पत्नी से संबंध के शक में युवक की हत्या, शव जलाकर सबूत मिटाने वाले दो दोषियों को फांसी की सजा
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में वर्ष 2018 के चर्चित राजेंद्र सैनी हत्याकांड में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने दो दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है। अदालत ने इसे 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' मामला मानते हुए कहा कि हत्या के बाद शव जलाकर सबूत मिटाने की कोशिश की गई, लेकिन अपराध को छिपाया नहीं जा सका। कोर्ट ने दोनों दोषियों पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया।

मुश्ताक अहमद खान
Editor in chief

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में करीब आठ साल पुराने राजेंद्र सैनी हत्याकांड में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए दो दोषियों को फांसी की सजा सुनाई है। अदालत ने इस मामले को 'रेयरेस्ट ऑफ रेयर' की श्रेणी में रखते हुए कहा कि आरोपियों ने पूरी योजना के तहत हत्या कर शव को जला दिया ताकि पहचान और सबूत दोनों मिट जाएं। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि किसी व्यक्ति का जीवन ईश्वर की देन है और उसे समाप्त करने का अधिकार किसी इंसान को नहीं है। न्यायालय ने यह भी टिप्पणी की कि फिल्मों और टीवी कार्यक्रमों से प्रभावित होकर कुछ लोगों को यह भ्रम हो जाता है कि शव गायब या नष्ट कर देने से अपराध साबित नहीं होगा, जबकि वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है।
क्या था पूरा मामला?
पुलिस जांच के अनुसार, राजेंद्र सैनी की हत्या 4 जून 2018 को की गई थी। मुख्य आरोपी को अपनी पत्नी और राजेंद्र के बीच कथित संबंध होने का शक था। इसी शक के चलते उसने अपने दो साथियों के साथ मिलकर राजेंद्र को बुलाया, शराब पिलाई और बाद में गला दबाकर उसकी हत्या कर दी। हत्या के बाद आरोपियों ने शव को जंगल में ले जाकर आग लगा दी ताकि उसकी पहचान न हो सके। अगले दिन जला हुआ शव मिलने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की। शव की पहचान डीएनए परीक्षण के माध्यम से की गई।
मुख्य आरोपी की सुनवाई के दौरान हुई मौत
मामले में तीन आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई थी, लेकिन सुनवाई के दौरान मुख्य आरोपी की मृत्यु हो गई। इसके बाद शेष दो आरोपियों के खिलाफ मुकदमा जारी रहा। अदालत ने पहले दोनों को दोषी करार दिया और अब अंतिम फैसला सुनाते हुए उन्हें मृत्युदंड तथा एक-एक लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई।

कोर्ट की अहम टिप्पणी
फैसला सुनाते समय अदालत ने कहा कि शव को जलाना केवल सबूत मिटाने का प्रयास नहीं था, बल्कि यह अपराध की क्रूरता और पूर्व नियोजित साजिश को भी दर्शाता है। न्यायालय के अनुसार, आरोपियों के व्यवहार में किसी प्रकार का पछतावा नहीं दिखा, जिससे यह स्पष्ट होता है कि अपराध अत्यंत निर्मम तरीके से किया गया था।


Editor in chief
मुश्ताक अहमद खानटिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!
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