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भागलपुर: गंगा के रौद्र रूप से राघोपुर तटबंध को फिर खतरा, 30 मीटर हिस्सा कटा

Bhagalpur Ganga river bank erosion threat updates. भागलपुर में गंगा नदी का कटाव एक बार फिर तेज हो गया है। राघोपुर-काजीकोरैया तटबंध पर नया कटाव सामने आया है, जिससे स्थानीय प्रशासन और लोगों की चिंता बढ़ गई है।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

1 अगस्त 20262 मिनट पढ़ें 1.2K
भागलपुर: गंगा के रौद्र रूप से राघोपुर तटबंध को फिर खतरा, 30 मीटर हिस्सा कटा
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बिहार के भागलपुर जिले में गंगा नदी का जलस्तर और उसका बहाव एक बार फिर तटीय इलाकों के लिए मुसीबत बन गया है। राघोपुर-काजीकोरैया तटबंध के एक हिस्से में हुए नए कटाव ने स्थानीय प्रशासन और निवासियों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। गंगा की तेज लहरें लगातार तटबंध को अपनी चपेट में ले रही हैं, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।

30 मीटर तटबंध का हिस्सा कटा

ताजा जानकारी के अनुसार, राघोपुर-काजीकोरैया तटबंध का लगभग 30 मीटर हिस्सा गंगा के तेज बहाव में बह गया है। यह इलाका काफी संवेदनशील माना जा रहा है क्योंकि यह क्षेत्र प्रमुख जनप्रतिनिधियों के आवास और विधानसभा क्षेत्रों के निकट स्थित है। कटाव की गति इतनी तीव्र है कि विभाग द्वारा लगाए गए सुरक्षात्मक उपाय भी नाकाफी साबित हो रहे हैं।

इससे पहले, 26 जुलाई की रात को इसी तटबंध के करीब 150 से 200 मीटर हिस्से में भारी कटाव देखा गया था। अब उसी स्थान से लगभग 500 मीटर पहले डाउनस्ट्रीम में यह नया कटाव सामने आया है। गंगा का बढ़ता दबाव तटबंध की संरचना को कमजोर कर रहा है, जिससे आसपास के गांवों में भी भय का माहौल है।

जियो बैग भी बहा ले गई गंगा

जल संसाधन विभाग ने वर्ष 2023-24 के दौरान तटबंध की सुरक्षा के लिए बड़े पैमाने पर जियो बैग्स का उपयोग किया था। हालांकि, गंगा के उग्र रूप के सामने ये सुरक्षात्मक साधन भी टिक नहीं पाए। विभाग के अधिकारियों ने बताया कि कटाव की तीव्रता इतनी अधिक थी कि जियो बैग्स नदी की धारा में बह गए, जिससे तटबंध का आधार और अधिक असुरक्षित हो गया है।

कटाव की सूचना मिलते ही जल संसाधन विभाग ने युद्धस्तर पर बचाव कार्य शुरू कर दिया है। मुख्य अभियंता जयप्रकाश पासवान के नेतृत्व में विभागीय टीमें मौके पर तैनात हैं। कटाव को रोकने के लिए बड़ी संख्या में मजदूरों के साथ-साथ पोकलेन मशीनों का भी उपयोग किया जा रहा है।

युद्धस्तर पर मरम्मत और निगरानी

तटबंध को बचाने के लिए विभाग द्वारा बोल्डर, नए जियो बैग और अन्य सुरक्षात्मक सामग्री डालने का काम निरंतर जारी है। अधिकारियों का मुख्य उद्देश्य गंगा के बढ़ते दबाव को नियंत्रित करना है ताकि कटाव को और आगे बढ़ने से रोका जा सके। इससे पहले क्षतिग्रस्त हुए 150-200 मीटर के हिस्से की मरम्मत का कार्य भी विभाग ने पूरा कर लिया था, ताकि तटबंध की मजबूती बनी रहे।

वर्तमान में प्रशासनिक और विभागीय टीमें 24 घंटे स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। स्थानीय प्रशासन ने भी लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। हालांकि, गंगा का जलस्तर और बहाव जिस तरह से तटबंध को निशाना बना रहा है, उसे देखते हुए आने वाले कुछ दिन काफी चुनौतीपूर्ण माने जा रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कटाव की गति पर जल्द काबू नहीं पाया गया, तो यह तटबंध के अन्य हिस्सों के लिए भी खतरा पैदा कर सकता है। फिलहाल, विभाग पूरी तरह से अलर्ट मोड पर है और कटावरोधी कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है ताकि किसी भी बड़ी आपदा को टाला जा सके।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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