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पूर्व प्रधानमंत्री गुलजारीलाल नंदा की 129वीं जयंती पर लखनऊ में याद किए गए उनके आदर्श

Lucknow Gulzarilal Nanda 129th Jayanti celebration. रिवर बैंक कॉलोनी स्थित संस्थान परिसर में आयोजित समारोह में उनके व्यक्तित्व, कृतित्व और आदर्शों पर विस्तार से चर्चा हुई।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

4 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें 218
पूर्व प्रधानमंत्री गुलजारीलाल नंदा की 129वीं जयंती पर लखनऊ में याद किए गए उनके आदर्श
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लखनऊ की रिवर बैंक कॉलोनी स्थित गुलजारीलाल नंदा स्मृति संस्थान में देश के पूर्व कार्यवाहक प्रधानमंत्री और भारत रत्न से सम्मानित गुलजारीलाल नंदा की 129वीं जयंती का आयोजन किया गया। इस विशेष अवसर पर आयोजित समारोह में वक्ताओं ने नंदा के जीवन, उनके राजनीतिक सफर और राष्ट्र के प्रति उनके समर्पण को याद किया। कार्यक्रम के दौरान उनके द्वारा स्थापित उच्च आदर्शों और सादगीपूर्ण जीवन शैली पर विस्तार से चर्चा की गई।

सादगी और सत्यनिष्ठा के प्रतीक थे नंदा

कार्यक्रम का संचालन करते हुए संस्थान के सचिव ज्ञानी त्रिवेदी ने गुलजारीलाल नंदा को देश की महान विभूतियों में से एक बताया। उन्होंने कहा कि नंदा का व्यक्तित्व सत्यनिष्ठा और राष्ट्रसेवा का एक अद्वितीय उदाहरण है। वर्ष 1997 में भारत सरकार द्वारा उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' से नवाजा गया था, जो उनके अमूल्य योगदान को रेखांकित करता है। त्रिवेदी ने महात्मा गांधी के उन शब्दों को भी याद किया, जिसमें उन्होंने नंदा को व्यवस्था कौशल और सत्य का सच्चा पुजारी बताया था।

नंदा के राजनीतिक जीवन की सबसे बड़ी विशेषता उनकी सत्ता के प्रति विरक्ति थी। ज्ञानी त्रिवेदी ने बताया कि दो बार देश के कार्यवाहक प्रधानमंत्री और तीन प्रधानमंत्रियों के कार्यकाल में गृह मंत्री रहने के बावजूद, उन्होंने कभी भी व्यक्तिगत संपत्ति का संचय नहीं किया। न ही उन्होंने अपने राजनीतिक प्रभाव का उपयोग परिवारवाद को बढ़ावा देने के लिए किया। उनकी यह सादगी आज के दौर में भी राजनेताओं के लिए एक मिसाल है।

नैतिक भारत के निर्माण का संकल्प

संस्थान के अध्यक्ष और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी गोपबन्धु पटनायक ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए नंदा को ईमानदारी की प्रतिमूर्ति बताया। उन्होंने विशेष रूप से श्रमिक कल्याण के क्षेत्र में नंदा द्वारा किए गए कार्यों को याद किया। पटनायक ने कहा कि नंदा के विचार आज भी प्रासंगिक हैं और समाज में नैतिक मूल्यों को स्थापित करने के लिए उनके सिद्धांतों को अपनाना आवश्यक है।

विशिष्ट अतिथि आनंद वर्धन सिंह ने भ्रष्टाचार के खिलाफ नंदा के संघर्षों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि स्वस्थ सामाजिक परंपराओं के निर्माण में नंदा का योगदान हमेशा याद रखा जाएगा। कार्यक्रम के संयोजक डॉ. मोहम्मद कामरान ने युवाओं का आह्वान किया कि वे नंदा के सिद्धांतों को अपने जीवन में उतारें और एक नैतिक भारत के निर्माण में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करें।

सदाचार समितियों के माध्यम से सामाजिक बदलाव

गुलजारीलाल नंदा स्मृति संस्थान ने भविष्य की कार्ययोजना पर भी चर्चा की। सचिव ज्ञानी त्रिवेदी ने जानकारी दी कि संस्थान अब ग्रामीण स्तर पर 'सदाचार समितियों' का गठन करेगा। इन समितियों का मुख्य उद्देश्य नैतिक शिक्षा का प्रसार करना, राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना और तंबाकू निषेध जैसे सामाजिक अभियानों को गति देना है। यह पहल नंदा के उन आदर्शों को धरातल पर उतारने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है, जिनके लिए वे जीवन भर समर्पित रहे।

इस जयंती समारोह ने न केवल एक महान राजनेता को श्रद्धांजलि दी, बल्कि उनके द्वारा छोड़ी गई वैचारिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का भी कार्य किया। कार्यक्रम में उपस्थित प्रबुद्धजनों ने एक स्वर में कहा कि नंदा जैसे व्यक्तित्व का जीवन ही राष्ट्र निर्माण की असली प्रेरणा है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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