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ग्वालियर दुष्कर्म-हत्याकांड: दरिंदे की फांसी की सजा उम्रकैद में बदली, अंतिम सांस तक जेल में रहेगा दोषी

Gwalior minor girl rape murder case convict Kallu Rathore life imprisonment latest news update. ग्वालियर के हजीरा थाना क्षेत्र में 9 वर्षीय मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म और उसकी बेरहमी से हत्या करने वाले दरिंदे कल्लू राठौड़ उर्फ कल्ला की फांसी की सजा को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की डबल बेंच ने उम्रकैद में तो तब्दील कर दिया है पर बता दें कि यह उम्रकैद सामान्य उम्रकैद नहीं है आरोपी को मौत आने तक (अंतिम सांस तक) जेल में ही रहना होगा।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

18 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें 745
ग्वालियर दुष्कर्म-हत्याकांड: दरिंदे की फांसी की सजा उम्रकैद में बदली, अंतिम सांस तक जेल में रहेगा दोषी
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हाईकोर्ट ने सुनाया फैसला: फांसी की सजा को उम्रकैद में बदला

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की डबल बेंच ने ग्वालियर के हजीरा थाना क्षेत्र में हुए एक अत्यंत जघन्य अपराध के मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। नौ साल की मासूम बच्ची के साथ दुष्कर्म और उसकी हत्या के दोषी कल्लू राठौड़ उर्फ कल्ला को निचली अदालत ने फांसी की सजा सुनाई थी, जिसे अब हाईकोर्ट ने उम्रकैद में तब्दील कर दिया है। हालांकि, यह सामान्य सजा नहीं है; अदालत ने स्पष्ट किया है कि दोषी को अपनी अंतिम सांस तक जेल की सलाखों के पीछे ही रहना होगा।

इससे पूर्व, 12 दिसंबर 2023 को विशेष पॉक्सो कोर्ट (11वें अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश) ने इस मामले को 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' मानते हुए कल्लू राठौड़ को मृत्युदंड दिया था। कानूनी प्रक्रिया के तहत, फांसी की सजा की पुष्टि के लिए मामला हाईकोर्ट भेजा गया था, जबकि दोषी ने भी निचली अदालत के फैसले के खिलाफ अपील दायर की थी।

आइसक्रीम का लालच देकर रची गई थी खौफनाक साजिश

घटना के विवरण के अनुसार, नौ साल की बच्ची अपने घर के पास स्थित मंदिर परिसर में खेल रही थी। आरोपी कल्लू राठौड़ ने उसे आइसक्रीम खिलाने का लालच दिया और बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया। जब बच्ची काफी समय तक घर नहीं लौटी, तो परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। इस दौरान आरोपी ने परिजनों को गुमराह करने की कोशिश की और झूठ बोला कि बच्ची आइसक्रीम खाकर घर के लिए निकल गई है।

काफी मशक्कत के बाद बच्ची का शव मां वैष्णोपुरम पोहा मिल के पास रेलवे क्रॉसिंग के नजदीक झाड़ियों में मिला। जांच में सामने आया कि दरिंदे ने पहले बच्ची के साथ दुष्कर्म किया और फिर पकड़े जाने के डर से भारी पत्थर से उसका सिर कुचलकर बेरहमी से हत्या कर दी। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और फोरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर आरोपी को गिरफ्तार किया था।

क्यों टली फांसी की सजा? कोर्ट ने दी ये दलील

हाईकोर्ट की डबल बेंच ने मामले के सभी कानूनी और तकनीकी पहलुओं की गहन समीक्षा की। अदालत ने अपने फैसले में उल्लेख किया कि आरोपी का कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है। साथ ही, न्यायालय ने पाया कि इस बात के ठोस प्रमाण नहीं हैं कि दोषी भविष्य में समाज के लिए एक स्थायी खतरा साबित होगा।

इन्हीं आधारों पर अदालत ने इस मामले को 'दुर्लभ से दुर्लभतम' (रेयरेस्ट ऑफ रेयर) की श्रेणी में नहीं रखा और फांसी की सजा को खारिज कर दिया। हालांकि, अपराध की गंभीरता और क्रूरता को देखते हुए अदालत ने यह सुनिश्चित किया कि दोषी को किसी भी स्थिति में रिहाई न मिले और वह जीवन के अंतिम क्षण तक जेल में ही रहे।

न्याय प्रणाली और सुरक्षा पर सवाल

इस घटना ने पूरे ग्वालियर क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया था। मासूम बच्ची के साथ हुई इस दरिंदगी ने सुरक्षा व्यवस्था और समाज में व्याप्त असुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे। निचली अदालत के फांसी के फैसले के बाद अब हाईकोर्ट के इस निर्णय पर कानूनी विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का दौर जारी है।

वर्तमान में दोषी कल्लू राठौड़ जेल में बंद है और अदालत के आदेशानुसार उसे अब अपनी शेष पूरी जिंदगी जेल के भीतर ही बितानी होगी। पुलिस और प्रशासन ने मामले में साक्ष्यों को जुटाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, जिसके कारण आरोपी को सजा सुनिश्चित हो सकी।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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