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जोधपुर में अवैध डाइंग-प्रिंटिंग इकाइयों पर हाईकोर्ट सख्त, प्रदूषण नियंत्रण में नाकामी पर जताई नाराजगी

Jodhpur pollution crackdown: High Court expresses strong displeasure. जोधपुर शहर में अवैध डाइंग और प्रिंटिंग इकाइयों से फैल रहे प्रदूषण को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित विभागों की कार्यशैली पर गहरा असंतोष व्यक्त किया है। कोर्ट ने इस मामले में अनुपालना रिपोर्ट तलब की है।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

9 जुलाई 20262 मिनट पढ़ें 950
जोधपुर में अवैध डाइंग-प्रिंटिंग इकाइयों पर हाईकोर्ट सख्त, प्रदूषण नियंत्रण में नाकामी पर जताई नाराजगी
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राजस्थान हाईकोर्ट ने जोधपुर शहर में तेजी से फैल रहे प्रदूषण और अवैध डाइंग-प्रिंटिंग इकाइयों के संचालन को लेकर राज्य सरकार और जिम्मेदार विभागों की कार्यशैली पर कड़ी नाराजगी जाहिर की है। जस्टिस विनीत कुमार माथुर और जस्टिस चंद्रशेखर शर्मा की खंडपीठ ने इस मामले में सुनवाई करते हुए अधिकारियों से स्पष्टीकरण मांगा है कि पूर्व में जारी आदेशों का पालन अब तक क्यों नहीं किया गया।

अवैध इकाइयों से पर्यावरण और स्वास्थ्य को खतरा

याचिकाकर्ता शैलेंद्र भंडारी द्वारा दायर याचिका में कोर्ट को अवगत कराया गया कि जोधपुर की कई आवासीय कॉलोनियों में डाइंग और प्रिंटिंग का अवैध कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है। इन इकाइयों से निकलने वाला हानिकारक और प्रदूषित रसायन युक्त पानी बिना किसी उपचार के खुले में छोड़ा जा रहा है। इससे न केवल भूजल प्रदूषित हो रहा है, बल्कि आसपास रहने वाले निवासियों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर संकट पैदा हो गया है।

कोर्ट ने सुनवाई के दौरान इस बात पर गंभीर चिंता व्यक्त की कि इन इकाइयों के कारण पर्यावरण को जो नुकसान हो रहा है, उसे रोकने के लिए प्रशासन द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। याचिकाकर्ता ने कोर्ट के समक्ष साक्ष्य प्रस्तुत करते हुए बताया कि संबंधित विभागों को इस प्रदूषण के बारे में जानकारी होने के बावजूद वे मूकदर्शक बने हुए हैं।

विभागों की लापरवाही पर कोर्ट का रुख

खंडपीठ ने नाराजगी जताते हुए कहा कि राज्य सरकार को अपना जवाब दाखिल करने के लिए 24 मार्च और 6 अप्रैल को पर्याप्त समय दिया गया था, लेकिन 7 जुलाई तक कोई भी संतोषजनक जवाब पेश नहीं किया गया। कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि संबंधित विभागों ने स्वयं ही 24 और 28 अक्टूबर 2025 को इन इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश जारी किए थे, लेकिन उन आदेशों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।

न्यायाधीशों ने अधिकारियों से सीधा सवाल किया कि जब विभाग ने स्वयं कार्रवाई के निर्देश दिए थे, तो फिर उसे लागू करने में देरी क्यों की गई? कोर्ट ने इस ढिलाई को सरकारी मशीनरी की जवाबदेही में कमी माना है।

14 जुलाई तक अनुपालना रिपोर्ट तलब

मामले की गंभीरता को देखते हुए हाईकोर्ट ने सभी संबंधित अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से अवैध डाइंग और प्रिंटिंग इकाइयों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि इन इकाइयों के संचालन को रोकने के लिए जो भी आवश्यक कदम उठाए जाएं, उनकी विस्तृत अनुपालना रिपोर्ट 14 जुलाई 2026 तक कोर्ट में पेश की जानी चाहिए।

इस आदेश के बाद अब प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि कोर्ट की इस सख्ती के बाद शहर में फैल रहे प्रदूषण पर लगाम लगेगी और अवैध रूप से चल रही इकाइयों को बंद किया जाएगा। प्रशासन को अब यह सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में इस तरह की गतिविधियां आवासीय क्षेत्रों में दोबारा न पनपें।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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