राजपाल यादव चेक बाउंस केस: सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत, 5 करोड़ जमा करने की शर्त पर जेल जाने से बचे
राजपाल यादव को चेक बाउंस केस में बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने ₹5 करोड़ जमा करने की शर्त पर उन्हें जेल जाने से अंतरिम छूट दी है। दरअसल, दिल्ली हाईकोर्ट ने शाहजहांपुर के व्यापारी से ₹5 करोड़ के लेनदेन मामले में राजपाल

मोहम्मद फ़ैज़ान
संपादक

सुप्रीम कोर्ट से अभिनेता को मिली अंतरिम राहत
बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव को एक पुराने चेक बाउंस मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने अभिनेता को जेल जाने से अंतरिम छूट प्रदान की है, लेकिन इसके लिए उन्हें 5 करोड़ रुपये की राशि जमा करने की शर्त पूरी करनी होगी। यह मामला दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश के बाद चर्चा में आया था, जिसमें कोर्ट ने शाहजहांपुर के एक व्यवसायी माधव गोपाल अग्रवाल के साथ हुए लेनदेन के मामले में राजपाल यादव को तीन महीने की जेल की सजा सुनाई थी।
विवाद की जड़: लोन या निवेश का पेंच
इस पूरे विवाद की शुरुआत अप्रैल 2010 में हुई थी, जब राजपाल यादव ने अपनी फिल्म 'अता पता लापता' के निर्माण के लिए माधव गोपाल अग्रवाल से राशि ली थी। व्यवसायी का दावा है कि यह एक लोन था जिसे ब्याज सहित लौटाना था। इसके लिए एग्रीमेंट हुआ था और पोस्ट-डेटेड चेक भी दिए गए थे। हालांकि, फिल्म रिलीज के समय विवाद बढ़ने पर मामला कोर्ट तक पहुंच गया। राजपाल यादव का पक्ष यह है कि यह लोन नहीं, बल्कि फिल्म में किया गया निवेश था, जो फिल्म के फ्लॉप होने के कारण डूब गया।
कानूनी दस्तावेजों के अनुसार, फिल्म निर्माण के दौरान कई बार समझौते की तारीखें बढ़ाई गईं। अंतिम समझौते के तहत राजपाल यादव को करीब 11.11 करोड़ रुपये चुकाने थे। व्यवसायी का आरोप है कि जब उन्होंने चेक बैंक में लगाए, तो वे बाउंस हो गए। इसके बाद कड़कड़डूमा कोर्ट में सात अलग-अलग आपराधिक मामले दर्ज किए गए। ट्रायल कोर्ट और सेशन कोर्ट ने राजपाल यादव को दोषी पाते हुए सजा और जुर्माने का आदेश दिया था, जिसे बाद में दिल्ली हाईकोर्ट ने भी बरकरार रखा।
कोर्ट में राजपाल का रुख और कानूनी लड़ाई
सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट किया था कि यह लेनदेन लोन की श्रेणी में आता है। कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी टिप्पणी की थी कि अभिनेता भुगतान करने में सक्षम होने के बावजूद टालमटोल कर रहे हैं। राजपाल यादव ने कोर्ट में यह तर्क दिया था कि व्यवसायी के गलत इरादों के कारण उनकी फिल्म का प्रचार प्रभावित हुआ और वह अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सकी, जिससे उन्हें भारी नुकसान हुआ। उन्होंने यहां तक कहा था कि वे समझौता करने के बजाय कानूनी लड़ाई लड़ना पसंद करेंगे।
हालांकि, हालिया घटनाक्रमों में राजपाल यादव का रुख थोड़ा बदलता नजर आया है। अगस्त महीने में एक मीडिया एजेंसी से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा था कि वे उन सभी लोगों का बकाया चुकाने के लिए तैयार हैं जिनका पैसा फिल्म में लगा था। वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश ने उन्हें जेल जाने से फिलहाल बचा लिया है, लेकिन 5 करोड़ रुपये जमा करने की समय-सीमा का पालन करना उनके लिए अनिवार्य होगा।
आगे की राह
यह मामला फिल्म जगत में वित्तीय अनुबंधों की जटिलता को दर्शाता है। कोर्ट ने जुर्माने की राशि का एक हिस्सा सरकारी खजाने में और शेष हिस्सा शिकायतकर्ता को देने का निर्देश दिया है। यदि अभिनेता निर्धारित राशि जमा नहीं करते हैं, तो उन्हें जेल की सजा का सामना करना पड़ सकता है। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या राजपाल यादव तय समय के भीतर यह राशि जमा कर पाते हैं या यह कानूनी लड़ाई और आगे खिंचेगी।

संपादक
मोहम्मद फ़ैज़ान
टिप्पणियाँ (2)
- अअमित कुमार2 घंटे पहले
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।
- ससपना ठाकुर4 घंटे पहले
ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!