किशनगंज मंडल कारा में चार माह में तीन बंदियों की मौत, जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल
किशनगंज मंडल कारा में पिछले चार महीनों के दौरान तीन बंदियों की मौत के बाद जेल प्रशासन की व्यवस्था और बंदियों की स्वास्थ्य निगरानी पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। मार्च से जुलाई 2026 के बीच अलग-अलग परिस्थितियों में इन मौतों की पुष्टि हुई है, जिनमें एक सजायाफ्ता बंदी, एक विचाराधीन महिला बंदी और एक नई महिला बंदी शामिल है।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

बिहार के किशनगंज स्थित मंडल कारा में पिछले चार महीनों के भीतर तीन बंदियों की मौत ने जेल प्रशासन की सुरक्षा और स्वास्थ्य निगरानी व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। मार्च 2026 से जुलाई 2026 के बीच हुई इन घटनाओं ने न केवल जेल की आंतरिक कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा किया है, बल्कि बंदियों की सुरक्षा को लेकर भी चिंताएं बढ़ा दी हैं।
चार महीने में तीन मौतें: सिलसिलेवार घटनाएं
जेल रिकॉर्ड के अनुसार, पहली घटना 23 मार्च 2026 को सामने आई, जब कैलाश कामती नामक एक सजायाफ्ता बंदी की बीमारी के चलते मृत्यु हो गई। जेल प्रशासन ने इस मामले में अप्राकृतिक मृत्यु का मामला दर्ज किया था। अधिकारियों का दावा है कि बंदी लंबे समय से बीमार था और इलाज के दौरान उसकी जान गई। हालांकि, इस घटना के बाद से ही जेल के स्वास्थ्य प्रबंधन पर सवाल उठने शुरू हो गए थे।
दूसरी दुखद घटना 10 जून 2026 को हुई, जब दहेज हत्या के मामले में न्यायिक हिरासत में बंद उषा रानी नामक महिला बंदी का शव जेल के महिला वार्ड के शौचालय में मिला। प्रारंभिक जांच में इसे आत्महत्या बताया गया, लेकिन जेल के भीतर सुरक्षा घेरे में एक महिला बंदी द्वारा इस तरह का कदम उठाना जेल प्रशासन की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।
तीसरी घटना 20 जुलाई 2026 को हुई, जब शराबबंदी कानून के तहत गिरफ्तार एक महिला को जेल में दाखिल किए जाने के कुछ ही घंटों बाद उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। उसे तत्काल सदर अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। प्राथमिक तौर पर मौत का कारण हार्ट अटैक बताया जा रहा है, लेकिन अंतिम पुष्टि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही होगी।
स्वास्थ्य जांच और सुरक्षा पर उठते सवाल
लगातार हो रही इन मौतों के बाद स्थानीय स्तर पर जेल की कार्यप्रणाली की आलोचना हो रही है। सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों का तर्क है कि जेल में प्रवेश के समय बंदियों की गहन स्वास्थ्य जांच अनिवार्य होनी चाहिए। विशेष रूप से उन बंदियों के लिए जो पहले से ही किसी बीमारी से ग्रसित हैं या मानसिक तनाव से गुजर रहे हैं, जेल प्रशासन को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की आवश्यकता है।
जेल प्रशासन ने अपने बचाव में कहा है कि सभी मामलों में नियमानुसार कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया है और हर मौत की जांच संबंधित प्रक्रियाओं के तहत कराई जा रही है। प्रशासन का कहना है कि वे बंदियों की सुरक्षा के प्रति संवेदनशील हैं, लेकिन इन घटनाओं की आवृत्ति ने जेल के भीतर के माहौल और बंदियों की देखभाल के दावों को सवालों के घेरे में डाल दिया है।
आगे की कार्रवाई और जांच का इंतजार
फिलहाल, 20 जुलाई को हुई महिला बंदी की मौत के मामले में विस्तृत रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से यह स्पष्ट हो पाएगा कि क्या यह वास्तव में प्राकृतिक मौत थी या इसमें किसी प्रकार की लापरवाही बरती गई। किशनगंज मंडल कारा में हुई इन मौतों ने प्रशासन को अपनी सुरक्षा नीतियों और कैदियों की स्वास्थ्य निगरानी प्रणाली की समीक्षा करने के लिए मजबूर कर दिया है।
आने वाले समय में जेल विभाग की ओर से इन मामलों की उच्चस्तरीय जांच या सुरक्षा व्यवस्था में बदलाव की उम्मीद जताई जा रही है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके। फिलहाल, पूरा मामला स्थानीय प्रशासन और जेल अधिकारियों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
