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इंदौर रेलवे स्टेशन का कायाकल्प अधर में: 15 महीने बाद भी न साइट क्लियर, न फाइनल हुई डिजाइन

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

5 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें 643
इंदौर रेलवे स्टेशन का कायाकल्प अधर में: 15 महीने बाद भी न साइट क्लियर, न फाइनल हुई डिजाइन
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412 करोड़ का प्रोजेक्ट चार साल पीछे

इंदौर रेलवे स्टेशन के बहुप्रतीक्षित 412 करोड़ रुपये के रिडेवलपमेंट प्रोजेक्ट की रफ्तार बेहद सुस्त है। 42 महीने की समय सीमा वाले इस प्रोजेक्ट को शुरू हुए 15 महीने बीत चुके हैं, लेकिन काम की प्रगति मात्र आठ फीसदी तक ही सीमित है। तय शेड्यूल के अनुसार, अब तक कम से कम 35 फीसदी काम पूरा हो जाना चाहिए था। इस देरी के कारण अब यह प्रोजेक्ट चार साल पिछड़ गया है और सिंहस्थ-2028 से पहले इसके पूरा होने की उम्मीदें लगभग खत्म हो गई हैं।

प्रोजेक्ट में देरी के पीछे मुख्य रूप से रेलवे प्रशासन और निर्माण एजेंसी के बीच समन्वय की कमी और प्रशासनिक विफलताएं जिम्मेदार मानी जा रही हैं। अहमदाबाद की मॉन्टेकार्लो लिमिटेड को दिसंबर 2024 में ठेका दिया गया था और अप्रैल 2025 में काम शुरू हुआ था। हालांकि, इतने लंबे समय के बावजूद न तो रेलवे साइट को पूरी तरह खाली करा पाया है और न ही निर्माण एजेंसी स्टेशन की अंतिम डिजाइन तैयार कर सकी है।

साइट क्लियरेंस और डिजाइन में फंसा पेच

निर्माण कार्य में सबसे बड़ी बाधा साइट की उपलब्धता बनी हुई है। जनवरी 2026 में एजेंसी ने काम का दायरा बढ़ाने के लिए प्लेटफॉर्म-1 को खाली करने की मांग की थी, लेकिन रेलवे प्रशासन इसे समय पर उपलब्ध कराने में विफल रहा। रतलाम के डीआरएम अश्वनी कुमार ने स्पष्ट किया है कि विस्तार के लिए पर्याप्त जगह न मिल पाने के कारण सिंहस्थ तक काम पूरा करना संभव नहीं था। दूसरी ओर, निर्माण एजेंसी भी अब तक पूरे स्टेशन का डिजाइन वर्क फाइनल नहीं कर पाई है, जिससे केवल शुरुआती खुदाई और पार्सल कार्यालय हटाने जैसे छोटे काम ही हो सके हैं।

रेलवे ने धीमी गति को लेकर निर्माण एजेंसी को कई बार नोटिस जारी किए हैं और समीक्षा बैठकें भी आयोजित की गई हैं। हालांकि, इन बैठकों का कोई ठोस परिणाम नहीं निकला। न तो काम की गति में तेजी आई और न ही किसी अधिकारी या एजेंसी के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई की गई। जवाबदेही तय करने के मामले में रेलवे का रुख नरम बना हुआ है, जिसका खामियाजा आम यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है।

विशेषज्ञों की राय और भविष्य की राह

रेलवे विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रोजेक्ट को अब नए सिरे से मास्टर प्लानिंग की आवश्यकता है। विशेषज्ञ नागेश नामजोशी के अनुसार, मौजूदा स्थिति को देखते हुए रेलवे को एक व्यापक योजना बनानी चाहिए। इसमें रेलवे कॉलोनी, आरक्षण कार्यालय, पार्किंग और व्यावसायिक क्षेत्रों की आवश्यकताओं को शामिल करना अनिवार्य है। बिना एक स्पष्ट और व्यावहारिक मास्टर प्लान के, इस बड़े प्रोजेक्ट को समय पर पूरा करना एक बड़ी चुनौती बना रहेगा।

प्रोजेक्ट के पिछड़ने से न केवल लागत बढ़ने की आशंका है, बल्कि शहर के विकास की गति भी प्रभावित हो रही है। यात्रियों को उम्मीद थी कि सिंहस्थ-2028 से पहले स्टेशन का कायाकल्प हो जाएगा, लेकिन अब यह सपना फिलहाल दूर की कौड़ी नजर आता है। अब देखना यह होगा कि रेलवे प्रशासन इस मामले में आगे क्या ठोस कदम उठाता है और निर्माण कार्य को गति देने के लिए क्या नई रणनीति अपनाता है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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