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करौली: चंबल नदी में मगरमच्छ का खौफनाक हमला, पशुपालक ने आंख पर वार कर बचाई जान

करौली के करणपुर क्षेत्र में चंबल नदी किनारे मगरमच्छ ने पशुपालक पर हमला कर दिया। मगरमच्छ पशुपालक को करीब 30 से 40 फीट दूर तक गर्दन तक गहरे पानी में खींच ले गया, लेकिन उसने मगरमच्छ की आंख पर वार कर खुद को छुड़ा लिया।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

5 जुलाई 20262 मिनट पढ़ें
करौली: चंबल नदी में मगरमच्छ का खौफनाक हमला, पशुपालक ने आंख पर वार कर बचाई जान
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राजस्थान के करौली जिले में चंबल नदी के किनारे एक रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना सामने आई है। यहां करणपुर क्षेत्र के घूसई घाट पर बकरियों को पानी पिलाने गए एक पशुपालक पर मगरमच्छ ने अचानक हमला कर दिया। मगरमच्छ उसे खींचकर गहरे पानी में ले गया, लेकिन पीड़ित ने अपनी सूझबूझ और साहस का परिचय देते हुए मौत के मुंह से खुद को बाहर निकाल लिया।

पानी भरने के दौरान हुआ अचानक हमला

घटना रविवार दोपहर करीब 2 से 2:30 बजे के बीच की है। धूसई गांव निवासी 55 वर्षीय पूरण मीणा अपनी बकरियों को चंबल नदी के तट पर पानी पिलाने ले गए थे। बकरियों को पानी पिलाने के बाद जब वे स्वयं नदी किनारे पानी भरने के लिए बैठे, तभी घात लगाकर बैठे एक मगरमच्छ ने उन पर झपट्टा मार दिया। मगरमच्छ ने उनके दाहिने हाथ को अपने जबड़ों में जकड़ लिया और उन्हें घसीटते हुए करीब 30 से 40 फीट दूर गर्दन तक गहरे पानी में ले गया।

अपनी जान पर बन आने के बावजूद पूरण मीणा ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने मगरमच्छ के चंगुल से छूटने के लिए संघर्ष जारी रखा। संघर्ष के दौरान उनका हाथ मगरमच्छ की आंख के पास पहुंचा, जहां उन्होंने पूरी ताकत से वार किया। इस हमले से मगरमच्छ की पकड़ ढीली हुई और उन्होंने मदद के लिए जोर-जोर से शोर मचाना शुरू कर दिया।

ग्रामीणों की तत्परता से टला बड़ा हादसा

पूरण की चीखें सुनकर आसपास मौजूद ग्रामीण मोतीलाल और प्यारेलाल तुरंत मौके पर दौड़ पड़े। ग्रामीणों ने लाठी-डंडों से मगरमच्छ पर हमला करना शुरू कर दिया। करीब 10 से 15 मिनट तक चले इस संघर्ष के बाद मगरमच्छ ने अंततः पूरण का हाथ छोड़ दिया और वापस नदी की गहराई में चला गया। ग्रामीणों ने तत्परता दिखाते हुए घायल पूरण को सुरक्षित पानी से बाहर निकाला।

घायल अवस्था में पूरण को तुरंत करणपुर अस्पताल ले जाया गया। वहां तैनात चिकित्सकों डॉ. रामराज मीणा और डॉ. महेश मीणा ने उन्हें प्राथमिक उपचार दिया। हालांकि, उनके हाथ में आई गंभीर चोटों को देखते हुए उन्हें बेहतर इलाज के लिए करौली जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया, जहां उनका उपचार चल रहा है।

चंबल नदी के तटीय इलाकों में बढ़ता खतरा

चंबल नदी का यह क्षेत्र मगरमच्छों का प्राकृतिक आवास माना जाता है। गर्मी और मानसून के दौरान अक्सर नदी का जलस्तर बढ़ने या घटने के साथ मगरमच्छों का तट के करीब आना आम बात है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नदी किनारे जाने वाले पशुपालकों और ग्रामीणों को हमेशा सतर्क रहना पड़ता है, क्योंकि मगरमच्छों की मौजूदगी किसी भी समय जानलेवा साबित हो सकती है।

इस घटना ने एक बार फिर चंबल के तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन और वन विभाग द्वारा अक्सर नदी के घाटों पर सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है, लेकिन आजीविका के लिए पशुपालकों को नदी पर निर्भर रहना पड़ता है। फिलहाल, पूरण मीणा की बहादुरी की चर्चा पूरे इलाके में है, जिन्होंने मौत के जबड़े से खुद को सुरक्षित बाहर निकाला।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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