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बिहार शिक्षक भर्ती TRE-4: विज्ञापन में देरी से अभ्यर्थियों में भारी आक्रोश, सरकार के विरोधाभासी बयानों पर उठे सवाल

Bihar TRE-4 Recruitment Delay Sparks Student Anger. Governments shifting statements create confusion. बिहार में शिक्षक भर्ती परीक्षा (TRE-4) का इंतजार कर रहे 15 लाख से अधिक अभ्यर्थियों में लगातार बढ़ती देरी को लेकर नाराजगी बढ़ती जा रही है। अभ्यर्थियों का कहना है कि सरकार और शिक्षा विभाग की ओर से बार-बार अलग-अलग बयान दिए जा रहे हैं, जिससे उम्मीदवारों में भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

12 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें 1.4K
बिहार शिक्षक भर्ती TRE-4: विज्ञापन में देरी से अभ्यर्थियों में भारी आक्रोश, सरकार के विरोधाभासी बयानों पर उठे सवाल
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बिहार में शिक्षक भर्ती परीक्षा (TRE-4) की राह देख रहे 15 लाख से अधिक अभ्यर्थियों का धैर्य अब जवाब देने लगा है। भर्ती प्रक्रिया में हो रही लगातार देरी और शिक्षा विभाग के बदलते बयानों ने राज्य के लाखों युवाओं में गहरा असंतोष पैदा कर दिया है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि सरकार की स्पष्ट नीति के अभाव में वे भ्रम और अनिश्चितता के दौर से गुजर रहे हैं।

बदलते बयानों से बढ़ा छात्रों का गुस्सा

छात्र नेता दिलीप कुमार ने राज्य सरकार और शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर कड़े सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री ने पूर्व में सार्वजनिक रूप से यह आश्वासन दिया था कि 25 जुलाई तक TRE-4 का विज्ञापन जारी कर दिया जाएगा। हालांकि, अब विभाग की ओर से यह कहा जा रहा है कि 25 जुलाई तक केवल अधियाचना बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) को भेजी जाएगी। इस विरोधाभास ने अभ्यर्थियों के बीच यह संदेश दिया है कि सरकार अपनी ही घोषणाओं को लेकर गंभीर नहीं है।

दिलीप कुमार ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द ही अपनी स्थिति स्पष्ट नहीं की और भर्ती प्रक्रिया में तेजी नहीं लाई, तो छात्र सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होंगे। उन्होंने कहा कि लाखों युवा अपनी मेहनत और भविष्य को लेकर चिंतित हैं, लेकिन प्रशासन उन्हें केवल तारीखों के फेर में उलझा रहा है।

46 हजार पदों पर भर्ती की मांग

अभ्यर्थियों की मुख्य मांग यह है कि सरकार पूर्व में किए गए वादे के अनुसार लगभग 46 हजार पदों पर भर्ती प्रक्रिया को तुरंत शुरू करे। छात्र नेताओं का कहना है कि पदों की संख्या में किसी भी प्रकार की कटौती स्वीकार्य नहीं होगी। उन्होंने मांग की है कि जुलाई महीने के भीतर ही विज्ञापन जारी किया जाए ताकि भर्ती प्रक्रिया का रास्ता साफ हो सके और लंबे समय से तैयारी कर रहे उम्मीदवारों को राहत मिल सके।

शिक्षा विभाग के सूत्रों के अनुसार, 7 जुलाई 2026 को शिक्षा मंत्री की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई थी। इस बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि 25 जुलाई तक हर हाल में अधियाचना बीपीएससी को भेज दी जाए। लेकिन, विज्ञापन जारी करने की कोई ठोस समय-सीमा तय न होने के कारण अभ्यर्थियों में संशय बना हुआ है।

भविष्य की राह और अनिश्चितता

वर्तमान स्थिति यह है कि बीपीएससी को अधियाचना भेजे जाने के बाद भी विज्ञापन आने में कितना समय लगेगा, इस पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं है। अभ्यर्थियों का कहना है कि बार-बार की देरी से उनकी तैयारी और मानसिक स्थिति पर बुरा असर पड़ रहा है। कई उम्मीदवार ऐसे हैं जो पिछले कई चरणों से भर्ती का इंतजार कर रहे हैं और अब उनकी आयु सीमा और अन्य पात्रता संबंधी चिंताएं भी बढ़ रही हैं।

आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या सरकार 25 जुलाई की समय-सीमा का पालन करते हुए बीपीएससी को अधियाचना भेजती है या फिर छात्रों का आक्रोश और अधिक उग्र रूप लेगा। फिलहाल, शिक्षा विभाग की ओर से कोई भी ठोस आश्वासन न मिलने के कारण राज्य भर के शिक्षक अभ्यर्थियों में भारी रोष व्याप्त है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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