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मुंगेर में गंगा का जलस्तर बढ़ने से बढ़ी चिंता, घाटों पर कटाव तेज, प्रशासन अलर्ट

Munger Ganga river water level rising rapidly causing erosion at ghats. मुंगेर में गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। रविवार से इसमें प्रति घंटे लगभग 2 सेंटीमीटर की वृद्धि दर्ज की जा रही है।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

14 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें 296
मुंगेर में गंगा का जलस्तर बढ़ने से बढ़ी चिंता, घाटों पर कटाव तेज, प्रशासन अलर्ट
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मुंगेर में गंगा के जलस्तर में तेजी से वृद्धि

मुंगेर में गंगा नदी का जलस्तर लगातार ऊपर चढ़ रहा है, जिससे तटीय इलाकों में हड़कंप मच गया है। पिछले कुछ दिनों के भीतर नदी के जलस्तर में लगभग दो मीटर की वृद्धि दर्ज की गई है। रविवार से स्थिति और गंभीर हो गई है, जहां जलस्तर में प्रति घंटे लगभग दो सेंटीमीटर की बढ़ोतरी देखी जा रही है। इससे पहले शनिवार को यह वृद्धि दर आधा सेंटीमीटर प्रति घंटे थी, जो अब चार गुना बढ़ गई है।

बढ़ते जलस्तर का सीधा असर नगर निगम क्षेत्र के सभी 12 गंगा घाटों पर दिखाई दे रहा है। नदी का पानी घाटों की सीढ़ियों तक पहुंच चुका है, जिससे स्थानीय लोगों की आवाजाही प्रभावित हो रही है। वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों के निचले इलाकों में भी पानी का फैलाव शुरू हो गया है, जिससे बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है।

कटाव रोकने के लिए प्रशासन की तैयारी और ग्रामीणों का असंतोष

जिलाधिकारी निखिल धनराज निपाणिकर ने 8 जुलाई को मोहली पंचायत के टीकारामपुर गांव का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया था। उन्होंने बाढ़ नियंत्रण विभाग को कटाव रोकने के लिए तत्काल कदम उठाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद, चंडिका स्थान टीकारामपुर, पड़हम और घोरघट जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में बालू से भरे सीमेंट के बोरों का स्टॉक तैयार किया जा रहा है ताकि आपात स्थिति में इनका उपयोग किया जा सके।

हालांकि, टीकारामपुर घाट पर किए जा रहे कटावरोधी कार्यों की गुणवत्ता पर ग्रामीणों ने गंभीर सवाल उठाए हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि साधारण सीमेंट के बोरों और प्लास्टिक का उपयोग किया जा रहा है, जो कटाव को रोकने में सक्षम नहीं होंगे। ग्रामीणों ने प्रशासन से इन कार्यों की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

खेती की जमीन का कटाव और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल

गांव के पश्चिमी हिस्से में स्थिति बेहद चिंताजनक बनी हुई है। यहां करीब आधे किलोमीटर से अधिक कृषि भूमि गंगा में समा चुकी है। खेतों में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ने से किसानों में दहशत है। कई किसान अपनी फसल और पशुओं के चारे को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने के लिए मजबूर हैं। कटाव का यह सिलसिला लगातार जारी है, जिससे जमीन के और अधिक नदी में विलीन होने की आशंका बनी हुई है।

दूसरी ओर, घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी प्रशासन की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं। जलस्तर बढ़ने के बावजूद अभी तक किसी भी घाट पर गोताखोरों या आपदा मित्रों की तैनाती नहीं की गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जलस्तर बढ़ने से दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होने चाहिए।

अधिकारियों का पक्ष और आगे की स्थिति

बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल, मुंगेर-भागलपुर के कार्यपालक अभियंता आदित्य प्रकाश ने स्पष्ट किया है कि विभाग स्थिति पर पूरी तरह नजर बनाए हुए है। उन्होंने बताया कि विभिन्न स्थानों पर बालू से भरे बैग तैयार किए जा रहे हैं ताकि जरूरत पड़ने पर 'फ्लड फाइटिंग' की जा सके। प्रशासन का दावा है कि कटाव और बाढ़ से निपटने के लिए सभी आवश्यक संसाधन जुटाए जा रहे हैं और स्थिति नियंत्रण में है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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