पटना के बड़े अस्पतालों में बेड ट्रैकिंग सिस्टम का अभाव, गंभीर मरीजों पर बढ़ रहा खतरा
पटना के बड़े अस्पतालों में बेड ट्रैकिंग, पटना में स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक और हाईटेक बनाने के दावों के बीच जमीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर दिखा रही है। राजधानी के प्रमुख सरकारी अस्पताल—PMCH, IGIMS और AIIMS पटना—में अब तक रियल-टाइम बेड ट्रैकिंग सिस्टम लागू नहीं हो पाया है। इस बुनियादी सुविधा की कमी का सीधा असर गंभीर मरीजों के इलाज पर पड़ रहा है।
हर दिन हजारों मरीज इन अस्पतालों में इलाज के लिए पहुंचते हैं, लेकिन बेड की उपलब्धता की सटीक जानकारी न होने के कारण मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई बार उन्हें एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल तक भटकना पड़ता है, जिससे इलाज में देरी होती है और स्थिति और गंभीर हो जाती है।
सबसे ज्यादा दिक्कत उन मरीजों को होती है जिन्हें ICU या वेंटिलेटर की तत्काल जरूरत होती है। ऐसे मामलों में समय बेहद महत्वपूर्ण होता है, लेकिन सही जानकारी के अभाव में मरीजों को दो-तीन अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। इस दौरान उनकी हालत लगातार बिगड़ती जाती है और कई बार यह देरी जानलेवा साबित हो सकती है।
चिकित्सा विज्ञान में ‘गोल्डन आवर’—यानी हादसे या गंभीर स्थिति के बाद का पहला एक घंटा—सबसे अहम माना जाता है। इसी समय अगर मरीज को उचित इलाज मिल जाए तो उसकी जान बचाई जा सकती है। लेकिन राजधानी में बेड की रियल-टाइम जानकारी न होने के कारण यह कीमती समय अस्पताल खोजने में ही निकल जाता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रियल-टाइम बेड ट्रैकिंग सिस्टम लागू किया जाए तो रेफरल सिस्टम अधिक प्रभावी हो सकता है और अनावश्यक देरी से बचा जा सकता है। फिलहाल छोटे अस्पताल मरीजों को बड़े अस्पतालों में रेफर तो कर देते हैं, लेकिन वहां बेड उपलब्ध है या नहीं, इसकी पुष्टि नहीं हो पाती।
एम्बुलेंस सेवाओं की स्थिति भी इससे प्रभावित है। कर्मियों को यह जानकारी नहीं होती कि किस अस्पताल में ICU या वेंटिलेटर उपलब्ध है, जिससे उन्हें मरीज को एक से दूसरे अस्पताल ले जाना पड़ता है। इससे न सिर्फ समय की बर्बादी होती है, बल्कि मरीज की जान भी जोखिम में पड़ जाती है।
यह स्थिति स्वास्थ्य विभाग के दावों और जमीनी सच्चाई के बीच के अंतर को उजागर करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि टेक्नोलॉजी आधारित समाधान जल्द लागू नहीं किए गए तो गंभीर मरीजों के लिए यह समस्या और भी खतरनाक रूप ले सकती है।
