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बड़वानी में सीवरेज प्रोजेक्ट की पोल खुली: बारिश में सड़कों पर बह रहा गंदा पानी, पार्षद ने मांगा जवाब

Barwani sewerage project woes intensify; councillor questions ₹7.5 crore plan status. बड़वानी जिला मुख्यालय पर चल रहा सीवरेज प्रोजेक्ट शहरवासियों के लिए समस्या बन गया है। हल्की बारिश में ही श्री राम चौक सहित मुख्य मार्गों पर सीवर चैंबर ओवरफ्लो हो रहे हैं, जिससे सड़कें तालाब में तब्दील हो जाती हैं।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

4 जुलाई 20263 मिनट पढ़ें 887
बड़वानी में सीवरेज प्रोजेक्ट की पोल खुली: बारिश में सड़कों पर बह रहा गंदा पानी, पार्षद ने मांगा जवाब
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बड़वानी जिला मुख्यालय पर चल रहा बहुप्रतीक्षित सीवरेज प्रोजेक्ट शहरवासियों के लिए राहत के बजाय मुसीबत का सबब बन गया है। मानसून की शुरुआती बारिश ने ही नगर पालिका के दावों की हवा निकाल दी है। शहर के प्रमुख मार्गों, विशेषकर श्री राम चौक पर सीवर चैंबर उफनने से सड़कों पर गंदा पानी जमा हो गया है, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

पार्षद ने उठाए 7.5 करोड़ की योजना पर सवाल

वार्ड क्रमांक 2 के पार्षद ईश्वर यादव ने इस स्थिति पर गहरी नाराजगी जताई है। उन्होंने 7.5 करोड़ रुपये की लागत वाली SDRF/SDMF फंड से संचालित नाला योजना की वर्तमान स्थिति को सार्वजनिक करने की मांग की है। पार्षद का कहना है कि पाला बाजार, सुतार मोहल्ला और दर्जी मोहल्ला जैसे इलाकों में जलभराव से जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। उन्होंने प्रशासन से पूछा है कि मानसून से पहले नालों की सफाई और प्रबंधन के लिए क्या ठोस कदम उठाए गए थे।

स्थानीय निवासियों का आरोप है कि सीवरेज लाइन बिछाने के बाद सड़कों की खुदाई और सही तरीके से मरम्मत न होने के कारण जल निकासी की समस्या गंभीर हो गई है। कालका माता मंदिर क्षेत्र में तो हर साल बारिश के दौरान बाढ़ जैसे हालात बन जाते हैं, जिससे लोगों के घरों में भी पानी घुसने का खतरा बना रहता है।

नगर पालिका और पीएचई विभाग के दावे बनाम हकीकत

नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिनिधि निक्कू चौहान के अनुसार, शहर में 95 किलोमीटर सीवर लाइन बिछाने का काम लगभग 90 प्रतिशत पूरा हो चुका है। उन्होंने बताया कि पीएचई विभाग को 15 जून 2026 तक लाइन टेस्टिंग पूरी करने का लक्ष्य दिया गया था। विभाग का दावा है कि टेस्टिंग का काम तेजी से चल रहा है, लेकिन धरातल पर स्थिति इसके विपरीत नजर आ रही है।

सांसद गजेंद्र सिंह पटेल ने भी हाल ही में सीवरेज प्रोजेक्ट के विभिन्न चरणों का निरीक्षण किया था। उन्होंने काम की धीमी गति और गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए थे। सांसद ने स्वीकार किया कि सड़कों को खोदकर अधूरा छोड़ने और उड़ती धूल से आम जनता बेहद परेशान है।

भविष्य की योजना और जवाबदेही का संकट

नगर पालिका ने अब 2030 तक के लिए एक नया ड्रेनेज सिस्टम प्लान तैयार किया है, जिसमें सड़कों के किनारे डक्ट बनाने का प्रावधान रखा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि सड़कों के किनारे उचित जल निकासी न होने के कारण ही डामर और सीमेंट की सड़कें जल्दी टूटकर गड्ढों में तब्दील हो रही हैं। हालांकि, बड़ा सवाल यह है कि जब तक पीएचई विभाग पूरी तरह से सीवरेज सिस्टम को नगर पालिका को हैंडओवर नहीं करता, तब तक ओवरफ्लो और लीकेज की जिम्मेदारी किसकी होगी?

बड़वानी में बुनियादी संसाधनों और कर्मचारियों की कमी भी एक बड़ी बाधा बनी हुई है। नगर पालिका के इंजीनियरों का दावा है कि पुरानी लाइनों के लीकेज को तत्काल सुधारा जा रहा है, लेकिन शहर की स्वच्छता और जल निकासी व्यवस्था पर उठ रहे सवाल अभी भी बरकरार हैं। अब देखना यह है कि प्रशासन बरसात के इस मौसम में लोगों को राहत देने के लिए क्या प्रभावी कदम उठाता है।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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