रोहतक रेप केस: 6 साल जेल काटने के बाद 7 आरोपी बरी, कोर्ट ने माना मामला झूठा
रोहतक में रेप केस में 6 साल से सजा काट रहे 7 आरोपियों को सबूतों के अभाव में एडिशनल सेशन जज की कोर्ट ने बरी कर दिया। केस की मजबूत पैरवी करते हुए एडवोकेट अभिषेक चौधरी ने कोर्ट में सातों आरोपियों को निर्दोष साबित कर दिया, जिसके बाद उन्हें आरोप मुक्त किया गया है।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

छह साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद मिली निर्दोषों को राहत
हरियाणा के रोहतक में एक महत्वपूर्ण फैसले में, स्थानीय अदालत ने सात लोगों को रेप और पॉक्सो एक्ट के एक पुराने मामले में बरी कर दिया है। ये सभी आरोपी पिछले छह वर्षों से जेल में बंद थे। एडिशनल सेशन जज की अदालत ने साक्ष्यों के अभाव और बचाव पक्ष की मजबूत दलीलों के आधार पर इन सभी को निर्दोष करार दिया है।
मामले की पैरवी कर रहे एडवोकेट अभिषेक चौधरी ने बताया कि यह पूरा मामला रंजिश का परिणाम था। उन्होंने कोर्ट में साबित किया कि आरोपियों को झूठे आरोपों में फंसाया गया था। छह साल तक सलाखों के पीछे रहने के बाद, अदालत के इस फैसले ने सातों परिवारों को बड़ी राहत दी है।
क्या था पूरा मामला और रंजिश की वजह
घटना की शुरुआत 1 अक्टूबर 2020 को सांपला थाने में दर्ज एक छेड़छाड़ के मामले से हुई थी। एडवोकेट चौधरी के अनुसार, शिकायतकर्ता ने महज 24 घंटे के भीतर ही अपने बयान बदलते हुए इसे रेप केस में तब्दील करवा दिया। पुलिस ने इस मामले में दो भाइयों, बलराम और बलराज सहित कुल सात लोगों को गिरफ्तार किया था।
जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि आरोपी बलराम का शिकायतकर्ता के बेटे के साथ पुराना विवाद चल रहा था। इसी आपसी रंजिश का बदला लेने के लिए शिकायतकर्ता ने अपनी नाबालिग बेटी का इस्तेमाल करते हुए पहले छेड़छाड़ और फिर रेप का गंभीर आरोप मढ़ दिया। इस दौरान आरोपियों को निचली अदालत से लेकर हाईकोर्ट तक कहीं से जमानत नहीं मिल सकी थी।
सबूतों में खामियां और कोर्ट का फैसला
बचाव पक्ष के वकील ने अदालत में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ और मेडिकल रिपोर्ट में देरी जैसे गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कोर्ट को बताया कि शिकायतकर्ता का इतिहास भी संदिग्ध रहा है और उसने पूर्व में भी कई लोगों के खिलाफ झूठी शिकायतें दर्ज करवाई थीं। इन बिंदुओं ने अभियोजन पक्ष के दावों को कमजोर कर दिया।
इस मामले में कुल 32 गवाह बनाए गए थे, जिनमें से 26 लोगों ने अदालत में अपनी गवाही दर्ज कराई। लंबी सुनवाई और साक्ष्यों के गहन विश्लेषण के बाद, अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ अपराध साबित करने में पूरी तरह विफल रहा है। साक्ष्यों के अभाव में अदालत ने सभी सात आरोपियों को बरी करने का आदेश सुनाया।
न्याय व्यवस्था पर सवाल
छह साल तक बिना किसी अपराध के जेल में बिताने वाले इन सात युवकों के लिए यह समय अत्यंत कष्टदायक रहा। निर्दोष होने के बावजूद उन्हें समाज और कानून की लंबी प्रक्रिया का सामना करना पड़ा। अब जब अदालत ने उन्हें दोषमुक्त कर दिया है, तो यह मामला झूठे मुकदमों और कानूनी प्रक्रिया में लगने वाले लंबे समय पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!