कार्यों के लिए लोन आवेदन करने पर भी उन्हें अनावश्यक देरी का सामना करना पड़ रहा है।

एक कर्मचारी ने बताया कि उन्हें लोन की राशि तब मिली जब उनके बेटे का विवाह समारोह पहले ही संपन्न हो चुका था। लोन की मंजूरी के लिए शादी के कार्ड तक की मांग की जा रही है, जिससे कर्मचारियों में भारी नाराजगी है। व्यावसायिक शिक्षकों का मानदेय भी समय पर नहीं मिल रहा है, क्योंकि सरकार ने संबंधित ठेका फर्मों को भुगतान नहीं किया है।

कर्मचारी महासंघ की चेतावनी और सरकार का पक्ष

राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ के वरिष्ठ उपाध्यक्ष देवेंद्र सिंह नरूका ने इस स्थिति को अत्यंत गंभीर बताया है। उन्होंने कहा कि कर्मचारी अपनी ही जमा पूंजी के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। जीपीएफ और बीमा जैसी राशियां पूरी तरह से कर्मचारी की अपनी होती हैं, फिर भी सरकार उनका भुगतान करने में देरी कर रही है, जो कि वित्तीय अनुशासनहीनता का प्रतीक है।

दूसरी ओर, वित्त विभाग के डायरेक्टर बजट बृजेश किशोर शर्मा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने कहा कि भुगतान के पैटर्न में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है और भुगतान सामान्य प्रक्रिया के तहत ही हो रहे हैं। सरेंडर लीव के मामले पर उन्होंने कहा कि यह विषय अभी विचाराधीन है और इस पर जल्द ही कोई निर्णय लिया जाएगा।

विकास कार्यों पर भी असर

सिर्फ कर्मचारी ही नहीं, बल्कि पीडब्ल्यूडी, पीएचईडी और बिजली कंपनियों में काम करने वाली ठेका फर्मों को भी भुगतान में देरी का सामना करना पड़ रहा है। इससे राज्य में चल रहे विकास कार्यों की गति भी प्रभावित हो रही है। यदि समय रहते वित्तीय स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो आने वाले समय में सरकारी कामकाज और कर्मचारियों के मनोबल पर इसका गहरा नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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