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केरल का रहस्यमयी जुड़वाँ गाँव: कोडिन्ही, जहाँ हर गली में दिखते हैं हमशक्ल बच्चे

केरल के मल्लपुरम जिले का कोडिन्ही गाँव "ट्विन टाउन" के नाम से प्रसिद्ध है। यहाँ सामान्य से कई गुना अधिक जुड़वाँ बच्चों का जन्म होता है, जिसके कारण यह गाँव दुनियाभर के वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

मुश्ताक अहमद खान

मुश्ताक अहमद खान

Editor in chief

25 जून 2026 अपडेट 25 जून 20263 मिनट पढ़ें 475
केरल का रहस्यमयी जुड़वाँ गाँव: कोडिन्ही, जहाँ हर गली में दिखते हैं हमशक्ल बच्चे

मल्लपुरम (केरल)। भारत में अनेक ऐसे स्थान हैं जो अपनी अनोखी विशेषताओं के कारण दुनियाभर का ध्यान आकर्षित करते हैं। केरल के मल्लपुरम जिले में स्थित कोडिन्ही (Kodinhi) ऐसा ही एक छोटा सा गाँव है, जिसे आज पूरी दुनिया "ट्विन टाउन" (Twin Town) या "जुड़वाँ बच्चों का गाँव" के नाम से जानती है। इस गाँव की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहाँ सामान्य से कई गुना अधिक संख्या में जुड़वाँ बच्चों का जन्म होता है। वैज्ञानिकों से लेकर डॉक्टरों और शोधकर्ताओं तक, सभी इस रहस्य को समझने की कोशिश कर चुके हैं, लेकिन आज तक इसका कोई स्पष्ट वैज्ञानिक कारण सामने नहीं आ पाया है।

कहाँ स्थित है कोडिन्ही?

कोडिन्ही गाँव केरल के मल्लपुरम जिले में तिरुरंगडी क्षेत्र के पास स्थित है। लगभग 2,000 परिवारों वाले इस गाँव की पहचान अब केवल एक सामान्य ग्रामीण क्षेत्र के रूप में नहीं, बल्कि दुनिया के सबसे अधिक जुड़वाँ जन्म दर वाले स्थानों में से एक के रूप में हो चुकी है। गाँव के प्रवेश द्वार पर लगे बोर्ड पर भी इसे "God's Own Twins Village" यानी "ईश्वर का जुड़वाँ गाँव" कहा जाता है।

आखिर क्यों है यह गाँव इतना खास?

दुनिया में सामान्यतः प्रति 1,000 जन्मों पर लगभग 6 से 12 जुड़वाँ बच्चों के जन्म का औसत माना जाता है। भारत में यह दर करीब 9 प्रति 1,000 जन्म है। लेकिन कोडिन्ही में यह संख्या लगभग 42 से 45 जुड़वाँ जन्म प्रति 1,000 प्रसव तक पहुँच जाती है, जो राष्ट्रीय औसत से कई गुना अधिक है। रिपोर्टों के अनुसार गाँव में 400 से अधिक जुड़वाँ जोड़े मौजूद हैं और यह संख्या लगातार बढ़ रही है। गाँव की कई गलियों में चलते समय एक जैसे दिखने वाले बच्चों और युवाओं को देखकर बाहरी लोग अक्सर भ्रमित हो जाते हैं।

कब शुरू हुआ यह अनोखा सिलसिला?

स्थानीय लोगों के अनुसार गाँव में जुड़वाँ बच्चों के जन्म का पहला चर्चित मामला वर्ष 1949 में सामने आया था। हालांकि 1990 के दशक के बाद जुड़वाँ बच्चों के जन्म में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई। पिछले तीन पीढ़ियों से यह सिलसिला लगातार जारी है और हर वर्ष नए जुड़वाँ बच्चों के जन्म की खबरें सामने आती रहती हैं।

कोडिन्ही का रहस्य केवल भारत ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक समुदाय के लिए भी अध्ययन का विषय बन चुका है। भारत, ब्रिटेन और जर्मनी के शोधकर्ताओं ने यहाँ के लोगों के डीएनए, रक्त, बाल और लार के नमूनों का अध्ययन किया। इसके बावजूद अब तक ऐसा कोई ठोस कारण नहीं मिल पाया है जो इतनी अधिक संख्या में जुड़वाँ जन्मों की व्याख्या कर सके। विशेषज्ञों ने कई संभावनाएँ व्यक्त की हैं— आनुवंशिक (Genetic) कारण स्थानीय जल में मौजूद कोई विशेष तत्व भोजन और खान-पान की आदतें पर्यावरणीय परिस्थितियाँ लेकिन इनमें से किसी भी सिद्धांत को अब तक वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित नहीं किया जा सका है।

जुड़वाँ बच्चों के लिए बना विशेष संगठन

कोडिन्ही में जुड़वाँ बच्चों और उनके परिवारों के लिए "Twins and Kins Association (TAKA)" नामक संगठन भी बनाया गया है। यह संगठन जुड़वाँ बच्चों का पंजीकरण करता है और उनसे जुड़े सामाजिक कार्यक्रम आयोजित करता है। इसे भारत में जुड़वाँ बच्चों के लिए बने पहले संगठनों में गिना जाता है।

दुनिया के अन्य जुड़वाँ गाँवों से तुलना

कोडिन्ही की तुलना अक्सर नाइजीरिया के प्रसिद्ध शहर Igbo-Ora से की जाती है, जिसे दुनिया की "ट्विन कैपिटल" कहा जाता है। इसके अलावा ब्राज़ील के कुछ क्षेत्रों में भी जुड़वाँ जन्मों की असामान्य दर देखी गई है। फिर भी एशिया में कोडिन्ही का स्थान सबसे अनोखे जुड़वाँ गाँवों में माना जाता है।

पर्यटन का नया आकर्षण

कोडिन्ही अब केवल एक गाँव नहीं, बल्कि एक आकर्षण का केंद्र बन चुका है। देश-विदेश से पर्यटक, पत्रकार और वैज्ञानिक यहाँ पहुँचते हैं। स्कूलों, बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर एक साथ इतने जुड़वाँ बच्चों को देखकर लोग हैरान रह जाते हैं।

निष्कर्ष

केरल का कोडिन्ही गाँव आज भी विज्ञान के लिए एक अनसुलझी पहेली बना हुआ है। यहाँ जुड़वाँ बच्चों की असाधारण संख्या ने इसे वैश्विक पहचान दिलाई है। तमाम शोधों और अध्ययनों के बावजूद यह रहस्य बरकरार है कि आखिर इस छोटे से गाँव में इतने अधिक जुड़वाँ बच्चे क्यों जन्म लेते हैं। जब तक इसका उत्तर नहीं मिलता, तब तक कोडिन्ही दुनिया के सबसे रहस्यमयी गाँवों में से एक बना रहेगा।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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