चित्तौड़गढ़ में शिक्षा विभाग की कड़ी कार्रवाई: निम्बाहेड़ा में 6 कर्मचारियों पर अभियोग और बेंगू में पोक्सो आरोपी कंप्यूटर अनुदेशक निलंबित

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चित्तौड़गढ़ जिले के शिक्षा विभाग ने हाल ही में दो अलग-अलग गंभीर मामलों में कड़ी कार्रवाई करते हुए अपने प्रशासनिक दृढ़ता का परिचय दिया है। जिला शिक्षा अधिकारी मुख्यालय (प्रारंभिक शिक्षा) की ओर से उठाए गए इन कदमों से स्पष्ट संदेश गया है कि शैक्षणिक संस्थानों में अनुशासन और नैतिकता को कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

**निम्बाहेड़ा क्षेत्र में स्कूली लापरवाही पर कार्रवाई**

निम्बाहेड़ा क्षेत्र के राजकीय उच्च प्राथमिक स्कूल मोहम्मदपुरा में लंबे समय से स्टाफ के विरोध लगातार शिकायतें प्राप्त हो रही थीं। इन शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने एक विशेष जांच टीम का गठन किया, जिसने विस्तृत जांच के बाद अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। जांच में कई कर्मचारियों की लापरवाही सामने आने के बाद विभाग ने तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी।

जांच रिपोर्ट के आधार पर विभाग ने छह कर्मचारियों पर कार्रवाई की है। इनमें दो शिक्षकों – नीलम मीणा और शैलेन्द्र कुमार – को राजस्थान सिविल सेवा नियम 1958 के नियम 16 के तहत गंभीर आरोप पत्र (चार्जशीट) जारी किया गया है। इसका मतलब है कि इन पर गंभीर आरोप लगे हैं और अब उनसे औपचारिक जवाब मांगा जाएगा।

इसके अलावा, स्कूल के प्रधानाध्यापक वीरमदेव मीणा सहित चार अन्य शिक्षकों – सीमा जाट, रमेश चन्द्र मीणा और विश्व ज्योति – को भी लापरवाही के मामले में C.C.A. नियम 17 के तहत नोटिस दिए गए हैं। इन सभी को विभाग को अपना जवाब देना होगा। विभागीय अधिकारियों के अनुसार, जवाब प्राप्त होने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी और यदि जवाब संतोषजनक नहीं रहा तो और सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।

**बेंगू क्षेत्र में पोक्सो मामले में कंप्यूटर अनुदेशक निलंबित**

दूसरी ओर, बेंगू क्षेत्र के राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूल सामरिया खुर्द में एक और गंभीर मामला सामने आया है। यहां कार्यरत बेसिक कंप्यूटर अनुदेशक राजेश कुमावत के खिलाफ पोक्सो अधिनियम (POCSO Act) के तहत मामला दर्ज हुआ है। पुलिस कार्रवाई के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर जेल में भेज दिया गया है।

इस गंभीर स्थिति को देखते हुए शिक्षा विभाग ने तत्काल प्रभाव से राजेश कुमावत को निलंबित कर दिया है। निलंबन के दौरान उनका मुख्यालय बड़ी सादड़ी के ब्लॉक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में तय किया गया है। इस अवधि में उन्हें नियमानुसार निर्वाह भत्ता दिया जाएगा।

विभाग ने इस संपूर्ण मामले की जांच के लिए एक अधिकारी भी नियुक्त कर दिया है, जो घटना की विस्तृत जांच करेगा। अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए पूरी सच्चाई सामने लाई जाएगी और दोषी पाए जाने पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।

**निष्कर्ष**

चित्तौड़गढ़ जिले के शिक्षा विभाग की यह कार्रवाई इस बात का संकेत है कि शैक्षणिक संस्थानों में अनुशासन और नैतिक मानकों के प्रति कोई लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। विभाग की यह सख्त रवैया भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने में सहायक हो सकता है और शिक्षा के पवित्र माहौल को बनाए रखने में मददगार साबित हो सकता है। स्थानीय अभिभावकों और शिक्षा प्रेमियों ने विभाग की इस कार्रवाई का स्वागत किया है और आशा व्यक्त की है कि भविष्य में भी ऐसी निगरानी जारी रहेगी।

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