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मंदसौर में वन्यजीव तस्करी का भंडाफोड़: गोह के अंगों के साथ तीन गिरफ्तार

Mandsaur forest department busts illegal monitor lizard parts trade. मंदसौर वन विभाग ने सोमवार को बड़ी कार्रवाई करते हुए मॉनिटर लिजार्ड (गोह) के अवशेष, जिन्हें हत्था जोड़ी के नाम से जाना जाता है, की अवैध बिक्री करते तीन लोगों को गिरफ्तार किया।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

6 जुलाई 20262 मिनट पढ़ें 1K
मंदसौर में वन्यजीव तस्करी का भंडाफोड़: गोह के अंगों के साथ तीन गिरफ्तार
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मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले में वन विभाग ने वन्यजीवों के अंगों की अवैध तस्करी के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। विभाग की टीम ने नेहरू बस स्टैंड के पास से तीन तस्करों को गिरफ्तार किया है, जो संरक्षित प्रजाति की मॉनिटर लिजार्ड (गोह) के अवशेषों को बेचने की फिराक में थे। आरोपियों के कब्जे से 19 नग 'हत्था जोड़ी' बरामद की गई है, जिसे बाजार में अंधविश्वास के नाम पर बेचा जा रहा था।

गुप्त सूचना पर वन विभाग की दबिश

वन विभाग के अधिकारियों को वनमंडलाधिकारी के जरिए एक गुप्त सूचना मिली थी कि नेहरू पार्क गेट के पास कुछ संदिग्ध व्यक्ति वन्यजीवों के अंगों की खरीद-फरोख्त कर रहे हैं। सूचना की गंभीरता को देखते हुए विभाग ने तुरंत एक विशेष टीम का गठन किया। टीम ने घेराबंदी करते हुए मौके से तीन लोगों को हिरासत में लिया। पूछताछ और तलाशी के दौरान उनके पास से बड़ी मात्रा में वन्यजीव अवशेष बरामद हुए।

पकड़े गए आरोपियों की पहचान सुरेश सिंह (54), करोल सिंह (36) और भारतबाई (52) के रूप में हुई है। ये तीनों आरोपी मंदसौर जिले के ही ग्राम रूपावली, पोस्ट साबाखेड़ा के रहने वाले बताए जा रहे हैं। फिलहाल विभाग इनसे पूछताछ कर रहा है कि वे इन अवशेषों को कहां से लाते थे और इनके नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल है।

अंधविश्वास का शिकार है मॉनिटर लिजार्ड

वन विभाग के अनुसार, जिसे लोग 'हत्था जोड़ी' के नाम से जानते हैं, वह असल में कोई वनस्पति नहीं है। यह संकटग्रस्त वन्यजीव मॉनिटर लिजार्ड (गोह) के नर जननांग (हेमीपेनिस) होते हैं। तांत्रिक अनुष्ठानों, वशीकरण और धन प्राप्ति के अंधविश्वास के चलते तस्कर इस बेजुबान जानवर का बेरहमी से शिकार करते हैं। इसके अंगों को सुखाकर उन्हें चमत्कारी बताकर लोगों को ठगा जाता है।

मॉनिटर लिजार्ड वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की प्रथम अनुसूची में शामिल एक अत्यंत संरक्षित जीव है। कानून के तहत इसका शिकार करना, इसे मारना या इसके अंगों का व्यापार करना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। इस जीव की घटती संख्या के पीछे इस तरह की अवैध तस्करी एक बड़ा कारण बनी हुई है।

कानूनी कार्रवाई और सजा का प्रावधान

वन विभाग ने तीनों आरोपियों के खिलाफ परिक्षेत्र मंदसौर में वन अपराध प्रकरण क्रमांक 3832/16 के तहत मामला दर्ज किया है। वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज इस मामले में दोषियों को कड़ी सजा का प्रावधान है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इस अपराध में दोषी पाए जाने पर 3 से 7 वर्ष तक की कैद और न्यूनतम 25 हजार रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।

वन विभाग की इस कार्रवाई से क्षेत्र में वन्यजीव तस्करों के बीच हड़कंप मच गया है। विभाग अब इस बात की जांच कर रहा है कि क्या ये आरोपी किसी बड़े गिरोह के लिए काम कर रहे थे या वे खुद ही शिकारियों से संपर्क साधकर माल बेचते थे। मामले की विस्तृत जांच जारी है और आने वाले दिनों में और भी गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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