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बरेली जिम रेप और ब्लैकमेलिंग मामला: आरोपी की जमानत याचिका कोर्ट ने की खारिज

Bareilly doctor rape case bail rejected. Gym blackmail extortion case update. बरेली के सिविल लाइंस स्थित अल्टीमेट फिटनेस जिम में महिला डॉक्टर को नशीला ड्रिंक पिलाकर दुष्कर्म करने, अश्लील वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने और 50 लाख रुपये की रंगदारी मांगने के चर्चित मामले में कोर्ट ने आरोपी को राहत देने से इनकार कर दिया।

मोहम्मद फ़ैज़ान

मोहम्मद फ़ैज़ान

संपादक

4 जुलाई 20262 मिनट पढ़ें 1.3K
बरेली जिम रेप और ब्लैकमेलिंग मामला: आरोपी की जमानत याचिका कोर्ट ने की खारिज
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जिम संचालक और ट्रेनर पर लगा गंभीर आरोप

बरेली के सिविल लाइंस इलाके में स्थित एक फिटनेस सेंटर में महिला डॉक्टर के साथ हुई दुष्कर्म और ब्लैकमेलिंग की घटना ने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। इस मामले में मुख्य आरोपी की जमानत याचिका को अपर सत्र न्यायालय ने खारिज कर दिया है। कोर्ट ने मामले की गंभीरता और साक्ष्यों को देखते हुए आरोपी को फिलहाल कोई राहत देने से इनकार कर दिया है।

पीड़िता, जो पेशे से एक 48 वर्षीय डॉक्टर हैं, दिसंबर 2024 से उक्त जिम में नियमित रूप से वर्कआउट के लिए जाती थीं। आरोप है कि जिम संचालक अकरम बेग और उसके भाई व ट्रेनर आलम बेग ने एक सोची-समझी साजिश के तहत उन्हें नशीला पदार्थ पिलाया। इसके बाद पीड़िता की बेहोशी का फायदा उठाकर उनके आपत्तिजनक वीडियो बनाए गए, जिनका इस्तेमाल बाद में उन्हें ब्लैकमेल करने के लिए किया गया।

50 लाख की रंगदारी और धमकियों का सिलसिला

मामला तब और गंभीर हो गया जब आरोपियों ने पीड़िता को वीडियो वायरल करने की धमकी देकर उनसे मोटी रकम की मांग शुरू कर दी। शिकायत के अनुसार, 1 मई 2026 को आरोपियों ने पुनः दुष्कर्म का प्रयास किया और इसके बाद 10 लाख से शुरू हुई मांग 50 लाख रुपये की रंगदारी तक पहुंच गई। लगातार मिल रही धमकियों से तंग आकर पीड़िता ने 4 मई 2026 को कोतवाली थाने में एफआईआर दर्ज कराई।

पुलिस ने मामले की गंभीरता को समझते हुए जिम संचालक अकरम बेग और आलम बेग के खिलाफ दुष्कर्म, ब्लैकमेलिंग, अवैध वसूली और जान से मारने की धमकी देने जैसी गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। जांच के बाद दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था, जिसके बाद से वे न्यायिक हिरासत में हैं।

सरकारी वकील की दलील और कोर्ट का रुख

सुनवाई के दौरान सरकारी अधिवक्ता सुरेश बाबू ने आरोपी की जमानत याचिका का पुरजोर विरोध किया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि आरोपियों ने न केवल महिला का यौन शोषण किया, बल्कि ब्लैकमेलिंग के जरिए उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित भी किया। उन्होंने तर्क दिया कि ऐसे गंभीर अपराध के आरोपी को जमानत देना समाज के लिए खतरनाक हो सकता है और इससे साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की संभावना बनी रहेगी।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और केस डायरी का गहन अवलोकन करने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश अशोक कुमार यादव ने आलम बेग की जमानत अर्जी खारिज कर दी। कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि प्रथम दृष्टया मामला अत्यंत गंभीर है और वर्तमान परिस्थितियों में आरोपी को रिहा करना न्याय के हित में नहीं होगा।

इस फैसले के बाद दोनों आरोपी फिलहाल जिला जेल में बंद हैं। इस घटना ने जिम और फिटनेस सेंटरों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसके बाद स्थानीय स्तर पर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

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टिप्पणियाँ (2)

  • अमित कुमार2 घंटे पहले

    बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। FN News पर भरोसा बना रहता है।

  • सपना ठाकुर4 घंटे पहले

    ग्वालियर-चंबल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!

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