इंदौर के सरकारी कैंसर अस्पताल में PET स्कैन अब आधे दाम पर, लीनियर एक्सीलेटर के लिए करना होगा लंबा इंतजार

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

मरीजों को मिलेगी राहत: PET स्कैन की सुविधा होगी सस्ती
इंदौर के शासकीय कैंसर अस्पताल में इलाज करा रहे मरीजों के लिए एक महत्वपूर्ण राहत भरी खबर सामने आई है। अस्पताल प्रशासन अगले एक से दो महीनों के भीतर पीपीपी (PPP) मॉडल के जरिए PET स्कैन की सुविधा शुरू करने की तैयारी कर रहा है। वर्तमान में निजी अस्पतालों में इस जांच के लिए मरीजों को लगभग 20,000 रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं, लेकिन सरकारी अस्पताल में यह सुविधा महज 10,000 रुपये के आसपास उपलब्ध होने की उम्मीद है।
एमजीएम मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों के अनुसार, निजी पार्टनर ने अपना सेटअप और फर्नीचर तैयार कर लिया है। जांच के लिए आवश्यक विशेष डाई की आपूर्ति अहमदाबाद और अन्य प्रमुख शहरों से की जाएगी। इस पहल का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को महंगी जांच से राहत दिलाना है, जिससे कैंसर का समय रहते सटीक पता लगाया जा सके।
43 करोड़ की मशीन आने के बाद भी 6 महीने का इंतजार
एक तरफ जहां PET स्कैन की सुविधा शुरू होने वाली है, वहीं दूसरी ओर अस्पताल में आने वाली अत्याधुनिक लीनियर एक्सीलेटर मशीन के लिए मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। 43 करोड़ रुपये की लागत वाली यह मशीन कैंसर के सटीक रेडिएशन उपचार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसका 'बेस फ्रेम' नीदरलैंड से इंदौर पहुंच चुका है और अगले सप्ताह विशेषज्ञों की टीम इसे इंस्टॉल करेगी।
हालांकि, मशीन का मुख्य बंकर तैयार होने के बावजूद आसपास के अन्य कक्षों का सिविल निर्माण कार्य अभी अधूरा है। निर्माण एजेंसी को काम पूरा करने के लिए दो महीने की मोहलत दी गई है, जिसके चलते मशीन के पूरी तरह चालू होने में कम से कम छह महीने का समय लगने की संभावना है। फिलहाल अस्पताल में पुरानी कोबाल्ट मशीन के भरोसे ही रेडिएशन उपचार दिया जा रहा है।
PET स्कैन का महत्व और भविष्य की योजनाएं
चिकित्सकों के अनुसार, PET स्कैन कैंसर की प्रारंभिक अवस्था को पहचानने, बीमारी के फैलाव की जांच करने और उपचार के प्रभाव का आकलन करने में अत्यंत प्रभावी है। यह न केवल कैंसर बल्कि हृदय रोगों और मस्तिष्क संबंधी विकारों जैसे अल्जाइमर और मिर्गी की सटीक पहचान में भी सहायक है। यह तकनीक सेलुलर स्तर पर बीमारी को पकड़ने में सक्षम है, जिससे डॉक्टरों को सर्जरी, कीमोथेरेपी या रेडिएशन का सही निर्णय लेने में मदद मिलती है।
एमजीएम मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया ने बताया कि अस्पताल प्रशासन इस जांच को आयुष्मान भारत योजना के दायरे में लाने के लिए शासन को प्रस्ताव भेज रहा है। इससे मरीजों को और भी अधिक आर्थिक लाभ मिल सकेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि बंकर का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है और अन्य शेष कार्यों को जल्द से जल्द पूरा करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं ताकि मरीजों को आधुनिक उपचार का लाभ मिल सके।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
