कानपुर: बिजनौर से लाई गई बाघिन की मौत के बाद जू प्रशासन सतर्क, जंगल सफारी में हुआ पोस्टमार्टम
संक्रमण के खतरे को देखते हुए उसका पोस्टमार्टम चिड़ियाघर परिसर के बजाय बंद पडे जंगल सफारी में कराया गया। जांच में सामने आया कि करीब 15 वर्ष की वृद्ध बाघिन ने लगभग 12 दिनों से न तो कुछ खाया था और न ही पानी पिया था।

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

बिजनौर से कानपुर लाते समय हुई बाघिन की मौत
बिजनौर के अमानगढ़ टाइगर रिजर्व से कानपुर प्राणी उद्यान (कानपुर जू) लाई जा रही एक मादा बाघिन ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। शनिवार को हुई इस घटना के बाद जू प्रशासन ने अत्यंत सावधानी बरतते हुए सभी प्रोटोकॉल का पालन किया। संक्रमण के किसी भी संभावित खतरे को टालने के लिए मृत बाघिन का पोस्टमार्टम चिड़ियाघर के मुख्य परिसर के बजाय बंद पड़ी जंगल सफारी में संपन्न कराया गया।
विशेषज्ञों की एक टीम ने इस पूरी प्रक्रिया को जैव सुरक्षा मानकों के तहत अंजाम दिया। पोस्टमार्टम के बाद बाघिन के शव का वहीं पर निर्धारित नियमों के अनुसार दाह संस्कार कर दिया गया, ताकि किसी भी प्रकार के संक्रमण का प्रसार न हो सके। जू प्रशासन ने इस मामले में कोई भी जोखिम न लेने का निर्णय लिया था।
12 दिनों से भूखी थी बाघिन, मल्टीपल ऑर्गन फेलियर की आशंका
जू के पशु चिकित्सक डॉ. नासिर के नेतृत्व में तीन डॉक्टरों की टीम ने पोस्टमार्टम किया। जांच के दौरान चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। अनुमानित 15 वर्ष की इस वृद्ध बाघिन ने पिछले करीब 12 दिनों से न तो कुछ खाया था और न ही पानी पिया था। लंबे समय तक निर्जलीकरण और भुखमरी के कारण उसके शरीर के महत्वपूर्ण अंगों पर गहरा असर पड़ा था।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, बाघिन की किडनी सामान्य आकार से तीन से चार गुना बड़ी पाई गई, जबकि शरीर के अन्य अंग सिकुड़े हुए थे। चिकित्सकों ने प्रारंभिक तौर पर मल्टीपल ऑर्गन फेलियर को मौत का मुख्य कारण माना है। हालांकि, मौत की वास्तविक और वैज्ञानिक पुष्टि विसरा जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी।
पुराने अनुभवों से लिया सबक
जू प्रशासन द्वारा बरती गई यह अतिरिक्त सावधानी मई 2025 में हुई एक घटना के बाद आई है। उस समय गोरखपुर चिड़ियाघर से इलाज के लिए लाए गए बब्बर शेर 'पटौदी' की मौत के बाद जांच में बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई थी। उस घटना के कारण चिड़ियाघर को कुछ समय के लिए बंद करना पड़ा था, जिससे जू प्रशासन को काफी परेशानी हुई थी।
उस अनुभव को ध्यान में रखते हुए, इस बार प्रशासन ने किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरती। जू रेंजर फिरोज ने बताया कि बाघिन के सैंपल भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI), बरेली भेजे गए हैं। विसरा रिपोर्ट आने में लगभग सात दिन का समय लग सकता है, जिसके बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।
अन्य वन्यजीवों की सुरक्षा को प्राथमिकता
जू प्रबंधन का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी बाहरी संक्रमण का असर चिड़ियाघर में मौजूद अन्य वन्यजीवों पर न पड़े। इसी कारण पोस्टमार्टम से लेकर अंतिम संस्कार तक की पूरी प्रक्रिया को विशेष निगरानी में रखा गया। वर्तमान में जू प्रशासन विसरा रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है ताकि भविष्य के लिए आवश्यक कदम उठाए जा सकें।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
