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राम मंदिर चंदा विवाद: मनीष तिवारी ने दिग्विजय सिंह के बयान से बनाई दूरी, जांच पर रखी यह मांग

Congress leader Digvijaya Singh statement on Ram Mandir donation. राम मंदिर में चढ़ावे और चंदे को लेकर मध्य प्रदेश के वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के बयान से चंडीगढ़ के सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी ने दूरी बना ली है।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

4 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें 1.1K
राम मंदिर चंदा विवाद: मनीष तिवारी ने दिग्विजय सिंह के बयान से बनाई दूरी, जांच पर रखी यह मांग
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दिग्विजय सिंह के बयान पर मनीष तिवारी की प्रतिक्रिया

राम मंदिर निर्माण के लिए एकत्रित किए गए चंदे और चढ़ावे को लेकर मध्य प्रदेश के वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह द्वारा दिए गए बयानों ने राजनीतिक गलियारों में चर्चा छेड़ दी है। इस पूरे मामले पर अब चंडीगढ़ के सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। तिवारी ने स्पष्ट रूप से दिग्विजय सिंह के दावों से किनारा करते हुए कहा है कि वह इस विषय पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते।

मीडिया से बातचीत के दौरान मनीष तिवारी ने कहा कि दिग्विजय सिंह पार्टी के एक वरिष्ठ और अनुभवी नेता हैं, जो अपने बयानों का उत्तर देने में पूरी तरह सक्षम हैं। उन्होंने इस विवाद से खुद को अलग रखते हुए किसी भी प्रकार की व्यक्तिगत राय देने से इनकार कर दिया, जिससे यह संकेत मिलता है कि कांग्रेस के भीतर इस मुद्दे पर एक राय नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग

राम मंदिर से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों पर अपनी राय रखते हुए मनीष तिवारी ने एक महत्वपूर्ण सुझाव दिया है। उन्होंने कहा कि चूंकि राम मंदिर का पूरा मामला और इसके निर्माण का मार्ग सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद प्रशस्त हुआ था, इसलिए यदि चंदे में हेराफेरी के आरोप लग रहे हैं, तो इसकी निष्पक्ष जांच भी सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में ही होनी चाहिए।

तिवारी के अनुसार, यदि आरोपों की जांच सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एक विशेष समिति द्वारा की जाती है, तो इससे न केवल पारदर्शिता बनी रहेगी, बल्कि पूरे मामले की सच्चाई भी जनता के सामने आ सकेगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस तरह के संवेदनशील मामलों में किसी भी प्रकार का संदेह दूर करने के लिए न्यायिक निगरानी ही सबसे उपयुक्त माध्यम है।

क्या था दिग्विजय सिंह का आरोप?

उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने हाल ही में राम मंदिर के चढ़ावे और चंदे में भारी हेराफेरी का गंभीर आरोप लगाया था। उन्होंने सार्वजनिक रूप से दावा किया था कि उन्होंने मंदिर निर्माण के लिए 1,11,000 रुपये का चंदा चेक के माध्यम से दिया था। अब कथित अनियमितताओं की खबरें सामने आने के बाद उन्होंने अपना चंदा वापस लेने की बात कही है।

दिग्विजय सिंह ने यह भी संकेत दिया था कि वे इस मामले को लेकर अयोध्या की अदालत का दरवाजा खटखटाने की तैयारी कर रहे हैं। उनके इस बयान के बाद से ही राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। जहां एक ओर विपक्ष इस मुद्दे को लेकर आक्रामक है, वहीं पार्टी के ही कुछ नेता इस तरह के बयानों से दूरी बनाना बेहतर समझ रहे हैं।

राजनीतिक और कानूनी परिप्रेक्ष्य

राम मंदिर निर्माण एक अत्यंत संवेदनशील और आस्था से जुड़ा विषय है। ऐसे में चंदे को लेकर उठे विवाद ने इसे राजनीतिक रंग दे दिया है। मनीष तिवारी का बयान इस बात को दर्शाता है कि कांग्रेस के भीतर भी इस मुद्दे को लेकर अलग-अलग दृष्टिकोण मौजूद हैं। जहां दिग्विजय सिंह कानूनी लड़ाई लड़ने की बात कर रहे हैं, वहीं तिवारी जैसे नेता मामले को न्यायिक प्रक्रिया के दायरे में रखकर निष्पक्षता की मांग कर रहे हैं।

आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या दिग्विजय सिंह वास्तव में अदालत का रुख करते हैं और यदि ऐसा होता है, तो इस पर न्यायिक प्रक्रिया क्या मोड़ लेती है। फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम ने राम मंदिर ट्रस्ट और चंदा प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसका समाधान अब एक पारदर्शी जांच के माध्यम से ही संभव माना जा रहा है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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