पाली: आठ साल पुराने गांजा तस्करी मामले में दो सगे भाइयों को सजा, कोर्ट ने माना दोषी
Pali NDPS court convicts two brothers for ganja smuggling based on forensic evidence. पाली में करीब आठ साल पुराने गांजा तस्करी के मामले में एनडीपीएस कोर्ट ने मस्तान बाबा क्षेत्र निवासी दो सगे भाइयों को साढ़े तीन-तीन साल क कारावास और 30-30 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है। दोनों 23 जून 2018 को 5 किलो 800 ग्राम गांजे के साथ पकड़े गए थे।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

आठ साल पुराने मामले में एनडीपीएस कोर्ट का फैसला
राजस्थान के पाली जिले में एनडीपीएस कोर्ट ने मादक पदार्थ तस्करी के एक पुराने मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने मस्तान बाबा क्षेत्र के रहने वाले दो सगे भाइयों को गांजा तस्करी का दोषी करार देते हुए उन्हें साढ़े तीन-तीन साल के कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही दोनों दोषियों पर 30-30 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
यह मामला करीब आठ साल पुराना है। 23 जून 2018 को कोतवाली थाना पुलिस को मुखबिर के जरिए सूचना मिली थी कि मस्तान बाबा क्षेत्र के पास अवैध रूप से गांजे की बिक्री की जा रही है। सूचना के आधार पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इलाके की घेराबंदी की थी।
पुलिस की दबिश और बरामदगी
पुलिस टीम जब मौके पर पहुंची, तो वहां मौजूद दो युवक पुलिस की गाड़ी देखकर घबरा गए और थैले लेकर बांडी नदी की ओर भागने लगे। पुलिस ने पीछा कर दोनों को पकड़ लिया। तलाशी के दौरान इरफान उर्फ राजा के पास से 1 किलो 600 ग्राम और उसके भाई इमरान के पास से 4 किलो 200 ग्राम गांजा बरामद हुआ। कुल मिलाकर पुलिस ने 5 किलो 800 ग्राम गांजा जब्त किया था।
पूछताछ के दौरान इमरान ने स्वीकार किया था कि वह यह अवैध खेप जोधपुर से लेकर आया था। पुलिस ने दोनों भाइयों को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया था। बाद में उन्हें जमानत मिल गई थी और पुलिस ने अक्टूबर 2018 में अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया था।
गवाह पलटे, लेकिन वैज्ञानिक साक्ष्यों ने दिलाई सजा
सुनवाई के दौरान यह मामला काफी चुनौतीपूर्ण रहा क्योंकि मौके पर मौजूद स्वतंत्र गवाह अपने बयानों से मुकर गए थे। हालांकि, विशिष्ट लोक अभियोजक निखिल व्यास ने अदालत के समक्ष ठोस दलीलें पेश कीं। अभियोजन पक्ष ने वैज्ञानिक और फोरेंसिक साक्ष्यों को आधार बनाया, जिसे अदालत ने पर्याप्त माना।
विशिष्ट न्यायाधीश एनडीपीएस प्रकरण एवं अपर सेशन न्यायाधीश शरद तंवर ने सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद 18 जुलाई 2026 को अपना फैसला सुनाया। अदालत ने 28 वर्षीय इरफान और 38 वर्षीय इमरान को मादक पदार्थ रखने और तस्करी का दोषी पाया।
कानूनी कार्रवाई का निष्कर्ष
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि मादक पदार्थों की तस्करी समाज के लिए एक गंभीर अपराध है। साक्ष्यों के अभाव में गवाहों के पलटने के बावजूद, फोरेंसिक रिपोर्ट ने मामले को साबित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सजा सुनाए जाने के बाद दोनों दोषियों को हिरासत में ले लिया गया है।
यह फैसला क्षेत्र में मादक पदार्थों के खिलाफ चल रही कानूनी कार्रवाई के तहत एक महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। जुर्माने की राशि जमा न करने पर दोषियों को अतिरिक्त सजा का सामना करना पड़ सकता है, जैसा कि एनडीपीएस कानून के प्रावधानों में उल्लेखित है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
