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पॉक्सो मामला: सहमति से बने संबंधों को लेकर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, आरोपी को मिली अग्रिम जमानत

Allahabad High Court grants anticipatory bail to POCSO accused in Siddharthnagar case. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पॉक्सो एक्ट से जुड़े एक मामले में आरोपी रामसहाय उर्फ रामू को अग्रिम जमानत दे दी। न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह की एकलपीठ ने यह आदेश सिद्धार्थनगर के गोलहरा थाने में दर्ज केस में दिया है।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

1 अगस्त 20263 मिनट पढ़ें 1.2K
पॉक्सो मामला: सहमति से बने संबंधों को लेकर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, आरोपी को मिली अग्रिम जमानत
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सिद्धार्थनगर के मामले में हाईकोर्ट का हस्तक्षेप

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पॉक्सो (POCSO) एक्ट से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में आरोपी को अग्रिम जमानत प्रदान की है। न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह की एकलपीठ ने सिद्धार्थनगर जिले के गोलहरा थाने में दर्ज एक आपराधिक मामले की सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। आरोपी रामसहाय उर्फ रामू ने अपनी गिरफ्तारी की आशंका को देखते हुए अदालत में अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर की थी।

अदालत के समक्ष आरोपी के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि एफआईआर दर्ज कराने के समय पीड़िता की आयु लगभग 20 वर्ष थी, जो कि एक वयस्क महिला की श्रेणी में आती है। बचाव पक्ष ने दावा किया कि दोनों के बीच पिछले पांच वर्षों से सहमति से संबंध थे। अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि यह मामला किसी अपराध का नहीं, बल्कि प्रेम संबंध के टूटने और विवाह के वादे से संबंधित विवाद का है, जिसे बाद में आपराधिक रंग देकर एफआईआर में तब्दील कर दिया गया।

सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का आधार

सुनवाई के दौरान अदालत ने सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पूर्व में दिए गए कई महत्वपूर्ण फैसलों का संदर्भ लिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि कोई महिला लंबे समय तक पूरी जानकारी के साथ किसी पुरुष के साथ शारीरिक संबंधों में रहती है और शुरुआत से ही किसी प्रकार के धोखे या जबरदस्ती का ठोस प्रमाण नहीं मिलता है, तो ऐसे मामलों को दुष्कर्म की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता है।

न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह ने इस बात पर चिंता व्यक्त की कि वर्तमान समय में बिगड़े हुए प्रेम-संबंधों को आपराधिक मामलों में बदलने की प्रवृत्ति लगातार बढ़ रही है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि इस प्रकार के मामलों का दुरुपयोग न्याय व्यवस्था पर अनावश्यक बोझ डालता है, जो कि एक गंभीर चिंता का विषय है।

जमानत की शर्तें और कानूनी निर्देश

तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करने के बाद, हाईकोर्ट ने आरोपी रामसहाय को 50,000 रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की दो स्थानीय जमानतों को जमा करने के निर्देश दिए। अदालत ने जमानत के साथ कुछ सख्त शर्तें भी निर्धारित की हैं, जिनका पालन करना आरोपी के लिए अनिवार्य होगा।

इन शर्तों के अनुसार, आरोपी को पुलिस की विवेचना प्रक्रिया में पूरा सहयोग करना होगा। इसके अलावा, उसे किसी भी स्थिति में गवाहों को प्रभावित करने या सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने की अनुमति नहीं दी गई है। साथ ही, अदालत की पूर्व अनुमति के बिना आरोपी देश छोड़कर बाहर नहीं जा सकेगा।

यह आदेश कानूनी हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि यह सहमति से बने संबंधों और पॉक्सो एक्ट के दायरे को लेकर एक स्पष्ट दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि कानून का उपयोग व्यक्तिगत विवादों को सुलझाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।

मामले की अगली कार्यवाही अब विवेचना के परिणामों पर निर्भर करेगी। पुलिस को निर्देश दिए गए हैं कि वे निष्पक्ष रूप से जांच पूरी करें और अदालत द्वारा निर्धारित शर्तों का पालन सुनिश्चित करें। आरोपी को राहत मिलने के बाद अब कानूनी प्रक्रिया के अगले चरणों का इंतजार है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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