ग्वालियर नगर निगम में भुगतान पर सवाल: अधूरे काम के बावजूद करोड़ों जारी, ऑडिट ने रोकी 47.86 लाख की फाइल
ग्वालियर नगर निगम में भुगतान पर सवाल, ग्वालियर नगर निगम में कचरा प्रबंधन से जुड़े एक बड़े प्रोजेक्ट को लेकर गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। अधूरे काम के बावजूद संबंधित कंपनी को करोड़ों रुपये का भुगतान किए जाने और नियमों की अनदेखी के आरोप लगे हैं। हाल ही में 47.86 लाख रुपये के अतिरिक्त भुगतान की प्रक्रिया को ऑडिट ने आपत्तियों के साथ रोक दिया है।
जानकारी के अनुसार, केदारपुर और बुद्धा पार्क स्थित लैंडफिल साइट्स पर कचरे के निस्तारण का ठेका एक ज्वाइंट वेंचर कंपनी को दिया गया था। इस कंपनी को पहले ही लगभग 8.28 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है, जबकि काम पूरी तरह से पूरा नहीं हुआ। बाद में करीब 2.28 करोड़ रुपये की पेनाल्टी प्रस्तावित की गई, लेकिन इसकी वसूली अब तक नहीं हो सकी।
इसके बावजूद निगम के कुछ अधिकारियों द्वारा 47.86 लाख रुपये के अतिरिक्त भुगतान की फाइल आगे बढ़ाई गई। जब यह फाइल ऑडिट के पास पहुंची, तो उसमें कई गंभीर खामियां पाई गईं और उसे वापस लौटा दिया गया।
🔍 ऑडिट में सामने आईं प्रमुख आपत्तियां:
- पूर्व गणना के अनुसार कंपनी से वसूली बन रही थी, फिर भुगतान का आधार स्पष्ट नहीं
- इस बार काम का तकनीकी मूल्यांकन नहीं कराया गया
- टेंडर शर्तों के तहत अनुबंध समाप्त किया जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ
- पेनाल्टी जमा कराए बिना कंपनी को बार-बार समय विस्तार दिया गया
- स्टाम्प ड्यूटी में गड़बड़ी पाई गई
- बुद्धा पार्क साइट पर काम शुरू तक नहीं हुआ, जबकि केदारपुर में भी कार्य अधूरा है
मामले की गंभीरता को देखते हुए आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने भी सक्रियता दिखाई है। एजेंसी ने नगर निगम से पूरे प्रोजेक्ट, भुगतान और अनुबंध से जुड़ी विस्तृत जानकारी तलब की है।
नगर निगम आयुक्त के अनुसार, ऑडिट आपत्तियों के बाद संबंधित भुगतान फिलहाल रोक दिया गया है। वहीं, अधिकारियों का कहना है कि कंपनी के काम बंद करने के बाद वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है, जिससे आगे की प्रक्रिया प्रभावित हुई है।
📌 निष्कर्ष:
ग्वालियर नगर निगम का यह मामला प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब देखना होगा कि जांच एजेंसियों की कार्रवाई में क्या तथ्य सामने आते हैं और जिम्मेदारों पर क्या कदम उठाए जाते हैं।
