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ग्वालियर में 20 साल पुरानी दोस्ती का फायदा उठाकर 46 लाख की ठगी, फर्जी बैंक अधिकारी बनकर दिया झांसा

कारोबारी को लगाया ₹46.40 लाख का चूना; फर्जी बैंक मैनेजर और रसीदें थमाकर की ठगी. 20 साल पुराने दोस्त ने दिया दगा

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

18 जुलाई 20262 मिनट पढ़ें
ग्वालियर में 20 साल पुरानी दोस्ती का फायदा उठाकर 46 लाख की ठगी, फर्जी बैंक अधिकारी बनकर दिया झांसा
मूल स्रोत

दोस्ती की आड़ में रची गई साजिश

ग्वालियर के महाराजपुरा थाना क्षेत्र में एक कारोबारी के साथ लाखों रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। पीड़ित रामअवतार सिंह राठौड़ के साथ यह ठगी उनके ही एक पुराने दोस्त ने की है, जिससे उनका परिचय पिछले 20 वर्षों से था। आरोपियों ने कारोबारी को सस्ते प्लॉट और बैंक नीलामी का लालच देकर कुल 46.40 लाख रुपये की चपत लगा दी।

घटना की शुरुआत दिसंबर 2023 में हुई, जब भिंड निवासी कृष्ण गोपाल सिंह उर्फ अनिल श्रीवास और उसकी पत्नी सरिता श्रीवास ने पीड़ित को शताब्दीपुरम में एक प्लॉट दिलाने का प्रस्ताव रखा। आरोपी ने विश्वास जीतने के लिए पहले 7 लाख रुपये का एग्रीमेंट किया, जिससे पीड़ित को लगा कि सौदा पूरी तरह वैध है।

फर्जी बैंक अधिकारियों का जाल

आरोपियों ने ठगी को अंजाम देने के लिए एक संगठित गिरोह की तरह काम किया। उन्होंने अमित श्रीवास को एचडीएफसी बैंक का फील्ड ऑफिसर, विनय शर्मा और धर्मवीर सिंह को बैंक मैनेजर, तथा रामगोपाल राजोरिया को हाउसिंग बोर्ड का अधिकारी बताकर पीड़ित से मिलवाया। इन फर्जी अधिकारियों ने पीड़ित का भरोसा पूरी तरह जीत लिया।

बैंक नीलामी के नाम पर आरोपियों ने एचडीएफसी बैंक के फर्जी लेटरहेड, जाली सील और कूटरचित रसीदों का इस्तेमाल किया। इन दस्तावेजों के जरिए उन्होंने पीड़ित से अलग-अलग किश्तों में 39.40 लाख रुपये और वसूले। इस प्रकार, प्लॉट दिलाने के नाम पर कुल 46.40 लाख रुपये की बड़ी रकम ऐंठ ली गई।

पोल खुली तो दी जान से मारने की धमकी

जब पीड़ित ने प्लॉट की रजिस्ट्री कराने का दबाव बनाया, तो आरोपी टालमटोल करने लगे। संदेह होने पर रामअवतार ने रजिस्ट्री कार्यालय, ग्वालियर विकास प्राधिकरण (जीडीए) और एचडीएफसी बैंक में दस्तावेजों की पड़ताल की। जांच में पता चला कि ई-रजिस्ट्री पूरी तरह फर्जी थी और जिन व्यक्तियों को बैंक अधिकारी बताया गया था, वे बैंक के कर्मचारी ही नहीं थे।

धोखाधड़ी का खुलासा होने के बाद जब पीड़ित ने अपने पैसे वापस मांगे, तो आरोपियों ने उसे गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी दी। इसके बाद सभी आरोपी अपने मोबाइल बंद कर फरार हो गए। पीड़ित की शिकायत पर महाराजपुरा पुलिस ने धोखाधड़ी और जालसाजी की धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है।

पुलिस की कार्रवाई और जांच

महाराजपुरा थाना पुलिस ने मुख्य आरोपी कृष्ण गोपाल सिंह, उसकी पत्नी सरिता और उनके सहयोगियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। पुलिस अब आरोपियों के संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है और साक्ष्य जुटाने में लगी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस यह भी पता लगा रही है कि क्या इस गिरोह ने अन्य लोगों के साथ भी इसी तरह की ठगी की है।

फिलहाल पुलिस की टीम आरोपियों की तलाश में जुटी है। इस घटना ने एक बार फिर लोगों को सतर्क कर दिया है कि किसी भी संपत्ति सौदे या बैंक नीलामी के दौरान दस्तावेजों की आधिकारिक पुष्टि करना कितना आवश्यक है, चाहे सामने वाला व्यक्ति कितना ही पुराना परिचित क्यों न हो।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अ
    अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • स
    सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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