नोएडा में दो दिन के हिंसक बवाल के बाद हालात सामान्य, फैक्ट्रियां खुलीं; 396 गिरफ्तार

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नोएडा में सोमवार और मंगलवार (तारीख निर्दिष्ट नहीं) को हुए दो दिन के हिंसक बवाल के बाद आज बुधवार को स्थिति में सुधार हुआ है और अधिकतर फैक्ट्रियां खुल गई हैं। यह घटना नोएडा के सेक्टर 63, 84, 85, 80 और फेस 2 इलाकों में घटी, जहां फैक्ट्री कर्मचारियों ने वेतन वृद्धि की मांग को लेकर हिंसक प्रदर्शन किया।

पुलिस और प्रशासन ने हालात पर काबू पाने के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं। जगह-जगह सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं, सीएनएसीटीवी कैमरों और ड्रोन से निरंतर निगरानी की जा रही है। सुरक्षा के लिए 16 कंपनी रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और प्रादेशिक आरक्षित बल (PAC) लगाए गए हैं। नोएडा सेक्टर 63, 84, 85, 80 और फेस 2 में पुलिस ने फ्लैगमार्च करके शांति स्थापित करने का संदेश दिया।

इस दौरान हुए हिंसक प्रदर्शन में 80 से अधिक जगहों पर पथराव की घटनाएं हुईं और 350 कंपनियों में तोड़फोड़ की गई। हालांकि, कुछ कंपनियों ने आज छुट्‌टी का ऐलान कर दिया है और अपने परिसरों के बाहर नोटिस लगाकर कर्मचारियों को सूचित किया है कि आज कंपनी बंद रहेगी। कई कंपनियों ने अपने बाहर वेतन वृद्धि के संबंध में नोटिस भी चस्पा किए हैं।

नोएडा साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में राजद की दो महिला प्रवक्ताओं कंचना यादव और प्रियंका भारती के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। आरोप है कि दोनों ने सोशल मीडिया पर भ्रामक वीडियो शेयर करके माहौल खराब करने और कानून-व्यवस्था तथा पुलिस की छवि खराब करने का प्रयास किया।

जिला मजिस्ट्रेट मेधा रुपम ने स्पष्ट किया है कि अगर कोई आउटसोर्सिंग एजेंसी या उसका कर्मचारी गड़बड़ी या उपद्रव करता है तो उसकी जिम्मेदारी एजेंसी की भी होगी। ऐसी स्थिति में एजेंसी को ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है और उसका लाइसेंस भी रद्द हो सकता है।

मंत्री अनिल राजभर ने इस पूरी घटना में बड़ी साजिश की आशंका जताई है और कहा है कि कुछ देश विरोधी ताकतें इसमें शामिल हो सकती हैं। वहीं, कंपनी मालिकों का कहना है कि बाहरी लोगों ने माहौल को भड़काया और मजदूर कभी हिंसक प्रदर्शन नहीं कर सकते हैं।

अब तक 7 थानों में 1800 लोगों और 4 हैंडलर्स के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। 4 महिलाओं समेत कुल 396 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। प्रशासन ने स्थिति को पूरी तरह नियंत्रण में ले लिया है और अब हालात सामान्य हो रहे हैं।

नोएडा के औद्योगिक क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए व्यापक योजना बनाई जा रही है। कंपनियों और कर्मचारियों के बीच संवाद स्थापित करने के प्रयास भी किए जा रहे हैं ताकि श्रमिकों की वाजिब मांगों का शांतिपूर्ण समाधान निकाला जा सके।

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