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कोटा बाल सुधार गृह में हंगामा: मनपसंद खाने और फिल्म की मांग पूरी न होने पर बाल अपचारियों ने उठाया आत्मघाती कदम

Two juvenile offenders in Kota drank toilet cleaner after not getting preferred food. Two others fell ill.

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

4 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें 1.2K
कोटा बाल सुधार गृह में हंगामा: मनपसंद खाने और फिल्म की मांग पूरी न होने पर बाल अपचारियों ने उठाया आत्मघाती कदम
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राजस्थान के कोटा स्थित बाल सुधार गृह में उस समय हड़कंप मच गया जब वहां रह रहे बाल अपचारियों ने अपनी अनुचित मांगें पूरी न होने पर आत्मघाती कदम उठा लिया। सुधार गृह में बंद चार बाल अपचारियों की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें आनन-फानन में न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया। इनमें से दो ने टॉयलेट क्लीनर का सेवन कर लिया था, जबकि दो अन्य की लगातार भूख हड़ताल के कारण स्थिति गंभीर हो गई थी।

क्या थी बाल अपचारियों की मांगें?

प्राप्त जानकारी के अनुसार, सुधार गृह में रह रहे ये बाल अपचारी लंबे समय से अपनी मनमानी मांगों को लेकर प्रशासन पर दबाव बना रहे थे। उनकी मुख्य मांगों में मांसाहारी भोजन उपलब्ध कराना, अपनी पसंद की फिल्में देखना और पेन ड्राइव का उपयोग करने की अनुमति शामिल थी। सुधार गृह प्रशासन ने स्पष्ट किया कि नियमों के दायरे से बाहर होने के कारण इन मांगों को स्वीकार करना संभव नहीं था, जिसके बाद से ही ये किशोर नाराज चल रहे थे।

प्रशासन के इनकार के बाद, सुधार गृह में बंद 5 से 7 बाल अपचारियों ने एक जुलाई से ही भूख हड़ताल शुरू कर दी थी। वे लगातार भोजन का त्याग कर प्रशासन को अपनी मांगों के आगे झुकाने का प्रयास कर रहे थे। इस दौरान सुधार गृह के अधीक्षक निशांत ने बताया कि यहां 18 वर्ष से अधिक आयु के लगभग 10 से 12 बाल अपचारी रह रहे हैं, जिन्हें हाल ही में मेस के समीप वाली बिल्डिंग में स्थानांतरित किया गया था।

टॉयलेट क्लीनर पीने से बिगड़ी स्थिति

मामला तब और गंभीर हो गया जब शुक्रवार को झालावाड़ और कोटा के रहने वाले दो बाल अपचारियों ने टॉयलेट क्लीनर पी लिया। जहरीले पदार्थ के सेवन के तुरंत बाद ही उन्हें उल्टियां होने लगीं और उनकी हालत तेजी से बिगड़ने लगी। वहीं, दो अन्य किशोर, जो बूंदी और कोटा ग्रामीण के निवासी हैं, वे दो दिनों तक लगातार भूखे रहने के कारण कमजोरी और स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे।

सुधार गृह प्रशासन ने तुरंत सक्रियता दिखाते हुए चारों किशोरों को उपचार के लिए न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल के चिकित्सकों की देखरेख में उनका इलाज किया गया। राहत की बात यह है कि समय पर चिकित्सा मिलने के कारण चारों की स्थिति अब खतरे से बाहर है और वे सामान्य रूप से खान-पान-भोजन कर रहे हैं।

सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

इस घटना ने बाल सुधार गृह की सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सुधार गृह में होमगार्ड की तैनाती के बावजूद बाल अपचारियों द्वारा टॉयलेट क्लीनर जैसे खतरनाक रसायन तक पहुंच बना लेना एक बड़ी चूक मानी जा रही है। प्रशासन अब इस पूरे मामले की आंतरिक जांच कर रहा है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके।

सुधार गृह के अधिकारियों का कहना है कि वे किशोरों के पुनर्वास और सुधार के लिए प्रतिबद्ध हैं, लेकिन नियमों का उल्लंघन किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। फिलहाल, अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद इन किशोरों को वापस सुधार गृह लाया जाएगा, जहां उनकी गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी।

इस घटना के बाद से ही कोटा के बाल सुधार गृह में तनाव का माहौल है। प्रशासन अब अन्य किशोरों की काउंसलिंग पर भी ध्यान दे रहा है ताकि उन्हें सही दिशा में प्रेरित किया जा सके और ऐसी आत्मघाती प्रवृत्तियों से दूर रखा जा सके।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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