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बांका: डीएन सिंह कॉलेज में प्राचार्य और कर्मचारी के बीच विवाद गहराया, विश्वविद्यालय की टीम ने शुरू की जांच

Banka DN Singh College Bhusia Rajoun investigation team reaches college campus. बांका के रजौन प्रखंड अंतर्गत बुधवार की संध्या डीएन सिंह महाविद्यालय भुसिया, रजौन में तृतीय वर्ग कर्मचारी कन्हैया लाल सिंह के विरुद्ध प्रभारी प्राचार्य की शिकायत के बाद तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय की तीन सदस्यीय जांच टीम कॉलेज पहुंची और पूरे मामले की जांच की। टीम के पहुंचने के बाद महाविद्यालय में चल रहा विवाद थमने के बजाय और गहराता नजर आ रहा है, जिसे लेकर कॉलेज परिसर और क्षेत्र में तरह-तरह की चर्च

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

29 जुलाई 20262 मिनट पढ़ें 637
बांका: डीएन सिंह कॉलेज में प्राचार्य और कर्मचारी के बीच विवाद गहराया, विश्वविद्यालय की टीम ने शुरू की जांच
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कॉलेज में बढ़ा तनाव, विश्वविद्यालय ने भेजी तीन सदस्यीय टीम

बांका जिले के रजौन प्रखंड स्थित डीएन सिंह महाविद्यालय, भुसिया में प्रशासनिक विवाद अब तूल पकड़ता जा रहा है। महाविद्यालय के प्रभारी प्राचार्य और एक तृतीय वर्ग कर्मचारी कन्हैया लाल सिंह के बीच चल रहे आपसी मतभेदों के बाद तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तीन सदस्यीय जांच टीम गठित की है। बुधवार की शाम यह टीम कॉलेज परिसर पहुंची और दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए।

जांच टीम में सीसीडीसी सदस्य एसएन पांडे, विश्वविद्यालय निरीक्षक प्रो. डॉ. रंजना दुबे और कुलानुशासक डॉ. मुकेश कुमार सिंह शामिल थे। टीम ने कॉलेज पहुंचकर न केवल प्रभारी प्राचार्य और संबंधित कर्मचारी से पूछताछ की, बल्कि वहां मौजूद अन्य स्टाफ सदस्यों से भी मामले की जानकारी ली। इस दौरान कॉलेज के दस्तावेजों की भी गहन पड़ताल की गई।

प्राचार्य ने लगाए दुर्व्यवहार और मनमानी के आरोप

प्रभारी प्राचार्य द्वारा विश्वविद्यालय को दी गई लिखित शिकायत में कन्हैया लाल सिंह पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। प्राचार्य का दावा है कि उक्त कर्मचारी कॉलेज परिसर में अभद्र व्यवहार करते हैं और नोटिस दिए जाने के बावजूद नियमित रूप से अपनी ड्यूटी पर उपस्थित नहीं होते। प्राचार्य ने यह भी आरोप लगाया कि कर्मचारी ने उन पर दबाव बनाकर हस्ताक्षर करवाए और परिसर में बिना अनुमति के शिलापट्ट स्थापित किया।

जांच के दौरान कॉलेज में पूर्व में हुई अवैध बहाली और बिना विज्ञापन के नियुक्तियों का मुद्दा भी उठा। इस पर प्राचार्य ने टीम को स्पष्ट किया कि संबंधित नियुक्तियों को पहले ही रद्द किया जा चुका है। हालांकि, इन आरोपों ने कॉलेज प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

कर्मचारी ने लगाए भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप

दूसरी ओर, आरोपी कर्मचारी कन्हैया लाल सिंह ने प्राचार्य द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को निराधार और दुर्भावनापूर्ण बताया है। उन्होंने पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि महाविद्यालय में अवैध बहाली और अनुदान के नाम पर शिक्षकों व कर्मचारियों से करीब 20 लाख रुपये की वसूली की गई है, जिसका कोई स्पष्ट हिसाब नहीं दिया गया है। उन्होंने कॉलेज निधि से अवैध निकासी और छात्रों से बोनाफाइड प्रमाणपत्र के नाम पर अधिक शुल्क वसूलने का भी दावा किया है।

शिलापट्ट विवाद पर कन्हैया सिंह ने कहा कि यह निर्माण सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बाद ही हुआ था और इस पर प्राचार्य महेंद्र प्रसाद सिंह ने स्वयं हस्ताक्षर किए थे। उन्होंने दावा किया कि उनके पास इन दावों की पुष्टि के लिए लिखित आवेदन और वीडियो फुटेज भी उपलब्ध हैं।

विश्वविद्यालय प्रशासन की रिपोर्ट का इंतजार

जांच टीम ने स्पष्ट किया है कि दोनों पक्षों के बयानों और दस्तावेजों के मिलान के बाद एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इस रिपोर्ट को विश्वविद्यालय प्रशासन को सौंपा जाएगा, जिसके आधार पर आगे की अनुशासनात्मक कार्रवाई तय होगी। फिलहाल, कॉलेज परिसर में इस जांच को लेकर क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म है और विवाद सुलझने के बजाय और अधिक गहराता नजर आ रहा है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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