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ललिता गौतम हत्याकांड: पूर्व आईपीएस प्रेम प्रकाश ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठाए गंभीर सवाल

Meerut woman threat case. Police laxity highlighted by ex-IPS Prem Prakash. मेरठ के ललिता गौतम हत्याकांड में पुलिस की खामिया उजागर होने लगी हैं। प्रशासन चाहे जो दावे करे लेकिन हकीकत यही है कि अगर रोहटा पुलिस गंभीरता दिखाती तो ललिता गौतम को बचाया जा सकता था लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

10 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें 953
ललिता गौतम हत्याकांड: पूर्व आईपीएस प्रेम प्रकाश ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठाए गंभीर सवाल
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पुलिस की लापरवाही से गई ललिता की जान

मेरठ के चर्चित ललिता गौतम हत्याकांड मामले में अब पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रेम प्रकाश ने इस मामले में रोहटा पुलिस की गंभीर लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया है। उनका स्पष्ट मानना है कि यदि पुलिस ने समय रहते कार्रवाई की होती, तो ललिता गौतम को बचाया जा सकता था। 11 मई को ही युवती ने अपनी जान को खतरा होने की आशंका जताते हुए शिकायत की थी, लेकिन पुलिस ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।

शुक्रवार को मेरठ पहुंचे पूर्व आईपीएस प्रेम प्रकाश ने सिवाया टोल प्लाजा पर पीड़ित परिवार से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने मामले की बारीकियों को समझा और जांच की दिशा पर असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पुलिस की ओर से कुछ ऐसे बयान सामने आए, जिन्होंने न केवल मामले की दिशा को भटकाने का काम किया, बल्कि पीड़ित परिवार की गरिमा को भी प्रभावित किया। यह स्थिति अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।

विवेचक सवालों के जवाब देने में रहे नाकाम

पीड़ित परिवार से चर्चा के बाद प्रेम प्रकाश ने मामले के विवेचक को तलब किया। हालांकि, विवेचक उनके द्वारा पूछे गए सवालों का कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। पूर्व आईपीएस ने पुलिस को कड़ी हिदायत दी कि वे निष्पक्ष होकर जांच करें। उन्होंने जोर देकर कहा कि अपराधी की कोई जाति नहीं होती और पुलिस का प्राथमिक कर्तव्य सच्चाई को सामने लाना है। उन्होंने विवेचक को संवेदनशीलता के साथ काम करने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।

प्रेम प्रकाश ने इस बात पर भी हैरानी जताई कि एसएसपी अविनाश पांडेय को मौके पर जाने की आवश्यकता क्यों पड़ी, जबकि अन्य वरिष्ठ अधिकारी पहले से ही वहां मौजूद थे। उन्होंने संकेत दिया कि संभवतः एसएसपी को गलत सूचनाएं दी गई थीं, जिसके कारण स्थिति तनावपूर्ण हो गई। उन्होंने कहा कि पुलिस अधिकारियों को ऐसी परिस्थितियों को संभालने का प्रशिक्षण दिया जाता है, जिसका पालन होना चाहिए था।

पीड़ित परिवार के लिए सुरक्षा और मुआवजे की मांग

पूर्व आईपीएस ने पीड़ित परिवार की सुरक्षा और भविष्य को लेकर भी प्रशासन के समक्ष मांगें रखीं। उन्होंने कहा कि परिवार को शस्त्र लाइसेंस उपलब्ध कराया जाना चाहिए ताकि वे सुरक्षित महसूस कर सकें। इसके अलावा, ललिता अपने परिवार में सबसे अधिक शिक्षित थी, इसलिए उन्होंने परिवार के किसी सदस्य को सरकारी नौकरी देने की वकालत की। उन्होंने कहा कि इस तरह के मामलों में पीड़ितों की सहायता के लिए जो गाइडलाइंस बनी हैं, उनका पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

सिवाया टोल पर परिजनों से वार्ता करने के बाद, प्रेम प्रकाश ने चंद्रशेखर आजाद के साथ मिलकर जिलाधिकारी डॉ. वीके सिंह और एसएसपी अविनाश पांडेय से कलेक्ट्रेट में मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने मामले की गंभीरता और पुलिस की पिछली विफलताओं पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि दो साल पहले भी इसी परिवार का विवाद हुआ था, जिसे पुलिस ने केवल समझौता कराकर रफा-दफा कर दिया था, जो कि एक बड़ी चूक थी।

फोरेंसिक रिपोर्ट का इंतजार

वर्तमान में पूरी जांच फोरेंसिक टीम की रिपोर्ट पर टिकी है। पूर्व एडीजी प्रेम प्रकाश ने स्पष्ट किया कि रिपोर्ट आने के बाद उच्चाधिकारियों की देखरेख में आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाएगी। गांव में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी प्रशासन को कड़े निर्देश दिए गए हैं। पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे इन सवालों ने प्रशासन पर दबाव बढ़ा दिया है, और अब सबकी नजरें आगामी जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं।

यह मामला न केवल एक युवती की हत्या का है, बल्कि पुलिस की जवाबदेही का भी है। पूर्व आईपीएस के हस्तक्षेप के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि जांच में तेजी आएगी और पीड़ित परिवार को न्याय मिल सकेगा। पुलिस प्रशासन को यह साबित करना होगा कि वे निष्पक्ष जांच करने में सक्षम हैं और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाएंगे।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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