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श्री महाकालेश्वर मंदिर की संपत्ति का खुलासा: 472 करोड़ की एफडी और 300 करोड़ का सोना

Mahakal Temple Ujjain assets: 472 crore FD, 90 acres land, gold & silver. भगवान महाकाल की 472 करोड़ की एफडी बैंक में जमा है। मंदिर समिति का खर्च भी कई गुना बढ़कर 120 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

11 जुलाई 20262 मिनट पढ़ें 592
श्री महाकालेश्वर मंदिर की संपत्ति का खुलासा: 472 करोड़ की एफडी और 300 करोड़ का सोना
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उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर की वित्तीय स्थिति और संपत्ति का ब्यौरा पहली बार सार्वजनिक किया गया है। मंदिर समिति द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, बाबा महाकाल के दरबार में श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित की गई राशि और संपत्तियों का मूल्य करोड़ों में है। मंदिर प्रबंधन के पास वर्तमान में 472 करोड़ रुपए की फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) मौजूद है, जो विभिन्न बैंकों में जमा है।

संपत्ति का विस्तृत ब्यौरा

मंदिर समिति के पास केवल नकद राशि ही नहीं, बल्कि भारी मात्रा में कीमती धातुएं और जमीन भी है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, समिति के पास 300 करोड़ रुपए से अधिक मूल्य का सोना और 20 क्विंटल से ज्यादा चांदी सुरक्षित है। इसके अलावा, मंदिर के स्वामित्व में लगभग 90 एकड़ बेशकीमती जमीन भी है। हालांकि, इन जमीनों से जुड़े कुछ कानूनी मामले अभी भी न्यायालय में विचाराधीन हैं।

वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान मंदिर को रिकॉर्ड 142 करोड़ रुपए की आय प्राप्त हुई है, जिसमें से 78 करोड़ रुपए केवल दान के रूप में मिले। यह पिछले छह वर्षों में प्राप्त हुआ सबसे अधिक दान है। इसके अतिरिक्त, लड्डू प्रसादी की बिक्री से भी मंदिर समिति को 65 करोड़ रुपए की बड़ी आय हुई है।

महाकाल लोक के बाद बढ़ी श्रद्धालुओं की संख्या

11 अक्टूबर 2022 को श्री महाकाल लोक के लोकार्पण के बाद से मंदिर आने वाले भक्तों की संख्या में तीन गुना वृद्धि हुई है। पहले जहां प्रतिदिन 40 से 50 हजार श्रद्धालु दर्शन के लिए आते थे, वहीं अब यह आंकड़ा डेढ़ से दो लाख प्रतिदिन तक पहुंच गया है। श्रद्धालुओं की इस भारी भीड़ के कारण मंदिर परिसर का प्रबंधन और खर्च भी काफी बढ़ गया है।

मंदिर परिसर का क्षेत्रफल पहले 2.82 हेक्टेयर था, जो अब बढ़कर 47 हेक्टेयर हो गया है। इस विस्तार के साथ ही मंदिर समिति का वार्षिक खर्च भी बढ़कर 135 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। इसमें 306 कर्मचारियों का वेतन, सुरक्षा व्यवस्था, साफ-सफाई, रखरखाव, अन्नक्षेत्र और गोशाला का संचालन शामिल है। पहले मंदिर का मासिक खर्च लगभग 2.5 करोड़ रुपए था, जो अब बढ़कर 11 करोड़ रुपए से अधिक हो गया है।

दान और सुरक्षा का प्रबंधन

वर्ष 2025 के दौरान लगभग 6 करोड़ श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन किए। इस दौरान मंदिर को 107 करोड़ रुपए का दान प्राप्त हुआ, जिसमें 43 करोड़ रुपए दान पेटियों से और 64 करोड़ रुपए शीघ्र दर्शन टिकटों के माध्यम से आए। चांदी के दान में भी पिछले वर्ष की तुलना में 193 किलो की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

मंदिर प्रबंधन के अनुसार, श्रद्धालुओं की सुविधा और पारदर्शिता के लिए दान की प्रक्रिया को आधुनिक बनाया गया है, जिसमें क्यूआर कोड के माध्यम से भी दान स्वीकार किया जा रहा है। मंदिर की बढ़ती आय और संपत्तियों का सार्वजनिक होना भक्तों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है, साथ ही यह मंदिर के बढ़ते प्रभाव और विस्तार को भी दर्शाता है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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