इंदौर में वारंट कार्रवाई विवाद, पांच पुलिसकर्मी सस्पेंड, कारोबारी ने गंभीर आरोप लगाए
इंदौर में वारंट कार्रवाई विवाद, पांच पुलिसकर्मी सस्पेंड, कारोबारी ने गंभीर आरोप लगाए, इंदौर के लसूडिया क्षेत्र में एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां एक एसआई समेत पांच पुलिसकर्मियों को डीसीपी ने सस्पेंड कर दिया है। आरोप है कि रिटायर्ड एसीपी से जुड़े प्रॉपर्टी विवाद में वारंट तामील करने के दौरान पुलिस ने एक व्यवसायी के साथ अनुचित व्यवहार किया और उसे परेशान किया।
बताया जा रहा है कि पीड़ित कारोबारी पिछले एक साल से इस मामले को लेकर वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत कर रहा था, लेकिन उसकी सुनवाई नहीं हुई। उसने लसूडिया थाना पुलिस पर धमकाने के आरोप भी लगाए थे।
व्यवसायी गौरव जैन के अनुसार, 1 अप्रैल को पुलिसकर्मी उसके घर में जबरन घुसे। उन्होंने पहले घर की रेकी की, फिर सीसीटीवी कैमरे बंद कर दिए और मास्टर चाबी से ताला खोलकर अंदर प्रवेश किया। तलाशी के दौरान उसे अपने साथ ले जाया गया और आरोप है कि घर से करीब 22 तोला सोना गायब हो गया।
गौरव ने यह भी बताया कि उसे 1 और 2 अप्रैल की रात लसूडिया थाने में रखा गया, इसके बाद निजी वाहन से ग्वालियर ले जाया गया। वहां उसे थाने के बजाय एक निजी गेस्ट हाउस में रखा गया, जहां उसके साथ मारपीट की गई। बाद में कोर्ट से जमानत मिलने के बाद वह इंदौर लौट पाया।
इस मामले में पुलिसकर्मियों पर पैसे लेने के भी आरोप हैं। गौरव के मुताबिक, एक पुलिसकर्मी ने उससे 27 हजार रुपए लिए, जिनमें से कुछ रकम क्यूआर कोड के जरिए और बाकी उसके बेटे के खाते में जमा करवाई गई।
गौरव ने 16 अप्रैल को इस पूरे मामले की शिकायत पुलिस कमिश्नर और डीसीपी को सबूतों और रिकॉर्डिंग के साथ दी। थाना प्रभारी पर भरोसा न होने के कारण जांच एसीपी स्तर के अधिकारी को सौंपी गई। जांच में प्रारंभिक साक्ष्य मिलने के बाद पांचों पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया।
हालांकि, कारोबारी का कहना है कि सिर्फ सस्पेंशन पर्याप्त नहीं है। यदि एफआईआर दर्ज नहीं की गई, तो वह मामले को डीजीपी और मुख्यमंत्री तक ले जाएगा।
वहीं, आरोपी एसआई संजय विश्नोई ने सभी आरोपों को गलत बताया है। उनका कहना है कि कार्रवाई पूरी तरह नियमों के तहत की गई थी और शिकायतकर्ता खुद साजिश रच रहा है।
मामले की पृष्ठभूमि में 65 लाख रुपए के लेनदेन का विवाद बताया जा रहा है। गौरव के अनुसार, उसकी मुलाकात 2020 में रिटायर्ड एसीपी से हुई थी। बाद में वित्तीय लेनदेन के चलते विवाद बढ़ा और चेक बाउंस होने के बाद मामला पुलिस तक पहुंचा।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि पुलिस को वारंट तामील करने का अधिकार है, लेकिन किसी भी स्थिति में परिवार के साथ दुर्व्यवहार या संपत्ति से छेड़छाड़ करना गलत है। ऐसी कार्रवाई के दौरान उचित दस्तावेजी प्रक्रिया अपनाना अनिवार्य होता है।
