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झुंझुनूं: नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में पोक्सो कोर्ट का सख्त फैसला, दो दोषियों को 20-20 साल की सजा

POCSO court delivers major verdict in minor girl abduction and rape case. 2.15-2.15 लाख का जुर्माना पोक्सो कोर्ट का बड़ा फैसला, नाबालिग से दुष्कर्म के दो दोषियों को 20-20 साल की कैद

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

24 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें 1.2K
झुंझुनूं: नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में पोक्सो कोर्ट का सख्त फैसला, दो दोषियों को 20-20 साल की सजा
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नाबालिग पीड़िता को बनाया था शिकार

राजस्थान के झुंझुनूं जिले में पोक्सो अदालत ने एक बेहद गंभीर मामले में अपना फैसला सुनाते हुए दो दोषियों को 20-20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। यह मामला एक नाबालिग लड़की के अपहरण और उसके साथ बार-बार दुष्कर्म किए जाने से जुड़ा है। अदालत ने दोषियों पर आर्थिक दंड भी लगाया है, जिसके तहत प्रत्येक दोषी को 2.15-2.15 लाख रुपये का जुर्माना भरना होगा।

मामले की सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि पीड़िता के साथ यह घिनौना कृत्य सुनियोजित तरीके से किया गया था। दोषियों ने नाबालिग को बहला-फुसलाकर और शादी का झांसा देकर अपनी हवस का शिकार बनाया। इस मामले में कानून की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप तय किए गए थे, जिन्हें अभियोजन पक्ष ने मजबूती से अदालत के समक्ष रखा।

पड़ोसी और परिचित ने रची साजिश

विशिष्ट लोक अभियोजक के अनुसार, इस मामले में पहला दोषी पीड़िता का ही पड़ोसी था। उसने नाबालिग को विश्वास में लेकर उसे होटल ले जाने का सिलसिला शुरू किया। पड़ोसी होने का फायदा उठाकर उसने कई बार पीड़िता के साथ दुष्कर्म किया। वहीं, दूसरा दोषी भी पीड़िता के संपर्क में था, जिसने उसे शादी का झूठा वादा देकर गुमराह किया और होटल में ले जाकर शारीरिक शोषण किया।

पीड़िता की उम्र कम होने और आरोपियों द्वारा लगातार किए गए शोषण के कारण यह मामला पोक्सो एक्ट के तहत अत्यंत गंभीर श्रेणी में आता है। आरोपियों ने पीड़िता की मजबूरी और उसकी मासूमियत का फायदा उठाकर उसे लंबे समय तक प्रताड़ित किया, जिसकी पुष्टि जांच के दौरान हुई।

सबूतों और गवाहों के आधार पर सजा

न्यायालय में इस मामले को साबित करने के लिए अभियोजन पक्ष ने कड़ी मेहनत की। सुनवाई के दौरान कुल 20 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए, जिन्होंने घटना की पुष्टि की। इसके अलावा, पुलिस और जांच एजेंसियों द्वारा जुटाए गए 34 महत्वपूर्ण दस्तावेजों को साक्ष्य के रूप में पेश किया गया। इन दस्तावेजों और गवाहों के बयानों ने दोषियों के खिलाफ पुख्ता मामला तैयार कर दिया था।

लोक अभियोजक ने अदालत से मांग की थी कि आरोपियों को उनके कृत्य के लिए अधिकतम सजा दी जाए, ताकि समाज में एक कड़ा संदेश जा सके। अदालत ने सभी साक्ष्यों का बारीकी से परीक्षण करने के बाद दोनों आरोपियों को दोषी करार दिया और उन्हें कठोर कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।

न्याय व्यवस्था की तत्परता

झुंझुनूं पोक्सो कोर्ट का यह फैसला नाबालिगों के खिलाफ होने वाले अपराधों में न्याय की गति और गंभीरता को दर्शाता है। इस फैसले से पीड़िता के परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है। कानून विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के मामलों में सख्त सजा मिलने से भविष्य में ऐसे अपराधों पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।

फिलहाल, दोनों दोषियों को सजा सुनाए जाने के बाद जेल भेज दिया गया है। अदालत ने जुर्माने की राशि जमा करने के भी स्पष्ट निर्देश दिए हैं। इस पूरे मामले ने क्षेत्र में सनसनी फैला दी थी, लेकिन अदालत के त्वरित और कठोर निर्णय ने पीड़ित पक्ष को बड़ी राहत दी है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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