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दमोह में अमृत सरोवर योजना में बड़ा घोटाला: रिकॉर्ड से गायब हुए 12 तालाब, सरकारी धन की बंदरबांट

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

7 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें 424
दमोह में अमृत सरोवर योजना में बड़ा घोटाला: रिकॉर्ड से गायब हुए 12 तालाब, सरकारी धन की बंदरबांट
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अमृत सरोवर योजना में धांधली का खुलासा

मध्य प्रदेश के दमोह जिले में अमृत सरोवर योजना के क्रियान्वयन में गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, जिले में 125 अमृत सरोवरों का निर्माण किया जाना था, लेकिन अब रिकॉर्ड से ही 12 तालाब गायब कर दिए गए हैं। इन तालाबों के निर्माण के नाम पर लाखों रुपये का भुगतान भी किया जा चुका है, जबकि धरातल पर इनका कोई अस्तित्व नहीं है।

यह मामला तब प्रकाश में आया जब इन तालाबों के निर्माण में हुई गड़बड़ियों को लेकर जांच की मांग उठी। ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध शाखा) द्वारा जांच शुरू किए जाने के बाद से ही इन 12 तालाबों को रिकॉर्ड से हटा दिया गया। हैरानी की बात यह है कि जिन अधिकारियों और कर्मचारियों के कार्यकाल में यह हेराफेरी हुई, वे अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जिससे जवाबदेही तय करने में मुश्किलें आ रही हैं।

नाले को तालाब बताकर निकाला लाखों का बजट

बटियागढ़ जनपद के रौंसरा स्थित बड़ागांव में अमृत सरोवर के नाम पर 27 लाख रुपये से अधिक की राशि खर्च करना दिखाया गया। मौके पर जांच करने पर पता चला कि वहां किसी नए तालाब का निर्माण नहीं हुआ, बल्कि केवल एक नाले को गहरा कर खानापूर्ति की गई है। स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि नाले के गहरीकरण के नाम पर सरकारी खजाने से बड़ी राशि निकाल ली गई, जबकि वहां केवल दो ट्रॉली पत्थर ही डाले गए।

इसी तरह, ग्राम कुटरी के खर्राघाट पिपरिया मिसर में 47 लाख रुपये से अधिक का प्रोजेक्ट दिखाया गया, जिसमें से 20 लाख रुपये का भुगतान भी हो गया। मौके पर 2018 में बना एक पुराना तालाब मिला, जिसे केवल एक साइन बोर्ड और झंडावंदन प्लेटफॉर्म लगाकर अमृत सरोवर के रूप में पेश कर दिया गया। पुराने ढांचे को नया बताकर सरकारी धन का दुरुपयोग करने का यह एक स्पष्ट उदाहरण है।

पुराने तालाबों को नया बताकर की गई हेराफेरी

पटेरा जनपद के लुहारी गांव में भी इसी तरह की धांधली सामने आई है। यहां 2019 में 23 लाख रुपये से अधिक की लागत से बने पुराने तालाब को अमृत सरोवर के रूप में दर्शाकर 27 लाख रुपये का नया बजट स्वीकृत कराया गया। इसमें से 11 लाख रुपये का भुगतान भी किया जा चुका है। स्थिति यह है कि उस स्थान पर आज भी खेती की जा रही है, जो यह साबित करता है कि वहां कोई नया निर्माण कार्य नहीं हुआ है।

ग्रामीणों ने इस संबंध में पंचायत मंत्री, स्थानीय विधायक और राज्यमंत्री तक से शिकायतें कीं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि बार-बार गुहार लगाने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी मामले को दबाने में लगे रहे, जिससे भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिला।

मंत्री ने दिए जांच के निर्देश

इस पूरे मामले पर पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद पटेल ने संज्ञान लिया है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में तालाबों को रिकॉर्ड से छिपाने या हटाने की बात सामने आती है, तो इसकी विस्तृत सूची मांगी जाएगी। उन्होंने आश्वासन दिया है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और यदि कहीं भी गड़बड़ी पाई गई, तो दोषियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।

फिलहाल, इस मामले ने दमोह जिले के प्रशासनिक गलियारों में हलचल मचा दी है। अमृत सरोवर जैसी महत्वाकांक्षी योजना में हुई इस तरह की हेराफेरी ने सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि क्या सरकार इस मामले में शामिल सेवानिवृत्त अधिकारियों और वर्तमान में तैनात दोषियों पर कोई ठोस कार्रवाई कर पाती है या नहीं।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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