पंजाब में AAP को बड़ा झटका, सांसदों के इस्तीफों के बाद पार्टी डैमेज कंट्रोल में जुटी
पंजाब में AAP को बड़ा झटका, आम आदमी पार्टी को पंजाब में बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। सात सांसदों के पार्टी छोड़ने के बाद संगठन में टूट की अटकलें तेज हो गई हैं। स्थिति को संभालने के लिए पार्टी नेतृत्व एक्टिव मोड में आ गया है। इसी कड़ी में प्रदेश प्रभारी मनीष सिसोदिया ने 29 अप्रैल को जालंधर में सभी विधायकों की अहम बैठक बुलाई है। इस बैठक में ब्लॉक ऑब्जर्वर्स और फ्रंटल संगठनों के प्रमुखों को भी शामिल होने के निर्देश दिए गए हैं।
बैठक में मुख्यमंत्री भगवंत मान भी मौजूद रहेंगे। हालांकि आधिकारिक एजेंडा सामने नहीं आया है, लेकिन माना जा रहा है कि हालिया घटनाक्रम के बाद विधायकों की स्थिति और निष्ठा को लेकर चर्चा की जाएगी। इससे पहले जालंधर में हुई एक बैठक को लेकर भी खबरें आई थीं कि मुख्यमंत्री ने विधायकों को कथित तौर पर रिश्वत लेने के आरोपों पर फटकार लगाई थी।
उधर, पार्टी छोड़ने वालों का सिलसिला जारी है। सांसद स्वाति मालीवाल ने भारतीय जनता पार्टी जॉइन कर ली है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के काम से प्रभावित होकर उन्होंने यह निर्णय लिया। मालीवाल ने यह भी कहा कि उनका यह फैसला किसी दबाव में नहीं बल्कि लंबे समय से विचार करने के बाद लिया गया है।
साथ ही उन्होंने अरविंद केजरीवाल के ‘सत्याग्रह’ ऐलान पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे राजनीतिक ड्रामा बताया। उनके अनुसार, AAP की पहचान अब देशभर में विवाद, झूठ और भ्रष्टाचार से जुड़ती जा रही है। वहीं मुख्यमंत्री भगवंत मान ने संकेत दिया है कि 29 अप्रैल को दोपहर 12 बजे एक बड़ी प्रेस कॉन्फ्रेंस की जाएगी, जिसमें इन मुद्दों पर पार्टी का पक्ष सामने रखा जाएगा।
पार्टी में टूट की चर्चा क्यों तेज हुई?
पंजाब में AAP के भीतर असंतोष की चर्चा कई वजहों से तेज हुई है। राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा के पार्टी छोड़ने और उनके 60 से अधिक विधायकों से संपर्क में होने के दावों ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। हालांकि चड्ढा ने इस पर खुलकर कोई बयान नहीं दिया है, लेकिन इन दावों ने पार्टी की चिंता बढ़ा दी है।
इसके अलावा, राज्यसभा सांसद संदीप पाठक के भी पार्टी छोड़ने की खबरों ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। बताया जा रहा है कि वे पंजाब में पार्टी की रणनीति तैयार करने में अहम भूमिका निभाते थे और उनके पास विधायकों से जुड़ी विस्तृत जानकारी भी है।
विपक्ष भी इस मुद्दे को लेकर हमलावर है। पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने दावा किया है कि AAP के 60 से 65 विधायक पार्टी छोड़ने की तैयारी में हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री भगवंत मान की स्थिति की तुलना महाराष्ट्र के राजनीतिक घटनाक्रम से करते हुए बड़ा बयान दिया है।
फिलहाल AAP के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने विधायकों को एकजुट रखना और संगठन में भरोसा बनाए रखना है। आने वाले दिनों में पार्टी की रणनीति और कदम यह तय करेंगे कि वह इस राजनीतिक संकट से कैसे उबरती है।
