आरक्षक पर वकील से मारपीट का आरोप, FIR में देरी पर हाईकोर्ट पहुंचा मामला
आरक्षक पर वकील से मारपीट का आरोप, जबलपुर में एक मामूली घरेलू विवाद ने गंभीर रूप ले लिया, जब एक पुलिस आरक्षक पर हाईकोर्ट के वकील के साथ घर में घुसकर मारपीट करने का आरोप लगा है। घटना सिविल लाइन थाना क्षेत्र के समीक्षा टाउन की है, जहां 11 अप्रैल की शाम करीब 6:30 बजे अधिवक्ता पंकज शर्मा अपने घर पर मौजूद थे।
बताया जा रहा है कि घर के बाहर बच्चों के शोर को लेकर वकील की पत्नी ने उन्हें शांत रहने के लिए कहा। इसी बात से नाराज होकर पास ही किराए से रहने वाला पुलिस आरक्षक साकेत तिवारी, जो मदन महल थाने में पदस्थ है, वकील के घर पहुंचा और गाली-गलौच शुरू कर दी। विवाद बढ़ने पर उसने कथित रूप से वकील के साथ मारपीट की। बीच-बचाव करने आए पड़ोसियों और महिलाओं के साथ भी अभद्रता किए जाने का आरोप है। इस हमले में वकील के चेहरे पर चोट आई।
घटना के बाद अधिवक्ता पंकज शर्मा सिविल लाइन थाने पहुंचे और सीसीटीवी फुटेज के साथ शिकायत दर्ज करानी चाही, लेकिन आरोप है कि पुलिस ने तत्काल FIR दर्ज नहीं की। पीड़ित का कहना है कि वे करीब तीन घंटे तक थाने में बैठे रहे, बावजूद इसके रिपोर्ट नहीं लिखी गई और उल्टा समझौते का दबाव बनाया गया। यहां तक कि जिस पुलिसकर्मी को शिकायत दर्ज करनी थी, उसे भी वहां से हटा दिया गया।
लगातार शिकायतों के बावजूद कार्रवाई न होने पर अधिवक्ता ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में रिट पिटीशन दायर की। मामले के न्यायालय पहुंचने के बाद पुलिस हरकत में आई और घटना के करीब 14 दिन बाद, 25 अप्रैल को आरोपी आरक्षक के खिलाफ विभिन्न धाराओं में FIR दर्ज की गई।
हालांकि, अधिवक्ता पंकज शर्मा ने दर्ज की गई FIR पर भी सवाल उठाए हैं और उसे चुनौती देने की बात कही है। उनका कहना है कि शिकायत की गंभीरता के अनुसार उचित धाराएं नहीं लगाई गईं।
फिलहाल मामले में 29 अप्रैल को हाईकोर्ट में सुनवाई प्रस्तावित है। यह मामला पुलिस की कार्यप्रणाली और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है, जिस पर अब न्यायालय की नजर बनी हुई है।
